क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़ा: मौतों, विध्वंस, इसराइली बस्तियों का विस्तार जारी

इसराइल और हमास के बीच अक्टूबर 2025 में, ग़ाज़ा में संघर्षविराम लागू होने के बाद, हिंसा के स्तर में कमी आई है लेकिन फ़लस्तीनियों की मौतें और बुनियादी ढाँचे का विध्वंस अब भी हो रहा है है. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, क़ाबिज़ पश्चिमी तट में जिस पैमाने पर फ़लस्तीनी आबादी जबरन विस्थापित का शिकार हो रही है, वैसा पिछले कई दशकों में नहीं देखा गया.

क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े में मानवाधिकार मामलों के लिए यूएन प्रमुख अजीथ सुंघाय ने सोमवार को अपनी एक नई रिपोर्ट में यह जानकारी दी है, जिसमें 7 अक्टूबर 2023 से 31 मई 2025 तक की अवधि पर ब्यौरा एकत्र किया गया है. 

अक्टूबर 2023 में हमास व अन्य हथियारबन्द गुटों ने इसराइल में आतंकी हमले किए थे, जिसके बाद इसराइली सैन्य बलों ने ग़ाज़ा में बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू की थी.

रिपोर्ट में अत्याचार अपराधों, युद्ध अपराधों, मानवता के विरुद्ध सम्भावित अपराधों, अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के उल्लंघन मामलों पर जानकारी जुटाई गई है, जिन्हें इसराइली सेना और फ़लस्तीनी लड़ाकों द्वारा अंजाम दिए जाने के आरोप लगे हैं.

अजीथ सुंघाय ने बताया कि अक्टूबर 2025 में संघर्षविराम लागू होने के बाद बड़े पैमाने पर हो रही हिंसा में कमी आई है और मानवीय सहायता प्रयासों के लिए कुछ हद तक सम्भावना बनी है.

“मगर, हर दिन मौतों और बुनियादी ढाँचे के विध्वंस का सिलसिला लगभग जारी है और कुल मिलाकर मानवीय स्थिति बहुत गम्भीर बनी हुई है. जबकि हमास द्वारा भी अधिकार उल्लंघन मामलों को अंजाम दिया जाना जारी है, ग़ाज़ा के लोगों के विरुद्ध भी.”

रिपोर्ट की अवधि के दौरान, इसराइली बलों के हाथों अभूतपूर्व स्तर पर फ़लस्तीनी मारे गए हैं , और फ़लस्तीनियों व उनकी भूमि पर इसराइली नियंत्रण में सख़्ती आई है. वहीं, फ़लस्तीनी प्रशासन और हथियारबन्द गुटों की ओर से भी अंधाधुंध रॉकेट हमले किए जाने, बन्धक बनाए जाने समेत चिन्ताजनक आचरण की घटनाएँ हुई हैं.

यातना, बुरा बर्ताव, हिंसा

रिपोर्ट के अनुसार, फ़लस्तीनी हथियारबन्द गुटों द्वारा 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमलों में, युद्ध अपराधों व मानवता के विरुद्ध सम्भावित अपराधों को अंजाम दिया गया, जिनमें कम से कम 1,124 लोग मारे गए, बड़ी संख्या में लोगों को बंधक बना लिया गया और एक साल से अधिक समय तक इसराइली इलाक़ों में हज़ारों दिशाहीन मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया.

अजीथ सुंघाय ने कहा कि रिहा हुए बन्धकों ने उन्हें “यातना दिए जाने, यौन हिंसा समेत बुरे बर्ताव का शिकार बनाए जाने पर विश्वसनीय जानकारी दी है.” 

वहीं, “इसराइल ने भी ग़ाज़ा और पश्चिमी तट में भयावह हिंसा की लहर शुरू की, और सैन्य बलों पर युद्ध अपराधों को अंजाम देने और मानवता के विरुद्ध सम्भावित अपराधों को अंजाम दिया गया.

उन्होंने कहा कि ग़ाज़ा में इसराइली सेना के आचरण से, जनसंहार के अपराध की रोकथाम व उसके लिए दंड पर सन्धि के तहत, तयशुदा दायित्वों को निभाने के मामले में गम्भीर चिन्ताएँ उपजी हैं.

