शांति और सह-अस्तित्व के नाम पर चलाए जा रहे एक अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट को लेकर PACBI ने गंभीर आपत्ति जताई है। अभियान ने इसे फिलिस्तीनी अधिकारों की अनदेखी और इजरायल के साथ सामान्यीकरण को बढ़ावा देने वाला बताया है।
मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, Palestinian Campaign for the Academic and Cultural Boycott of Israel (PACBI) ने ‘Peacebuilding Lab’ प्रोजेक्ट में शामिल लोगों से इससे तुरंत अलग होने की अपील की है। PACBI ने अरब क्षेत्र के सभी प्रतिभागियों से इस पहल से हटने का आह्वान किया है।
PACBI की ओर से जारी एक प्रेस बयान में कहा गया है कि ‘Peacebuilding Lab’ खुद को एक संयुक्त पहल के तौर पर पेश करता है। इस प्रोजेक्ट में हाइफ़ा स्थित Gordon Academic College of Education के साथ जॉर्डन, लेबनान, फिलिस्तीन, इटली और साइप्रस के साझेदार शामिल हैं। इस पहल को यूरोपीय संघ के Erasmus+ कार्यक्रम से संयुक्त रूप से फंडिंग मिलने की बात कही गई है।
इसके अलावा प्रोजेक्ट की गतिविधियों का फोकस युवाओं, खेल और ‘बौद्धिक संवाद’ तथा ‘सह-अस्तित्व’ को बढ़ावा देने वाली पहलों पर है। हालांकि, अभियान का आरोप है कि यह पहल फिलिस्तीनी लोगों के अविच्छेद्य अधिकारों को नजरअंदाज करती है। इनमें आत्मनिर्णय, वापसी और राष्ट्रीय मुक्ति के अधिकार शामिल हैं। PACBI ने कहा कि इस तरह की पहल उपनिवेशकर्ता और उपनिवेशित के बीच नैतिक और राजनीतिक समानता स्थापित करती है।
PACBI ने फिलिस्तीनी और अरब नागरिक समाज संगठनों तथा युवा समूहों से इस प्रोजेक्ट के बहिष्कार के लिए शांतिपूर्ण सार्वजनिक दबाव बढ़ाने और इसकी विफलता सुनिश्चित करने की दिशा में काम करने की अपील की है। साथ ही, लोगों से इस पहल या इसी तरह के उन प्रोजेक्ट्स से जुड़े किसी भी कार्यक्रम, गतिविधि या आयोजन में हिस्सा नहीं लेने को कहा गया है, जिन्हें अभियान इजरायल के साथ सामान्यीकरण को बढ़ावा देने वाला मानता है।
इसके अलावा, PACBI ने यूरोपीय समाजों और नागरिक समाज संगठनों से यूरोपीय संघ पर दबाव बढ़ाने की अपील की है। अभियान चाहता है कि यूरोपीय संघ इजरायली कब्जे में अपनी कथित मिलीभगत समाप्त करे और उन प्रोजेक्ट्स को समर्थन देना बंद करे, जो उसके अनुसार कब्जे को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इजरायल की छवि सुधारने में योगदान देते हैं।
