भारत के इतिहास में विभाजन की कहानी अक्सर पाकिस्तान और बांग्लादेश तक ही सीमित समझी जाती है। लेकिन हाल के वर्षों में एक और सवाल तेजी से चर्चा में आता रहा है, क्या कभी अफगानिस्तान भी भारत का हिस्सा रहा था?
इंटरनेट पर मौजूद अलग-अलग रिपोर्ट्स और स्रोतों के आधार पर सामने आई जानकारी इस सवाल को और दिलचस्प बना देती है। इन दावों के मुताबिक, आज का अफगानिस्तान कभी भारत के प्रभाव क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता था।
बताया जाता है कि मुगल काल में यह क्षेत्र भारत से जुड़ा हुआ था, लेकिन 18वीं सदी आते-आते हालात तेजी से बदलने लगे। मुगल साम्राज्य कमजोर पड़ रहा था और इसी दौरान फारस (ईरान) के शक्तिशाली शासक नादिर शाह का उदय हुआ।
रिपोर्ट्स के अनुसार, 26 मई 1739 एक अहम तारीख मानी जाती है। इसी दिन मुगल शासक शाह रंगीला और नादिर शाह के बीच एक संधि हुई। माना जाता है कि इस समझौते के परिणामस्वरूप मुगलों ने अफगानिस्तान के कई अहम हिस्सों पर अपना नियंत्रण खो दिया।
इतिहास के इन दावों में यह भी कहा गया है कि नादिर शाह ने सबसे पहले कंधार पर कब्जा किया और फिर 1738-39 के दौरान गजनी और काबुल जैसे महत्वपूर्ण इलाकों को भी अपने अधीन कर लिया। ये सभी क्षेत्र पहले मुगल शासन के दायरे में माने जाते थे।
हालांकि, यह कहानी यहीं खत्म नहीं होती। इससे भी पहले के दौर में जाएं तो महान सम्राट अशोक के साम्राज्य में भी अफगानिस्तान के कुछ हिस्से शामिल होने के दावे किए जाते हैं। कहा जाता है कि अशोक ने इन इलाकों में बौद्ध धर्म का प्रचार किया और इसके प्रमाण के तौर पर वहां शिलालेख भी मिले हैं।
इन सभी तथ्यों और दावों के बीच यह स्पष्ट है कि इतिहास की परतें कई बार जटिल और बहस का विषय बन जाती हैं।
स्पष्टीकरण:
यह पूरी जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध विभिन्न स्रोतों और रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार की गई है। इसमें बदलाव संभव है और किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
