इसराइल के क़ब्ज़े वाले फ़लस्तीनी क्षेत्र ग़ाज़ा पट्टी में अक्टूबर 2025 में युद्धविराम घोषित होने के बाद भी ठप पड़ी शान्ति प्रक्रिया और युद्ध से बुरी तरह तबाह हो चुके इस इलाक़े के भविष्य और पश्चिमी तट लगातार बिगड़ रहे हालात के बारे में चर्चा करने के लिए, गुरूवार को सुरक्षा परिषद की बैठक हो रही है. इन दोनों ही फ़लस्तीनी इलाक़ों में आम लोगों की मौतें हो रही हैं और मानवीय हालात लगातार बदतर होते जा रहे हैं.
ग़ाज़ा ‘और अधिक युद्ध नहीं झेल सकता’
मध्य पूर्व शान्ति प्रक्रिया के लिए संयुक्त राष्ट्र के उप विशेष समन्वयक रमीज़ अलअकबरोव ने गुरूवार की बैठक में कहा कि इसराइल द्वारा क़ाबिज़ पूरे फ़लस्तीनी क्षेत्र में स्थिति लगातार अनिश्चित और ख़तरनाक होती जा रही है. पूर्वी येरूशेलम सहित पश्चिमी तट इलाक़े में यहूदी बस्तियों का विस्तार, यहूदी बाशिन्दों (settlers) से जुड़ी हिंसा और उकसावे वाली गतिविधियाँ लगातार तनाव बढ़ा रहे हैं.
उन्होंने कहा कि ग़ाज़ा में, युद्धविराम के बाद की शुरुआती गतिशीलता की जगह, प्रस्ताव 2803 (2025) को लागू किए जाने में देरी, दैनिक हिंसा और मानवीय संकट ने ले ली है.
इस पृष्ठभूमि के बीच, जहाँ युद्धविराम के दूसरे चरण को लागू करने के बारे में आगे बढ़ने पर बातचीत चल रही है, वहीं कुछ इलाक़ों में युद्धक व हिंसक गतिविधियाँ फि से शुरू करने की मांगें भी उठ रही हैं.
उन्होंने ज़ोर देकर कहा, “ग़ाज़ा के लोग और अधिक युद्ध नहीं झेल सकते. ऐसे हालात से हर क़ीमत पर बचा जाना चाहिए.”
प्रस्ताव 2803 (2025) को लागू करें
मध्य पूर्व शान्ति प्रक्रिया के लिए उप विशेष समन्वयक रमीज़ अलअकबरोव ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव 2803 (2025) लागू किए जाने के लिए अब और इन्तज़ार नहीं किया जा सकता.
ग़ौरतलब है कि 17 नवम्बर 2025 को सुरक्षा परिषद द्वारा पारित इस प्रस्ताव में, ग़ाज़ा में युद्धविराम और शान्ति स्थापना के लिए एक व्यापक शान्ति योजना को स्वीकृति दी गई थी.
रमीज़ अलअकबरोव ने कहा कि ग़ाज़ा में युद्ध को समाप्त करने की व्यापक योजना के सभी तत्वों को पूरी तरह से लागू किया जाना चाहिए, जिसमें हमास और अन्य सशस्त्र समूहों का निरस्त्रीकरण, इसराइली सेना की वापसी और अन्तरराष्ट्रीय स्थिरता बल की तैनाती शामिल है.
इनके साथ ही, ग़ाज़ा के प्रशासन के लिए राष्ट्रीय समिति को भी सक्षम बनाया जाना चाहिए.
उन्होंने आगाह किया कि ग़ाज़ा में इसराइली हमले लगभग हर दिन जारी हैं, जिनमें रोज़ाना अनेक लोग मारे जा रहे हैं, और इसके साथ ही हमास और अन्य फ़लस्तीनी समूहों की सशस्त्र गतिविधियाँ भी जारी हैं.
इसराइल ने कहा है कि अब ग़ाज़ा के 60 प्रतिशत हिस्से पर उसका नियंत्रण है, जो युद्धविराम के समय के 52 प्रतिशत से अधिक है.
इस बीच, मानवीय स्थितियाँ बेहद गम्भीर बनी हुई हैं, और इसराइल द्वारा परिचालन चौकियों को सीमित रखे जाने और उन महत्वपूर्ण मानवीय वस्तुओं पर प्रतिबन्धों के कारण राहत कार्य “भारी रूप से बाधित” हैं जिन्हें इसराइल दोहरे उपयोग की वस्तुएँ मानता है.
उन्होंने ज़ोर देकर कहा, “हमें प्रस्ताव 2803 (2025) के अनुरूप एक स्थाई सुधार को सक्षम करने के लिए तंत्र स्थापित करना चाहिए.”

मानवीय सहायता अभियान बाधित
इस बीच यूएन एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि ग़ाज़ा में मानवीय सहायता अभियान, धन की कमी के कारण, आवाजाही पर प्रतिबन्ध और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढाँचे के कारण तेज़ी से सीमित होते जा रहे हैं.
इसराइल के क़ब्ज़े वाले फ़लस्तीनी क्षेत्र के लिए ‘2026 सहायता अपील’ के जवाब में अभी केवल 12 प्रतिशत धनराशि ही प्राप्त हुई, जबकि सहायता क़ाफ़िलों को लगातार देरी, टूटी-फूटी सड़कों और महत्वपूर्ण उपकरणों व ईंधन के प्रवेश पर प्रतिबन्धों का सामना करना पड़ रहा है.
पूरे ग़ाज़ा पट्टी क्षेत्र में खाद्य असुरक्षा भी गम्भीर बनी हुई है, जहाँ मानवीय भागीदार अब प्रतिदिन भोजन के लगभग 10 लाख पैकेटों की सहायता वितरित कर पा रहे हैं, जो कि फ़रवरी के 18 लाख पैकेटों की संख्या से काफ़ी कम है.
सहायता एजेंसियों का कहना है कि पाँच में से एक परिवार, दिन में केवल एक बार भोजन खाता है, और कई माताओं को अपने बच्चों को भोजन खिलाने की ख़ातिर, स्वयं भूखे पेट रहना पड़ता है.
Source : UN News
