ग़ाज़ा, पश्चिमी तट और लेबनान में इसराइली सैन्य हमलों से लोग भारी पीड़ा में

संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने कहा है कि फ़लस्तीनी क्षेत्रों ग़ाज़ा पट्टी और पश्चिमी तट व लेबनान में इसराइल के सैन्य हमलों के कारण, आम लोग लगातार और बढ़ती कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं. हिंसक टकराव, विस्थापन और जारी सैन्य अभियानों ने मानवीय ज़रूरतों को गहरा कर दिया है और पहले से ही सीमित सहायता प्रयासों पर दबाव बढ़ा दिया है.

यूएन एजेंसियों ग़ाज़ा में अधिकांश लोग विस्थापित हैं और स्वास्थ्य एवं पर्यावरणीय जोखिमों का सामना कर रहे हैं, जबकि आवासीय क्षेत्र हमलों के चपेट में बने हुए हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बताया है कि ग़ाज़ा में 43 हज़ार से अधिक लोग इस रूप से में घायल हुए हैं कि उनका जीवन अब पहले जैसा नहीं रहेगा,  जबकि पुनर्वास सेवाएँ अपनी क्षमता से अधिक दबाव का सामना कर हैं.

ग़ाज़ा में अत्यन्त आवश्यक सहायता सामग्री, बहुत कम मात्रा में पहुँच रही है: संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व वाले संचालन क़ाफ़िले द्वारा जुटाए गए आँकड़ों के आधार पर जानकारी मिली है कि मई के पहले 11 दिनों में, मिस्र से आने वाले हर दो सहायता ट्रकों में से केवल एक ट्रक ही, ग़ाज़ा की सीमा पर इसराइल द्वारा नियंत्रित सीमा चौकी पर सामान उतार सका.

हालाँकि, इन बाधाओं के बावजूद, मानवीय साझीदार एजेंसियाँ, ग़ाज़ा के लोगों को रोटी (ब्रेड) का उत्पादन बहाल करने और बाज़ार की शुरुआती पुनर्बहाली को मज़बूत करने में मदद कर रहे हैं.

यहूदी बाशिन्दों द्वारा हिंसा में उछाल

आम लोगों की पीड़ा केवल ग़ाज़ा तक सीमित नहीं है: जॉर्डन घाटी में यहूदी बाशिन्दों द्वारा की जा रही हिंसा में भारी उछाल देखा गया है, जहाँ हताहतों की संख्या और सम्पत्ति के नुक़सान वाली घटनाओं में वर्ष 2020 के बाद से, औसतन मासिक 14 गुना वृद्धि दर्ज की गई है.

पश्चिमी तट में यहूदी बाशिन्दों ने, 5 से 11 मई के बीच फ़लस्तीनियों के स्वामित्व वाली 45 इमारतों को ध्वस्त कर दिया. इनमें से 90 प्रतिशत इमारतों का उपयोग कृषि, आजीविका, पानी या स्वच्छता उद्देश्यों के लिए किया जाता था.

लेबनान: ‘ख़ौफ़नाक’ वास्तविकता के सामने कूटनीति फीकी

लेबनान में संयुक्त राष्ट्र के रैज़िडेंट और मानवीय कोऑर्डिनेटर इमरान रिज़ा ने ने शुक्रवार को बताया कि 17 अप्रैल से शुरू हुए युद्धविराम के बावजूद, लेबनान में आम लोग, इसराइल के हवाई हमलों से लगातार विनाशकारी नुक़सान का सामना कर रहे हैं.

इमरान रिज़ा ने ध्यान दिलाया कि हवाई हमले और विध्वंस, हर दिन जारी हैं, जिससे महिलाओं, पुरुषों और बच्चों के साथ-साथ विस्थापित परिवारों में लोग हताहत हो रहे हैं. इनमें सीरियाई और फ़लस्तीनी शरणार्थी व बांग्लादेशी प्रवासी शामिल हैं.  इस स्थिति से बचाव दल भी प्रभावित हुए हैं.

उन्होंने विनाश के पैमाने का आकलन करने के लिए शुक्रवार को बेरूत के दक्षिणी उपनगरों की अपनी यात्रा के दौरान, स्थानीय लोगों से उनके बार-बार विस्थापन, सदमे, तबाह हो चुके घरों, आजीविका और क्षतिग्रस्त बुनियादी सेवाओं के अनुभवों के बारे में बात की.

उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “लोगों ने नुक़सान, सदमा और जीवित रहने की दिल दहला देने वाली कहानियाँ बयान कीं. एक व्यक्ति ने हमें बताया कि वह किसी काम से बाहर गया था जब 8 अप्रैल को हुए एक हमले ने, उसके घर को तबाह कर दिया, जिसमें उसकी पत्नी, पुत्र और उन दो विस्थापित परिवारों की मौत हो गई जिन्हें उसने शरण दी हुई थी.”

अन्तरराष्ट्रीय क़ानून और सुरक्षा

अन्तरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून के तहत आम लोगों की हर समय रक्षा की जानी चाहिए जिनमें मानवीय कार्यकर्ता, चिकित्सा दल और बचाव दल भी शामिल हैं. साथ ही, आम लोगों के लिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे को नुक़सान नहीं पहुँचाया जाना चाहिए. 

अन्तरराष्ट्रीय क़ानून कहता है कि सभी पक्षों को ज़रूरतमन्द नागरिकों तक तेज़ी से और निर्बाध मानवीय पहुँच सुनिश्चित करनी चाहिए.

इमरान रिज़ा ने कहा, “राजनयिक प्रयास अब हिंसा को रोकने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं. लेबनान के लोगों को तत्काल सुरक्षा, स्थिरता और उबरने के अवसर की आवश्यकता है, न कि नए दर्द, विस्थापन और पीड़ा दिए जाने की.”

Source : UN News

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