फैक्ट चेक: कश्मीर में स्मार्ट मीटर विरोध को ईरान दान से जोड़ने वाला दावा भ्रामक

ईरान से जुड़े अंतरराष्ट्रीय हालात के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कुछ महिलाएं बिजली के मीटर तोड़ती नज़र आती हैं। इसके साथ दावा किया जा रहा है कि यह कश्मीर का दृश्य है, जहां लोगों ने 600 करोड़ रुपये ईरान को दान दिए और अब मुफ्त बिजली के लिए मीटर तोड़ रहे हैं।

सोशल साइट X (पूर्व ट्विटर) पर वेरिफाइड यूजर द जयपुर डायलोग ने वायरल वीडियो को शेयर कर लिखा कि Kashmiri’s collected & donated Rs 600 croers to IRAN. And today they are breaking electrical meters because they want free electricity. (हिन्दी अनुवाद – कश्मीर ने 600 करोड़ रुपये जमा करके ईरान को दान दिए। और आज वे बिजली के मीटर तोड़ रहे हैं, क्योंकि उन्हें मुफ़्त बिजली चाहिए।)

इसके अलावा कई अन्य वेरिफाइड यूजर्स ने भी इसी दावे के साथ वीडियो को साझा किया है। जिसे यहां पर क्लिक कर देखा जा सकता है।

फैक्ट चेक

इस दावे की सच्चाई जानने के लिए Times Headline ने वीडियो के कीफ्रेम निकालकर रिवर्स सर्च किया। जांच के दौरान यही वीडियो फेसबुक पर मिला, जिसे 27 नवंबर 2025 को Punjab Kesari / Jammu & Kashmir पेज से शेयर किया गया था। वीडियो से स्पष्ट होता है कि कश्मीरी महिलाएं बढ़े हुए बिजली बिलों के खिलाफ स्मार्ट मीटर का विरोध कर रही थीं।

आगे की पड़ताल में इंस्टाग्राम पर भी इसी घटना का एक और वीडियो मिला। 26 नवंबर 2025 को indian.now द्वारा साझा किए गए इस वीडियो के कैप्शन में बताया गया कि जम्मू-कश्मीर में तब विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ जब बिजली विभाग ने स्मार्ट मीटर लगाकर मीटर-आधारित बिलिंग लागू की। स्थानीय महिलाओं ने मीटर तोड़ते हुए इसे वापस लेने की मांग की और आरोप लगाया कि बिना पूर्व सूचना के भारी-भरकम बिल भेजे जा रहे हैं, जिन्हें भरना उनके लिए संभव नहीं है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की, जबकि पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी। इस घटना के बाद बिजली सब्सिडी और वितरण व्यवस्था को लेकर बहस भी तेज हो गई।

निष्कर्ष

Times Headline के फैक्ट चेक में यह साफ हुआ कि वायरल दावा भ्रामक है। यह वीडियो हाल का नहीं, बल्कि 26 नवंबर 2025 का है। इसमें महिलाएं मुफ्त बिजली की मांग नहीं कर रहीं, बल्कि महंगे बिजली बिलों के विरोध में स्मार्ट मीटर के खिलाफ प्रदर्शन कर रही हैं। इस घटना का ईरान को दान दिए जाने वाले दावे से कोई संबंध नहीं है।

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