होर्मुज तनाव के बीच भारत को बड़ी राहत: ईरान ने टोल माफ किया, सुरक्षित रास्ते की गारंटी

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चल रही खींचतान के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। ऐसे समय में जब अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों और इस अहम जलमार्ग पर नाकेबंदी का ऐलान कर रखा है, ईरान ने भारत के पक्ष में एक अहम फैसला लिया है।

ईरान ने साफ कर दिया है कि उसके रास्ते से गुजरने वाले भारतीय जहाजों से कोई टोल नहीं वसूला जाएगा। यानी जहां अन्य देशों के लिए हालात अनिश्चित बने हुए हैं, वहीं भारत के जहाजों को बिना किसी अतिरिक्त बोझ के गुजरने की अनुमति दी जा रही है। इससे भारत के व्यापार और तेल आपूर्ति पर पड़ने वाले संभावित असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फताली ने इस मुद्दे पर स्पष्टता देते हुए कहा कि अब तक भारतीय जहाजों से कोई शुल्क नहीं लिया गया है। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि आगे भी भारतीय जहाजों को पूरी सुरक्षा के साथ होर्मुज से गुजरने दिया जाएगा। उनका यह बयान सिर्फ एक आश्वासन नहीं, बल्कि भारत-ईरान रिश्तों की मजबूती का संकेत भी है।

दरअसल, जब वैश्विक स्तर पर कई देश अमेरिकी नाकेबंदी को लेकर असमंजस में हैं, तब ईरान का भारत के प्रति यह रुख दिखाता है कि दोनों देशों के बीच भरोसा कितना गहरा है। फताली ने भारत को एक “विश्वसनीय और समझदार साथी” बताते हुए कहा कि मुश्किल समय में भी दोनों देश साथ खड़े हैं और उनके बीच सांस्कृतिक व रणनीतिक संबंध मजबूत बने हुए हैं।

हालांकि स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं है। होर्मुज क्षेत्र में अभी भी 15 भारतीय जहाज फंसे हुए हैं। भारत सरकार इन्हें सुरक्षित वापस लाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। जलमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल के मुताबिक, इस काम में विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर हर संभव कदम उठाया जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अमेरिका की नाकेबंदी को लेकर एकमत नहीं है। ब्रिटेन ने साफ तौर पर इसका समर्थन करने से इनकार कर दिया है, जबकि ऑस्ट्रेलिया ने कहा है कि उसे इस संबंध में अमेरिका की तरफ से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।

निष्कर्ष:


कुल मिलाकर, जिस समय होर्मुज जलमार्ग को लेकर अनिश्चितता और तनाव चरम पर है, उस समय ईरान का यह फैसला भारत के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। यह न सिर्फ मौजूदा संकट में भारत के हितों की रक्षा करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि वैश्विक राजनीति में मजबूत रिश्ते कितने मायने रखते हैं।

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