ऑक्यूपाइड यरुशलम में इज़राइली प्रशासन ने अल-अक्सा मस्जिद से सटे बाब-अस-सिलसिला इलाके में फ़िलिस्तीनी संपत्तियों को कब्ज़ाने की योजना को मंज़ूरी दे दी है। फ़िलिस्तीनी सूचना केंद्र की रिपोर्ट के मुताबिक़, इस फैसले को पुराने शहर में फ़िलिस्तीनी मौजूदगी कमज़ोर करने और यहूदी बस्तियों का दायरा बढ़ाने की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।
यरुशलम गवर्नरेट ने अपने बयान में कहा कि यह फैसला 1968 के पुराने ज़ब्ती आदेश को लागू करने की दिशा में उठाया गया कदम है। रिपोर्ट के अनुसार, इज़राइल इसे इलाके में “यहूदी नियंत्रण और सुरक्षा” मजबूत करने की कार्रवाई बता रहा है।
जानकारी के मुताबिक़, इस योजना के तहत बाब-अस-सिलसिला मार्ग पर मौजूद 15 से 20 ऐतिहासिक फ़िलिस्तीनी संपत्तियों को निशाना बनाया गया है। ये इमारतें स्थानीय फ़िलिस्तीनी परिवारों और इस्लामी वक्फ़ की संपत्ति हैं, जिनका इतिहास अय्यूबी, ममलूक और उस्मानी दौर से जुड़ा हुआ है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि तथाकथित “यहूदी क्वार्टर” का प्रबंधन करने वाली संस्था को इन संपत्तियों पर कब्ज़े और अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी करने का अधिकार दिया जाएगा।
यरुशलम गवर्नरेट ने कहा कि बाब-अस-सिलसिला अल-अक्सा मस्जिद तक पहुंचने वाले सबसे अहम ऐतिहासिक रास्तों में से एक है। ऐसे में इस इलाके को निशाना बनाना केवल ज़मीन कब्ज़ाने का मामला नहीं, बल्कि पुराने शहर की पहचान बदलने की कोशिश भी है।
बयान में यह भी बताया गया कि इस क्षेत्र में कई अहम इस्लामी और ऐतिहासिक इमारतें मौजूद हैं, जिनमें तश्तामरिय्या मदरसा भी शामिल है।
गवर्नरेट के अनुसार, इज़राइली प्रशासन 1968 में भी “जनहित” के नाम पर पुराने शहर में लगभग 116 दूनम ज़मीन कब्ज़ा कर चुका है। इसके बाद तथाकथित “यहूदी क्वार्टर” का क्षेत्र 1948 से पहले के पाँच दूनम से बढ़कर लगभग 133 दूनम तक पहुंच गया, जिसमें ज़्यादातर ज़मीन निजी फ़िलिस्तीनी संपत्तियों से ली गई थी।
यरुशलम गवर्नरेट ने इस फैसले को अंतरराष्ट्रीय क़ानून और ऑक्यूपाइड यरुशलम से जुड़े अंतरराष्ट्रीय प्रस्तावों का खुला उल्लंघन बताया है। साथ ही संयुक्त राष्ट्र, यूनेस्को और दूसरी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि अल-अक्सा मस्जिद और पुराने शहर के आसपास फ़िलिस्तीनी संपत्तियों पर कब्ज़े की कार्रवाई रोकी जा सके।
