संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने शनिवार को अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से, मध्य पूर्व क्षेत्र में हिंसक टकराव से बुरी तरह प्रभावित लेबनान सरकार और आम जनता के लिए समर्थन बढ़ाने की अपील की है. साथ ही, उन्होंने चेतावनी दी कि देश के दक्षिणी हिस्से के “बंजर भूमि में बदलने का जोखिम” पनप रहा है.
अमेरिका और इसराइल द्वारा ईरान पर पिछले दो सप्ताह से की जा रही व्यापक बमबारी से बड़े पैमाने पर विध्वंस हुआ है.
लेबनान की यात्रा कर रहे यूएन प्रमुख ने बेरूत में पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए कहा कि हिज़बुल्लाह ने ईरान के समर्थन में इसराइल पर रॉकेट हमले किए. इन हमलों के तुरन्त बाद, इसराइल ने एक “भयंकर” बमबारी अभियान शुरू किया, जिसने लेबनान के बड़े हिस्सों को रहने योग्य नहीं छोड़ा है.
उन्होंने कहा, “लेबनान की जनता ने यह युद्ध नहीं चुना. उन्हें इसमें घसीटा गया है…इस युद्ध को समाप्त होना चाहिए.”
कोई सैन्य समाधान नहीं
यूएन प्रमुख ने स्पष्ट किया कि मध्य पूर्व में जारी युद्ध का कोई सैन्य समाधान नहीं है, और केवल संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुरूप कूटनैतिक रास्ता ही सम्भव है.
उन्होंने यह भी माना कि लेबनान के दक्षिणी हिस्से और उत्तरी इसराइल को अलग करने वाली ‘ब्लू लाइन’ के इर्दगिर्द, दोनों पक्षों पर वर्तमान स्थिति का गम्भीर प्रभाव पड़ा है.
यूएन शान्तिरक्षा बल (UNIFIL), सुरक्षा परिषद के आदेशानुसार इस क्षेत्र की निगरानी कर रहा है.
सैकड़ों लोगों की मौत, विस्थापन का दंश
हिज़बुल्लाह के रॉकेट हमलों के डर से इसराइली नागरिक सुरक्षित आश्रयों की ओर चले गए हैं, जबकि अनेक बच्चों समेत सैकड़ों लेबनानी लोगों की मौत हुई है.
इसराइल द्वारा लेबनान के नागरिकों को जगह छोड़कर जाने के आदेश दिए जाने के बाद, युद्ध प्रभावित दक्षिणी हिस्से और दक्षिणी बेरूत में हिज़बुल्लाह का गढ़ माने जाने वाले इलाक़ों में, 8 लाख से अधिक लोग अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर हुए हैं.
यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने कहा, “आज, मैं एक आश्रय स्थल में जिन विस्थापित लोगों से मिला, उनकी आपबीती सुनकर मुझे गहरी पीड़ा हुई.”
उन्होंने कहा कि लेबनान और इसराइल के बीच एक साल से अधिक समय पहले हुआ युद्धविराम समझौता भी हिंसा को पूरी तरह रोक नहीं सका है. हिज़बुल्लाह और इसराइली बलों, दोनों पर ही युद्धविराम की शर्तों के उल्लंघन के आरोप हैं.
शान्तिरक्षकों को निशाना बनाना ‘अस्वीकार्य’
यूएन प्रमुख ने हाल के दिनों में हमलों का सामना कर रहे UNIFIL बलों के साहस को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि, “शान्तिरक्षकों और उनकी चौकियों पर हमले पूरी तरह अस्वीकार्य हैं और ये तुरन्त रुकने चाहिए.”
यूएन के शीर्षतम अधिकारी ने लेबनान सरकार के अगस्त 2025 में लिए गए उस ऐतिहासिक निर्णय की सराहना की, जिसके तहत देश में हथियारों पर “एकाधिकार” स्थापित करने की बात कही गई थी.
उन्होंने कहा कि हिज़बुल्लाह लड़ाकों को इसका पालन करना चाहिए और सुरक्षा परिषद के सभी प्रस्तावों के अनुरूप अपने हथियार सौंप देने चाहिए.

वैश्विक अपील
महासचिव ने कहा, “अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के लिए मेरा सन्देश बेहद स्पष्ट है – अपनी सक्रियता बढ़ाएँ.”
लेबनान को मज़बूत बनाइए और लेबनानी सशस्त्र बलों को उनकी ज़रूरी क्षमताएँ और संसाधन उपलब्ध कराने में सहयोग दीजिए.
उन्होंने देशों से लेबनान सरकार के नेतृत्व में चल रही मानवीय राहत कार्रवाई के समर्थन में संयुक्त राष्ट्र की आपात सहायता अपील के लिए उदारतापूर्वक योगदान की अपील की है.
“लेबनान के लोगों के साथ-साथ इसराइल और पूरे क्षेत्र के अन्य लोगों को भी भय के बिना जीने का अधिकार है. उन्हें अपने बच्चों का पालन-पोषण, सायरन और हमलों की आवाज़ के बिना करने का अवसर मिलना चाहिए…”
महासचिव ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र, लेबनान की जनता और संस्थानों के समर्थन के लिए धरातल पर लगातार काम कर रहा है. “हम मिलकर उस शान्तिपूर्ण भविष्य के लिए हर सम्भव प्रयास करेंगे, लेबनान और यह पूरा क्षेत्र जिसके हक़दार हैं.”
Source : UN News
