मध्य पूर्व: लाल सागर में हूती हमलों से व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का ख़तरा

संयुक्त राष्ट्र ने शुक्रवार को चेतावनी दी कि अमेरिका-ईरान युद्ध के और फैलने का ख़तरा बढ़ रहा है. मध्य पूर्व में तेज़ होती लड़ाई और होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर नियन्त्रण को लेकर जारी टकराव से दुनिया भर में जहाज़ों की आवाजाही भी ख़तरे में है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश लाल सागर में वाणिज्यिक जहाज़ों पर हूती हमले फिर शुरू होने और समुद्री आवाजाही पर बढ़ते ख़तरों से बेहद चिन्तित हैं. उनके प्रवक्ता ने एक वक्तव्य में यह जानकारी दी.

ईरान समर्थित यमन का हूती आन्दोलन, जिसे औपचारिक रूप से अंसार अल्लाह के नाम से जाना जाता है, हाल ही में इस युद्ध में शामिल हुआ है. उसने लाल सागर तक पहुँचने वाले अहम समुद्री मार्ग बाब अल-मन्दब जलडमरूमध्य की नाकेबन्दी की धमकी दी है.

हूती विद्रोही एक दशक से अधिक समय से सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबन्धन द्वारा समर्थित यमन सरकार की सेनाओं से लड़ रहे हैं. मीडिया ख़बरों के अनुसार, उन्होंने गुरुवार को दो सऊदी तेल टैंकरों पर हमला करने का दावा किया.

व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का ख़तरा

संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने कहा, “हूतियों द्वारा वाणिज्यिक जहाज़ों पर किए गए हमलों से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है और मौजूदा हिंसा का दायरा फैल सकता है. इससे यमन के क्षेत्रीय युद्ध में और गहराई से खिंचने का ख़तरा है.”

उन्होंने चेतावनी दी कि “यमन में हिंसा बढ़ने से शान्ति की सम्भावनाएँ कमज़ोर होंगी और पूरे क्षेत्र व उससे बाहर गम्भीर आर्थिक, मानवीय और पर्यावरणीय परिणाम होंगे.”

महासचिव ने तनाव तुरन्त कम करने की अपील की. उन्होंने राजधानी और देश के पश्चिमी हिस्से के बड़े भाग पर नियंत्रण रखने वाले हूतियों से आगे कोई हमला या तनाव बढ़ाने वाली कार्रवाई न करने का आग्रह किया.

उन्होंने वाणिज्यिक जहाज़ों पर हमलों और लाल सागर में जहाज़ों की स्वतंत्र आवाजाही से सम्बन्धित सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का पालन करने की भी अपील की.

फँसे नाविकों पर चिन्ता

फ़रवरी के अन्त में ईरान पर अमेरिका और इसराइल की संयुक्त बमबारी और खाड़ी क्षेत्र में ईरान के जवाबी हमलों के बाद मध्य पूर्व में युद्ध शुरू हुआ था. तभी से संयुक्त राष्ट्र शान्ति बहाल करने के प्रयास कर रहा है.

अप्रैल में घोषित युद्धविराम को बाद में आगे बढ़ाया गया, लेकिन होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जुड़े उल्लंघनों के कारण वह इस महीने टूट गया. यह संकरा समुद्री मार्ग दुनिया के लगभग एक चौथाई समुद्री व्यापार, विशेष रूप से तेल और गैस की आपूर्ति के लिए अहम है.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ में फँसे हज़ारों नाविकों की मदद के लिए तत्काल कार्रवाई की अपील की है.

अन्तरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के अनुसार, लगभग 400 जहाज़ों पर सवार कम से कम छह हज़ार चालक दल सदस्य अब भी वहाँ फँसे हैं. युद्धविराम के दौरान भी उन्हें सुरक्षित नहीं निकाला जा सका.

उच्चायुक्त की प्रवक्ता शाबिया मंटू ने कहा, “यह पूरी संख्या नहीं है. कई अन्य लोगों के बारे में कोई जानकारी नहीं है. माना जा रहा है कि वे फ़ारस की खाड़ी में छोटे जहाज़ों पर फँसे हैं या अब तक उनका पता नहीं चल पाया है.”

लावारिस छोड़े गए जहाज़

प्रवक्ता ने बताया कि मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) को ऐसी जानकारी भी मिली है कि कुछ जहाज़ मालिकों ने नाविकों को समुद्र में बेसहारा छोड़ दिया है. उन्हें न तो सहायता मिली, न स्वदेश लौटने की व्यवस्था की गई और न ही उनका बक़ाया वेतन दिया गया.

OHCHR के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से कम से कम नौ जहाज़ों पर सवार 93 चालक दल सदस्यों को इस तरह छोड़ दिया गया है.

शाबिया मंटू ने कहा, “इन नाविकों को जहाज़ों पर अपने हाल पर छोड़ दिया गया है. उनके पास भोजन, पानी, ईंधन, चिकित्सा देखभाल, बिजली या अपने परिवारों से सम्पर्क करने का कोई साधन नहीं है.”

समुद्र में बढ़ता ख़तरा

युद्धग्रस्त क्षेत्र में जहाज़ों पर लम्बे समय से फँसे ये नाविक अलग-थलग पड़े हैं. उन्हें अपनी सुरक्षा या जहाज़ों से उतरने के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है, जिससे उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गम्भीर असर पड़ रहा है.

होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जानलेवा हमले जारी हैं. शाबिया मंटू ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से 17 नाविकों की मौत हो चुकी है.

उन्होंने कहा, “नागरिक जहाज़ों पर हमले अस्वीकार्य हैं और इन्हें तुरन्त रोका जाना चाहिए. अन्तरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून के तहत उन्हें संरक्षण प्राप्त है.”

मानवाधिकार उच्चायुक्त ने देशों, जहाज़ मालिकों और सभी सम्बन्धित पक्षों से फँसे नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की. उन्होंने नाविकों को दूतावास की सहायता, ज़रूरी सामान और सेवाएँ उपलब्ध कराने तथा उन्हें सुरक्षित निकालकर स्वदेश भेजने का आग्रह किया.

उन्होंने युद्धरत पक्षों से नाविकों को सुरक्षित रास्ता देने, जहाज़ों से उतरने में मदद करने और उन तक ज़रूरी सामान पहुँचाने की भी अपील की.

Source : UN News

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