संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), काला सागर और बाब अल-मन्दब जलडमरूमध्य में समुद्री आवाजाही में रुकावट से भूख का संकट और गहरा रहा है. उन्होंने इन बाधाओं को तुरन्त दूर करने की अपील की है.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सोमवार को न्यूयॉर्क में पत्रकारों से बात करते हुए चेतावनी दी कि अमेरिका-ईरान-इसराइल, रूस-यूक्रेन और यमन के हूती विद्रोहियों व सऊदी अरब से जुड़े युद्धों एवं हिंसक टकरावों में वैश्विक खाद्य आपूर्ति “अनचाहा शिकार” बन रही है.
महासचिव ने कहा कि “अहम समुद्री मार्गों का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए.” उन्होंने ज़ोर दिया कि भोजन, ऊर्जा और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बिना रुकावट जारी रहनी चाहिए.
यूएन प्रमुख ने कहा, “समुद्री आवागमन के अधिकार व स्वतंत्रता, शान्ति, सुरक्षा एवं साझा समृद्धि की आधारशिला हैं और इनका सम्मान किया जाना चाहिए. उनकी रक्षा करना क़ानूनी दायित्व भी है और मानवीय आवश्यकता भी.”
हिंसक टकरावों से समुद्री व्यापार बाधित
ईरान और ओमान के बीच फ़ारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ने वाले होर्मुज़ जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाज़ों की आवाजाही बेहद कम हो गई है.
अमेरिकी और ईरानी बल अपने-अपने नियंत्रण वाले हिस्सों से सीमित संख्या में, मुख्य रूप से तेल टैंकरों को सुरक्षा देकर निकाल रहे हैं.
यूएन महासचिव ने कहा कि होर्मुज़ से जहाज़ों की आवाजाही घटने के कारण तेल की क़ीमतें और माल ढुलाई की दरें बढ़ी हैं, जिसका असर भोजन व उर्वरकों की क़ीमतों पर पड़ रहा है.
लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाले बाब अल-मन्दब जलडमरूमध्य में यमन के ईरान-समर्थित हूती लड़ाकों ने सऊदी अरब से जुड़े जहाज़ों के ख़िलाफ़ नौसैनिक नाकाबन्दी की घोषणा की है.
ऐतिहासिक रूप से समुद्री तेल व्यापार का लगभग 12 प्रतिशत बाब अल-मन्दब से और दुनिया की तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत होर्मुज़ से होकर गुज़रता रहा है. मौजूदा युद्धों और हिंसक टकरावों से वैश्विक तेल क़ीमतों में तेज़ बढ़ोत्तरी हुई है.
काला सागर में भी हाल के महीनों में रूसी एवं यूक्रेनी बलों ने बन्दरगाहों और मालवाहक जहाज़ों पर हमले तेज़ किए हैं, जिससे वैश्विक अनाज आपूर्ति पर ख़तरा बढ़ गया है.
इन तीनों हिंसक टकरावों के कारण भोजन का उत्पादन और उसकी ढुलाई, दोनों महँगे हो रहे हैं. साथ ही, दुनिया के दो प्रमुख अनाज निर्यातक देशों से होने वाली आपूर्ति भी गम्भीर जोखिम में है.
महासचिव ने कहा, “ये संकट वैश्विक व्यापार के अहम रास्तों को बाधित कर रहे हैं और खाद्य व्यवस्था पर भारी दबाव डाल रहे हैं. नतीजा साफ़ है – ऊँची क़ीमतें, बढ़ती भूख, कमज़ोर फ़सलें और बढ़ती पीड़ा, ख़ासतौर पर दुनिया के सबसे संवेदनशील लोगों के लिए.”
अन्तरराष्ट्रीय क़ानून पर आधारित अपील
समुद्री आवागमन के अधिकार का मतलब है कि सभी जहाज़ों को रणनैतिक रूप से अहम अन्तरराष्ट्रीय जलमार्गों से होकर गुज़रने का क़ानूनी अधिकार है, भले ही वे जलमार्ग तटीय देशों की सम्प्रभुता या अधिकार क्षेत्र में आते हों.
समुद्री क़ानून पर 1982 के संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन (UNCLOS) के तहत, जलडमरूमध्य से लगे देश “पारगमन में बाधा नहीं डाल सकते.” अमेरिका,ईरान और इसराइल ने इस सन्धि की पुष्टि नहीं की है.
महासचिव ने कहा, “समुद्री आवागमन के अधिकार और स्वतंत्रताएँ कोई अमूर्त सिद्धान्त नहीं, बल्कि अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का हिस्सा हैं. ये अधिकार अन्तरराष्ट्रीय शान्ति और सुरक्षा के लिए बेहद अहम हैं.”
कुछ आपूर्तियों की सुरक्षा में मदद सम्भव
यूएन महासचिव ने कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से मानवीय उद्देश्यों के लिए सामान की सुरक्षित, व्यवस्थित और भरोसेमन्द आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए मार्च में गठित यूएन कार्यबल समाधान का एक सम्भावित रास्ता हो सकता है. शुरुआत में इसका ध्यान वाणिज्यिक उर्वरकों और उनसे जुड़े कच्चे माल की आपूर्ति पर है.
संयुक्त राष्ट्र परियोजना सेवा कार्यालय (UNOPS) के कार्यकारी निदेशक जॉर्ज मोरेरा दा सिल्वा के नेतृत्व वाले इस कार्यबल का दायरा आगे अन्य उत्पादों तक भी बढ़ाया जा सकता है.
महासचिव ने इसे अस्थाई उपाय बताते हुए कहा कि यह समुद्री आवागमन की पूरी स्वतंत्रता बहाल होने तक मददगार हो सकता है. उन्होंने कहा कि दुनिया भर में लाखों संवेदनशील लोगों की सुरक्षा के लिए यह ज़रूरी है.
उन्होंने कहा, “यह व्यवस्था समुद्री आवागमन के अधिकारों और स्वतंत्रता को पूरी तरह बहाल करने या इन हिंसक टकरावों को समाप्त करने के लिए ज़रूरी राजनैतिक समाधानों का विकल्प नहीं है. लेकिन यह एक व्यावहारिक पहला क़दम है.”
Source : UN News
