संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने इसराइल और लेबनान के प्रतिनिधियों के बीच, 2-3 जून को संयुक्त राज्य अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में हुई चौथी उच्चस्तरीय बैठक के बाद युद्धविराम की घोषणा का स्वागत किया है.
यूएन प्रमुख ने सभी पक्षों से आग्रह किया है कि हिंसक टकराव पर लगे विराम का पूर्ण सम्मान करना होगा, अन्य हमलों को रोकना होगा, और अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के तहत तयशुदा दायित्वों को निभाना होगा.
28 फ़रवरी को मध्य पूर्व में इसराइल, संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा ईरान पर हवाई बमबारी किए जाने और उसके बाद ईरान के जवाबी ड्रोन व मिसाइल हमलों से पूरे क्षेत्र में गहरा तनाव व्याप्त हो गया था.
2 मार्च को लेबनान में हिज़बुल्ला ने इसराइल पर रॉकेट हमले किए, जिसके बाद इसराइली सैन्य बलों ने बड़े पैमाने पर अपनी कार्रवाई शुरू की. इन परिस्थितियों में, उत्तरी इसराइल और दक्षिणी लेबनान को अलग करने वाली रेखा, ‘ब्लू लाइन’ के इर्दगिर्द और उससे परे हिंसक टकराव में तेज़ी आई थी.
इससे पहले भी लेबनान में युद्धविराम पर सहमति बन चुकी हैं, लेकिन उसके बावजूद टकराव रुक-रुककर जारी रहा है.
महासचिव के प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने गुरूवार को उनकी ओर से जारी एक वक्तव्य में कहा कि यूएन, हिंसक टकराव पर विराम लगाने और ब्लू लाइन के इर्दगिर्द समुदायों की पीड़ा को दूर करने के लिए प्रयासों को अपना समर्थन जारी रखेगा.
इससे पहले, लेबनान के दक्षिणी हिस्से में हिज़बुल्लाह लड़ाकों और इसराइली सेना के बीच झड़पें होने और हवाई हमलों में लोगों के हताहत होने की ख़बरें थी.
राजधानी बेरूत में ही 2 लाख से अधिक लोग दक्षिणी इलाक़ों से विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए हैं, और स्थानीय समुदाय भय में जीवन गुज़ार रहे हैं.
सम्प्रभुता का सम्मान
महासचिव गुटेरेश ने दोहराया कि हिज़बुल्लाह समेत ग़ैर-सरकारी संगठनों को लेबनान सरकार द्वारा किए गए निर्णयों का पालना करना होगा, पूरे क्षेत्र में राज्यसत्ता का प्रभाव क़ायम करना होगा, और हथियारों पर सरकारी का पूर्ण नियंत्रण सुनिश्चित करना होगा.
उन्होंने इसराइल से अपील की है कि लेबनान की सम्प्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करते हुए ‘ब्लू लाइन’ के उत्तर से पूरी तरह वापिस लौटा जाना होगा.
संयुक्त राष्ट्र, टकराव पर विराम लगाने के लिए सभी कूटनैतिक प्रयासों और सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1701 (2006) को पूरी तरह से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है. इस प्रस्ताव को वर्ष 2006 में पारित किया गया था, और इसमें इसराइली सैनिकों व हिज़बुल्लाह लड़ाकों से दक्षिणी लेबनान से बाहर जाने और टकराव को पूर्ण रूप से रोकने की बात कही गई है.
यूएन प्रमुख ने लेबनान में सशस्त्र बलों समेत सरकारी संस्थाओं को और अधिक समर्थन देने का आग्रह किया है. साथ ही, उम्मीद जताई है कि वार्ता को जारी रखा जाएगा, ताकि इस समझौते के ज़रिए स्थाई शान्ति व स्थिरता में योगदान मिलेगा.
Source : UN News
