पाकिस्तान में आखिर किसकी चलती है? ट्रंप के एक बयान ने बढ़ाई शहबाज सरकार की मुश्किलें

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान के साथ जारी बातचीत के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर “अब्राहम अकॉर्ड्स” को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने साफ संकेत दिए कि अगर क्षेत्र में शांति की कोशिशें सफल रहीं, तो आने वाले समय में कई मुस्लिम देश इजरायल के साथ रिश्ते सामान्य करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

लेकिन ट्रंप के इस पूरे बयान में सबसे ज्यादा चर्चा पाकिस्तान को लेकर हुई एक बात की हो रही है।

दरअसल, ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर जिन देशों के नेताओं का नाम लिया, उनमें सऊदी अरब से लेकर तुर्की और कतर तक के शीर्ष नेताओं का जिक्र था। लेकिन पाकिस्तान की बात आते ही तस्वीर बदल गई। यहां उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का नाम लेने के बजाय सीधे पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर का उल्लेख किया।

यही वजह है कि ट्रंप का यह बयान अब पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था पर नई बहस छेड़ रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर दुनिया भी पाकिस्तान में असली ताकत किसे मानती है?

मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक हाल के दिनों में इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान बातचीत से जुड़ी गतिविधियों के दौरान भी फील्ड मार्शल आसिम मुनीर काफी सक्रिय दिखाई दिए। उन्होंने विदेशी प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात की और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से सीधे बातचीत भी की। ऐसे में ट्रंप द्वारा उनका नाम लेना कई राजनीतिक संकेत छोड़ गया।

ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि ईरान के साथ बातचीत “अच्छे तरीके से आगे बढ़ रही है”। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर बातचीत असफल हुई, तो क्षेत्र फिर बड़े संघर्ष की ओर बढ़ सकता है। वहीं अगर समझौता सफल रहा, तो अब्राहम अकॉर्ड्स के जरिए मिडिल ईस्ट में एक नया राजनीतिक समीकरण बन सकता है।

क्या है अब्राहम अकॉर्ड्स?

अब्राहम अकॉर्ड्स की शुरुआत साल 2020 में अमेरिका की पहल पर हुई थी। इस समझौते के तहत UAE, बहरीन, मोरक्को और सूडान जैसे देशों ने इजरायल के साथ अपने रिश्ते सामान्य किए। इसके बाद व्यापार, यात्रा और कूटनीतिक संबंधों में तेजी आई।

अमेरिका इसे मिडिल ईस्ट में शांति और आर्थिक सहयोग की दिशा में बड़ा कदम मानता है। हालांकि कई देशों और संगठनों का कहना है कि फिलिस्तीन मुद्दे का समाधान हुए बिना इजरायल से रिश्ते सामान्य करना सही नहीं है।

पाकिस्तान की बात करें तो उसने अब तक इजरायल को मान्यता नहीं दी है। पाकिस्तान लगातार यह कहता रहा है कि जब तक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राष्ट्र की स्थापना नहीं होती, तब तक इजरायल के साथ सामान्य संबंध संभव नहीं हैं।

ऐसे में अगर भविष्य में पाकिस्तान अब्राहम अकॉर्ड्स की तरफ बढ़ता है, तो देश के अंदर राजनीतिक और जनस्तर पर बड़ा विरोध देखने को मिल सकता है। लेकिन फिलहाल ट्रंप के बयान ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि पाकिस्तान में सत्ता के असली केंद्र को लेकर दुनिया की नजर क्या कहती है।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *