नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी (एआई) को लेकर देश-दुनिया में बहस तेज है। क्या यह तकनीक नौकरियां छीन लेगी या नए अवसर पैदा करेगी? एंट्री लेवल कर्मचारियों से लेकर वरिष्ठ पदों पर बैठे पेशेवरों तक, हर कोई इस सवाल का जवाब तलाश रहा है।
जनवरी 2026 में World Economic Forum की एक रिपोर्ट में कहा गया कि एआई के कारण दुनियाभर में लाखों नई नौकरियां बनी हैं। इससे संकेत मिलता है कि एआई केवल बदलाव का माध्यम नहीं, बल्कि रोजगार के नए द्वार भी खोल रहा है। मोबाइल फोन, बैंकिंग, ऑनलाइन शॉपिंग, सोशल मीडिया और हेल्थकेयर लगभग हर क्षेत्र में एआई सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
एआई क्या है?
Shiv Nadar University के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विभाग के प्रमुख प्रोफेसर आकाश सिन्हा के अनुसार, एआई वह तकनीक है जो मशीनों को इस तरह सक्षम बनाती है कि वे इंसानों की तरह सोचने-समझने का आभास दें।
यूट्यूब पर सुझाए गए वीडियो, सोशल मीडिया पर दिखने वाले पोस्ट और विज्ञापन, या बैंकिंग लेनदेन में संभावित धोखाधड़ी की पहचान ये सभी एआई एल्गोरिद्म के जरिए संभव होते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय के साथ ये सिस्टम लगातार सीखते और बेहतर होते जाते हैं।
विशेषज्ञों की सलाह: खुद को करें अपडेट
दिल्ली स्थित टेक पॉलिसी थिंक टैंक Esya Centre की निदेशक और एआई विशेषज्ञ मेघना बल का कहना है कि एआई उन लोगों के लिए खतरा नहीं है जो खुद को लगातार अपडेट रखते हैं।
उनके मुताबिक, कई बुनियादी कोर्स ‘SWAYAM’ पोर्टल पर मुफ्त उपलब्ध हैं। मशीन लर्निंग, अप्लाइड मशीन लर्निंग, बिजनेस और डेटा एनालिटिक्स में एआई का उपयोग, प्रोडक्ट एवं स्ट्रैटेजी मैनेजमेंट में एआई और साइबर सिक्योरिटी से जुड़े कोर्स भविष्य में उपयोगी साबित हो सकते हैं।
एआई में करियर के पांच प्रमुख विकल्प
प्रोफेसर आकाश सिन्हा के अनुसार, एआई में मजबूत करियर के लिए निम्नलिखित कोर्स अहम माने जा सकते हैं:
एमबीए/पीजी डिप्लोमा इन एआई एंड बिजनेस एनालिटिक्स
यह कोर्स बिजनेस और मैनेजमेंट पृष्ठभूमि वाले छात्रों के लिए उपयुक्त है। इसे Indian Institutes of Management और Indian School of Business जैसे संस्थानों या एडुटेक प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया जा सकता है। फीस लगभग 2.5 से 7 लाख रुपये तक हो सकती है, जबकि संभावित सैलरी 6 से 20 लाख रुपये सालाना बताई गई है।
एआई सर्टिफिकेट प्रोग्राम (ऑनलाइन)
Udacity जैसे प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध यह कोर्स शुरुआती स्तर के विद्यार्थियों के लिए है। इसकी फीस करीब 1.5 लाख रुपये है और कोर्स के बाद 10 लाख रुपये सालाना तक की सैलरी मिल सकती है।
एमसीए/एमटेक इन एआई एंड मशीन लर्निंग
यह कोर्स Indian Institutes of Technology, National Institutes of Technology और Indian Institutes of Information Technology सहित अन्य विश्वविद्यालयों में उपलब्ध है। सालाना फीस 1 से 10 लाख रुपये तक हो सकती है और संभावित सैलरी 22 लाख रुपये तक पहुंच सकती है।
बीएससी/बीटेक इन एआई एंड डेटा साइंस
यह कोर्स Delhi Technological University, Vellore Institute of Technology, Amity University, St. Xavier’s College और National Institutes of Technology जैसे संस्थानों में उपलब्ध है। पूरे प्रोग्राम की फीस 1 से 20 लाख रुपये तक हो सकती है और संभावित सैलरी 6 से 18 लाख रुपये सालाना तक बताई गई है।
एआई बूटकैंप और इंडस्ट्री प्रोग्राम
IIT Madras और IIT Bombay समेत कई संस्थानों में उपलब्ध इन प्रोग्राम्स की फीस 1 से 3.5 लाख रुपये के बीच हो सकती है। कोर्स के बाद 6 से 18 लाख रुपये या उससे अधिक का पैकेज मिल सकता है।
प्रोफेसर सिन्हा के मुताबिक, सीनियर एआई भूमिकाओं में 25 से 40 लाख रुपये या उससे अधिक का वार्षिक वेतन भी संभव है, खासकर बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे टेक हब में।
किन क्षेत्रों पर कम असर?
निवेश बैंक Goldman Sachs की एक रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि 2030 तक एआई के चलते दुनिया भर में 30 करोड़ फुल-टाइम नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि जिन पेशों में मानवीय अनुभव और विशेषज्ञता की जरूरत है जैसे नर्स, हेल्थकेयर प्रोफेशनल, फिजियोथेरेपिस्ट, साइकोलॉजिस्ट और शिक्षक उन पर एआई का प्रभाव सीमित रहेगा। चार्टर्ड अकाउंटेंट, डॉक्टर, एआई इंजीनियर, साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट और वकील जैसे क्षेत्रों में भी विशेषज्ञता बनाए रखने पर करियर सुरक्षित रह सकता है।
निष्कर्ष :
एआई से जुड़े बदलाव अनिवार्य हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जो लोग नई तकनीक को अपनाएंगे और खुद को लगातार अपस्किल करेंगे, उनके लिए एआई के दौर में करियर और सैलरी दोनों के बेहतर अवसर उपलब्ध रहेंगे।
