पुणे की कई हाउसिंग सोसाइटियों में आजकल बच्चों के हाथों में सिर्फ मोबाइल नहीं, बल्कि गुब्बारे, चुंबक, बोतलें और दूरबीन भी दिखाई देती हैं। इसकी वजह हैं प्रो. मुज्तबा लोखंडवाला, जो बच्चों को आसान प्रयोगों के जरिए विज्ञान से जोड़ रहे हैं। वे मानते हैं कि विज्ञान सिर्फ किताबों का विषय नहीं, बल्कि सोचने और सवाल पूछने का तरीका है।
प्रो. लोखंडवाला बच्चों को खेल-खेल में हवा का दबाव, रोशनी का परावर्तन, गुरुत्वाकर्षण और ऊर्जा जैसी बातें समझाते हैं। उनके वर्कशॉप में कोई सवाल गलत नहीं माना जाता। हर बच्चे को खुलकर सोचने और प्रयोग करने का मौका मिलता है। खास बात यह है कि वर्कशॉप के बाद सोसाइटी में “साइंस क्लब” बनाए जाते हैं, ताकि सीखना लगातार चलता रहे।

शाम होते ही कई बार ये क्लास छतों पर पहुंच जाती है, जहां बच्चे दूरबीन से चांद, तारों और ग्रहों को देखते हैं। ज्योतिर्विद्या परिसंस्था के पूर्व अध्यक्ष रह चुके प्रो. लोखंडवाला बच्चों में विज्ञान के साथ जिज्ञासा और आत्मविश्वास भी जगा रहे हैं। उनका मानना है कि अगर बच्चों को मोबाइल से दूर रखना है, तो उन्हें उससे ज्यादा दिलचस्प विकल्प देना होगा।
