इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि किसी मस्जिद में नमाज़ पढ़ने आने वाले लोगों की संख्या को प्रशासन द्वारा सीमित नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि यदि स्थानीय अधिकारी कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सक्षम नहीं हैं, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए या फिर अपना तबादला करवा लेना चाहिए।
जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की डिवीजन बेंच ने यह टिप्पणी संभल जिले की एक मस्जिद में नमाज़ियों की संख्या सीमित करने के स्थानीय प्रशासन के फैसले पर सुनवाई के दौरान की। कोर्ट ने कहा कि राज्य का कर्तव्य है कि वह यह सुनिश्चित करे कि हर समुदाय अपने निर्धारित पूजा स्थल पर शांतिपूर्वक प्रार्थना कर सके।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि पूजा या धार्मिक कार्यक्रम किसी निजी संपत्ति पर आयोजित किए जा रहे हों, तो इसके लिए राज्य से किसी प्रकार की अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होती। अनुमति केवल तभी आवश्यक होती है जब धार्मिक कार्यक्रम सार्वजनिक जमीन पर आयोजित किए जाएँ या सार्वजनिक संपत्ति तक फैल रहे हों।
दरअसल, कोर्ट एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें आरोप लगाया गया था कि रमज़ान के दौरान राज्य के अधिकारी मुसलमानों को संभल स्थित एक मस्जिद (गाटा संख्या 291) में नमाज़ पढ़ने से रोक रहे हैं।
हालांकि सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता मस्जिद की तस्वीरें पेश करने में असफल रहा है। राज्य की ओर से यह भी दलील दी गई कि जिस स्थान को मस्जिद बताया जा रहा है, उसके स्वामित्व को लेकर विवाद है।
इसके साथ ही राज्य ने यह भी स्वीकार किया कि संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए उस स्थान पर केवल 20 नमाज़ियों को नमाज़ पढ़ने की अनुमति दी गई थी। अदालत ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है और इसके आधार पर नमाज़ियों की संख्या सीमित नहीं की जा सकती।
कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को लगता है कि ऐसी स्थिति बन सकती है जिसे वे संभाल नहीं सकते, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए या फिर संभल से बाहर अपना तबादला करवा लेना चाहिए।
फिलहाल अदालत ने राज्य सरकार से इस याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा है। साथ ही याचिकाकर्ता को निर्देश दिया गया है कि वह मस्जिद की तस्वीरें और राजस्व रिकॉर्ड अदालत के सामने पेश करे, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि नमाज़ किस स्थान पर पढ़ी जानी है।
मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी। इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से वकील वहाज अहमद सिद्दीकी अदालत में पेश हुए।
