लेबनान: युद्ध और व्यापक विनाश के बीच वित्तीय सहायता अपील

लेबनान में संयुक्त राष्ट्र की मानवीय एजेंसियों ने, संकट से प्रभावित 14 लाख लोगों तक मदद पहुँचाने के उद्देश्य से, 33 करोड़ 15 लाख डॉलर की अतिरिक्त सहायता राशि की अपील की है. इसराइली सेना और हिज़बुल्लाह लड़ाकों के बीच घातक हिंसा भड़कने के 3 महीने बाद भी देश में मानवीय ज़रूरतें लगातार बढ़ रही हैं.

लेबनान में संयुक्त राष्ट्र के मानवीय समन्वयक इमरान रज़ा ने कहा है कि युद्ध के हर गुज़रते दिन के साथ मानवीय ज़रूरतें तेज़ी से बढ़ रही हैं और राहत कार्य अभी बहुत लम्बे समय तक जारी रहने वाले हैं.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि प्रभावित लोगों तक सहायता पहुँचाने के लिए तत्काल वित्तीय सहायता की आवश्यकता है.

उन्होंने बताया कि बुधवार को युद्धविराम की घोषणा के बावजूद हिंसा की घटनाएँ जारी रहने की ख़बरें मिल रही हैं.

व्यापक तबाही

इमरान रज़ा ने हवाई हमलों, ड्रोन हमलों और गोलाबारी से हुई व्यापक तबाही पर गहरा आघात और चिन्ता व्यक्त की.

उन्होंने बताया कि हवाई हमलों में अस्पतालों और स्वास्थ्य केन्द्रों को निशाना बनाया गया है, सरकारी इमारतें नष्ट हो गई हैं, कृषि भूमि झुलस गई है, जल आपूर्ति केन्द्र ध्वस्त कर दिए गए हैं और अनेक स्कूल विस्थापित लोगों के आश्रय स्थलों में बदल गए हैं.

हिंसा में हालिया वृद्धि के बाद से अब तक 3 हज़ार 500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 10 हज़ार से ज़्यादा लोग घायल हुए हैं.

वहीं, लगभग 10 लाख लोग अब भी अपने घरों से विस्थापित हैं और अस्थाई आश्रयों में रहने को मजबूर हैं.

बढ़ती मुश्किलें

इमरान रज़ा ने कहा कि स्वास्थ्यकर्मी और आपात राहतकर्मी अभूतपूर्व स्तर पर मौत और चोटों का सामना कर रहे हैं, जबकि पूरे के पूरे मोहल्ले मलबे में तब्दील हो गए हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि बार-बार विस्थापन झेल रहे परिवार गहरे और दीर्घकालिक मानसिक आघात से गुज़र रहे हैं. पर्याप्त आश्रय की कमी और अपने घरों में लौट पाने की अनिश्चितता ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं.

यूएन अधिकारी के अनुसार, इन परिस्थितियों में जीवनरक्षक सहायता पहुँचाना बेहद जटिल हो गया है और सबसे अधिक प्रभावित एवं संवेदनशील लोगों की मदद के लिए तत्काल बड़े पैमाने पर समर्थन बढ़ाने की आवश्यकता है.

इमरान रज़ा ने कहा कि लगातार नए विस्थापन आदेश जारी किए जा रहे हैं, जिसके कारण लोगों को बार-बार अपने ठिकाने बदलने पड़ रहे हैं.

उन्होंने बताया कि शुक्रवार सुबह भी कई नए आदेश जारी किए गए, जिससे यह पता लगाना बेहद कठिन हो गया है कि किसी भी समय लोग वास्तव में कहाँ मौजूद हैं.

महिलाएँ और लड़कियाँ अधिक प्रभावित

इस बीच, यूएन मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) ने अपनी अपील के साथ जारी नई रिपोर्ट में चेतावनी दी कि युद्ध से प्रभावित लोगों की परिस्थितियों से निपटने की क्षमता तेज़ी से समाप्त हो रही है, जबकि स्वास्थ्य, पानी, आश्रय और अन्य बुनियादी सेवाओं पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है.

यूएन अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि दुनिया के अन्य युद्धरत क्षेत्रों की तरह लेबनान में भी बड़े पैमाने पर हुए विस्थापन ने महिलाओं और लड़कियों के लिए जोखिम बढ़ा दिए हैं.

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) के उप कार्यकारी निदेशक एंड्रयू साबर्टन ने कहा कि भीड़भाड़ वाले आश्रय स्थलों में निजता, पर्याप्त स्वच्छता सुविधाओं और बुनियादी सुरक्षा उपायों का अभाव है.

उन्होंने बताया कि लेबनान में 6 लाख से अधिक महिलाओं और लड़कियों के लैंगिक हिंसा के ख़तरे में होने का अनुमान है.

उन्होंने यह भी कहा कि देशभर में हर महीने लगभग 1 हज़ार 800 महिलाओं के बच्चे पैदा होने की उम्मीद है, लेकिन स्वास्थ्य सुविधाओं पर हमले जारी रहने के कारण कई अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों को बन्द करना पड़ा है.

इसके कारण महिलाओं के लिए प्रसूति और मातृ स्वास्थ्य से जुड़ी आवश्यक सेवाओं तक पहुँच बनाना लगातार कठिन होता जा रहा है.

दीर्घकालिक विस्थापन संकट

इमरान रज़ा ने दक्षिणी लेबनान में उभरते दीर्घकालिक विस्थापन संकट पर चिन्ता जताते हुए कहा कि इसराइल द्वारा घोषित सैन्य रेखा के पार अब भी लगभग 28 हज़ार लोग मौजूद हैं.

उन्होंने याद दिलाया कि 2024 में इसराइल और हिज़बुल्लाह के बीच युद्ध समाप्त होने के बाद भी लगभग 68 हज़ार लोग अपने गाँवों में वापस नहीं लौट सके थे, क्योंकि या तो वहाँ लौटना सुरक्षित नहीं था या उनके गाँव पूरी तरह नष्ट हो चुके थे.

इमरान रज़ा के अनुसार, मौजूदा संकट में यह संख्या कहीं अधिक बड़ी होने की आशंका है. 

उनका अनुमान है कि कम से कम दो लाख लोग, लम्बे समय तक विस्थापित रह सकते हैं, जबकि वास्तविक संख्या इससे भी अधिक हो सकती है.

शुक्रवार को जारी आपात सहायता अपील के साथ लेबनान के लिए संयुक्त राष्ट्र और उसके साझीदार संगठनों ने अगस्त तक के लिए जितनी मानवीय सहायता राशि की अपील की है, वह बढ़कर 63 करोड़ 99 लाख डॉलर हो गई है.

Source : UN News

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