आज जब प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को अक्सर महंगी कोचिंग और बड़े शहरों से जोड़कर देखा जाता है, ऐसे दौर में जम्मू-कश्मीर के बडगाम ज़िले के सुरस्यार (चडूरा) निवासी इरफ़ान मंज़ूर की कहानी इस सोच को चुनौती देती है। उन्होंने साबित किया कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत ईमानदार हो और खुद पर विश्वास हो, तो सीमित संसाधन भी सफलता की राह नहीं रोक सकते।
उपलब्ध विश्वसनीय जानकारी के अनुसार, इरफ़ान मंज़ूर ने मात्र 24 वर्ष की आयु में बिना किसी कोचिंग का सहारा लिए केवल स्व-अध्ययन के बल पर पहली ही कोशिश में जम्मू-कश्मीर प्रशासनिक सेवा (JKAS) परीक्षा उत्तीर्ण की थी। यह उपलब्धि आज भी हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा मानी जाती है, जो कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।
प्रशासनिक सेवा में चयन के बाद इरफ़ान मंज़ूर ने अपनी कार्यशैली और जिम्मेदारियों के निर्वहन से अलग पहचान बनाई। वर्तमान में वे जम्मू-कश्मीर सरकार के जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट (GAD) में डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर अपनी सेवाएँ दे रहे हैं और प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
इरफ़ान मंज़ूर की सफलता केवल एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं, बल्कि यह संदेश है कि सपनों को पूरा करने के लिए सबसे बड़ी ताकत महंगी कोचिंग नहीं, बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति, अनुशासित तैयारी और लगातार की गई मेहनत होती है। यही कारण है कि उनकी संघर्ष और सफलता की यात्रा आज जम्मू-कश्मीर के युवाओं के लिए उम्मीद, आत्मविश्वास और प्रेरणा का प्रतीक बन चुकी है।
