नई दिल्ली: “सपने वही सच होते हैं, जिन्हें पूरा करने का हौसला इंसान अपने अंदर जिंदा रखता है।” इस कथन को सच कर दिखाया है डॉ. मरियम अफीफा अंसारी ने, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों, सीमित संसाधनों और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद सफलता की ऐसी मिसाल कायम की है, जो आज लाखों बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुकी है। डॉ. मरियम, भारत के मुस्लिम समुदाय की पहली महिला न्यूरोसर्जन है।
महाराष्ट्र के मालेगांव के एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली मरियम ने अपनी शुरुआती शिक्षा उर्दू माध्यम स्कूल से प्राप्त की। उर्दू मीडियम से पढ़ाई करने के बावजूद उन्होंने कभी अपने सपनों को छोटा नहीं होने दिया। बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना देखने वाली मरियम ने हर परीक्षा में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
बाद में उनका परिवार हैदराबाद आ गया, जहां उन्होंने राजकुमारी दुरुशेवर गर्ल्स हाई स्कूल से 10वीं तक की पढ़ाई की। पढ़ाई में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए उन्होंने 10वीं कक्षा में गोल्ड मेडल हासिल किया। इसके बाद उन्होंने उस्मानिया मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया और MBBS की पढ़ाई पूरी की।
MBBS के दौरान मरियम ने पांच गोल्ड मेडल जीतकर अपनी असाधारण प्रतिभा साबित की। वर्ष 2017 में उन्हें जनरल सर्जरी में मास्टर्स कोर्स के लिए फ्री एडमिशन मिला। इसके बाद उन्होंने अपने संघर्ष और मेहनत का सफर जारी रखा।
साल 2019 में मरियम ने इंग्लैंड के प्रतिष्ठित रॉयल कॉलेज ऑफ सर्जन्स से MRCS की डिग्री प्राप्त की। वहीं वर्ष 2020 में उन्होंने डिप्लोमेट ऑफ नेशनल बोर्ड (DNB) कोर्स पूरा किया। इसी वर्ष आयोजित ऑल इंडिया NEET SS परीक्षा में उन्होंने 137वीं रैंक हासिल कर बड़ी उपलब्धि अपने नाम की। इस शानदार प्रदर्शन के आधार पर उन्हें उस्मानिया मेडिकल कॉलेज में MCh के लिए फ्री एडमिशन मिला और उन्होंने न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में अपनी पहचान स्थापित की।
अपनी सफलता पर डॉ. मरियम कहती हैं कि यह केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी भी है। मरियम की मां एक सिंगल मदर और शिक्षिका हैं, जिन्होंने तमाम मुश्किलों के बावजूद अपनी बेटी की शिक्षा और सपनों को कभी रुकने नहीं दिया। मरियम आज भी अपनी मां के संघर्ष को अपनी सबसे बड़ी ताकत मानती हैं।
डॉ. मरियम ने मुस्लिम लड़कियों और देश की सभी बेटियों को संदेश देते हुए कहा कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं होती। उन्होंने कहा,
“कभी हार मत मानिए और किसी को यह मत कहने दीजिए कि आप कुछ नहीं कर सकतीं। अपनी मेहनत से खुद को साबित कीजिए।”
पढ़ाई के अलावा मरियम पेंटिंग, कैलिग्राफी और इस्लामिक शिक्षण में भी रुचि रखती हैं। उनकी यह बहुमुखी प्रतिभा बताती है कि सफलता केवल डिग्रियों से नहीं, बल्कि व्यक्तित्व की गहराई से भी बनती है।
डॉ. मरियम अफीफा अंसारी की कहानी आज उन सभी युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो कठिन हालात के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं। उनका सफर यह संदेश देता है कि मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के बल पर हर असंभव लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