घेराबन्दी, भुखमरी, विस्थापन

अजीथ सुंघाय ने कहा कि यह स्थिति अब भी है कि फ़लस्तीनियों के पास अपनी गुज़र-बसर सुनिश्चित करने और परिजन की रक्षा के लिए कोई ज़रिया नहीं है. युद्धविराम की घोषणा के बाद से अब तक सैकड़ों फ़लस्तीनी मारे जा चुके हैं.

“7 अक्टूबर 2023 के बाद से, इसराइली सेना ने ग़ाज़ा में 72,769 फ़लस्तीनियों को मारा है: उनके घरों, आन्तरिक विस्थापितों के आश्रय स्थलों, अस्पतालों, स्कूलों, उपासना स्थलों, सड़कों पर जबकि मानवीय सहायता के लिए लोगों का तांता लगा हुआ था.” 

ग़ाज़ा की इसराइली घेराबन्दी की वजह से भूख और कुछ हिस्सों में अकाल की स्थिति उपजी है. अजीथ सुंघाय ने कहा कि आम नागरिकों के विरुद्ध युद्ध छेड़ने और उसमें भूख को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना एक युद्ध अपराध है.

वहीं, ग़ाज़ा में हो रहे विस्थापन की वजह से जातीय सफ़ाए और जबरन हस्तांतरण के विषय में गम्भीर चिन्ताएँ उपजी हैं. लोग उन इलाक़ों से भाग गए हैं, जो अब उनके हाथों से निकल चुके हैं और “इसराइली सेना अवैध रूप से घरों, इमारतों को ढहाने में जुटी है.

बस्तियों का ‘अभूतपूर्व’ विस्तार

क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े में मानवाधिकार मामलों के प्रमुख ने बताया कि पश्चिमी तट में जिस दर से फ़लस्तीनी जबरन विस्थापन का शिकार हो रहे हैं, वैसा पिछले कई दशकों में नहीं देखा गया. साथ ही, इसराइली बस्तियों का ‘अभूतपूर्व’ ढंग से विस्तार हो रहा है. 

इसराइली सेना, पुलिस बलों और इसराइली बस्तियों के निवासियों के हाथों मारे जाने वाले फ़लस्तीनियों की संख्या बढ़ रही है और इसके लिए दंडहीनता व्याप्त है. 7 अक्टूबर 2023 के हमलों के बाद से अब तक, पश्चिमी तट में 1,096 फ़लस्तीनी अपनी जान गँवा चुके हैं, जिनमें लगभग 20 प्रतिशत संख्या बच्चों की है.

इसराइली बस्तियों के निवासियों द्वारा “इन हमलों को इसराइली सुरक्षा बलों के समर्थन, मौन सहमति और भागेदारी के साथ” अंजाम दिया जाता है.

उन्होंने बताया कि इसराइली सरकार ने बस्तियाँ बसाने की इस मुहिम का सैन्यीकरण तेज़ कर दिया है, और इसे किसी भी प्रकार की जवाबदेही से बचाया जा रहा है और भूमि का हरण करने के एजेंडा को बस्तियों के बाशिन्दों द्वारा हिंसा को अंजाम देने से मदद मिल रही है.

घर लौटने में असमर्थ

रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष जेनिन, तुलकारेम और नूर शम्स, इन तीन शरणार्थी शिविरों से 33 हज़ार से अधिक फ़लस्तीनी विस्थापित हुए थे और वे अभी तक अपने घर नहीं लौट पाए हैं. 

अजीथ सुंघाय ने कहा कि इसराइली प्रशासन, पूर्वी येरूशलम में पुराने शहर वाले इलाक़े से फ़लस्तीनियों को जबरन उनके घर से बाहर निकलवा रहा है, उनकी सम्पत्तियाँ इसराइली बस्तियों के निवासियों को दी जा रही हैं या फिर एक पार्क, केबल कार जैसी परियोजनाओं के लिए जगह बनाई जा रही है.

रिपोर्ट में उन मामलों में भी जानकारी जुटाई गई है, जिनमें इसराइली हिरासत में फ़लस्तीनी बन्दियों को यातना दिए जाने, उनके साथ यौन हिंसा, पर्याप्त भोजन न दिए जाने, मेडिकल देखभाल नकारे जाने समेत अन्य प्रकार से बुरा बर्ताव होने के आरोप लगे हैं.

अजीथ सुंघाय ने कहा कि नस्लीय अलगाव और रंगभेद पर लगी पाबन्दियों का, इसराइल द्वारा ऐसे भेदभावपूर्ण तौर-तरीक़ों के ज़रिए उल्लंघन किया जा रहा है.

Source : UN News

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