क़ुरआन और संविधान: इंसाफ़, बराबरी और इंसानी गरिमा की एक आवाज़

(तौसीफ़ रज़ा) भारत का संविधान एक ऐसे समाज का ख़ाका पेश करता है जहाँ हर नागरिक की क़ानूनी बराबरी, धार्मिक आज़ादी, इंसानी गरिमा और इंसाफ़…

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इस्लाम और दस्तूर: इंसाफ़ और बराबरी के उसूल

(मुदससिर अशरफी) संविधान किसी भी जम्हूरी समाज के लिए महज़ एक क़ानूनी दस्तावेज़ नहीं होता, बल्कि वह इंसाफ़, बराबरी, आज़ादी, इंसानी गरिमा और क़ानून की…

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संघ, संविधान और रजिस्ट्रेशन: प्रियंक खरगे ने क्यों छेड़ी 100 साल पुरानी बहस?

By : Shakeel Akhtar कर्नाटक के गृहमंत्री प्रियांक खरगे ने जो मुद्दे उठाए हैं ठीक वही गांधी जी की हत्या के बाद उस समय के…

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भारतीय संविधान: पसमांदा समाज की ढाल और वजूद का दस्तावेज

By अब्दुल्लाह मंसूर 26 जनवरी कोई रस्मी तारीख़ नहीं है। यह वह दिन है जब हिंदुस्तान ने सदियों पुरानी मनमानी सत्ता, जातिगत ऊँच-नीच और धार्मिक…

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