(तौसीफ़ रज़ा) भारत का संविधान एक ऐसे समाज का ख़ाका पेश करता है जहाँ हर नागरिक की क़ानूनी बराबरी, धार्मिक आज़ादी, इंसानी गरिमा और इंसाफ़…
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इस्लाम और दस्तूर: इंसाफ़ और बराबरी के उसूल
(मुदससिर अशरफी) संविधान किसी भी जम्हूरी समाज के लिए महज़ एक क़ानूनी दस्तावेज़ नहीं होता, बल्कि वह इंसाफ़, बराबरी, आज़ादी, इंसानी गरिमा और क़ानून की…
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By : Shakeel Akhtar कर्नाटक के गृहमंत्री प्रियांक खरगे ने जो मुद्दे उठाए हैं ठीक वही गांधी जी की हत्या के बाद उस समय के…
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By अब्दुल्लाह मंसूर 26 जनवरी कोई रस्मी तारीख़ नहीं है। यह वह दिन है जब हिंदुस्तान ने सदियों पुरानी मनमानी सत्ता, जातिगत ऊँच-नीच और धार्मिक…
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