गाज़ा: अंतरराष्ट्रीय मीडिया अधिकार संगठन रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) ने इज़रायली हिरासत से रिहा हुए गाज़ा के पाँच फ़िलिस्तीनी पत्रकारों की गवाहियों पर आधारित एक रिपोर्ट जारी की है। संगठन का कहना है कि इन पत्रकारों के बयान हिरासत के दौरान हुए कथित शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न, कठोर पूछताछ और उनकी पत्रकारिता गतिविधियों को निशाना बनाए जाने की तस्वीर पेश करते हैं।
रिपोर्ट में शामिल पत्रकारों ने बताया कि गिरफ़्तारी के बाद उन्हें ऐसे पूछताछ सत्रों का सामना करना पड़ा, जिनका मुख्य फोकस उनकी रिपोर्टिंग, मीडिया गतिविधियों और पेशेवर संपर्कों पर था। RSF के अनुसार, ये गवाहियां इस आशंका को मजबूत करती हैं कि फ़िलिस्तीनी पत्रकारों को उनके पेशेवर कार्य के कारण सीधे तौर पर निशाना बनाया गया।
रिपोर्ट में शामिल पत्रकारों में अला अल-सर्राज, दिया अल-कहलौत, शादी अबू सिदो और इमाद अल-इफ्रांजी शामिल हैं। सभी ने हिरासत के दौरान कठोर व्यवहार, बार-बार पूछताछ और गंभीर शारीरिक एवं मनोवैज्ञानिक प्रभावों का सामना करने की बात कही है।
शादी अबू सिदो ने बताया कि उन्हें 18 मार्च 2024 को अल-शिफा मेडिकल कॉम्प्लेक्स के भीतर रिपोर्टिंग के दौरान गिरफ़्तार किया गया था। उनके अनुसार, उन्होंने कुल 572 दिन हिरासत में बिताए और इस दौरान उन्हें स्दे तैमैन, ओफर और केत्ज़ियोट समेत विभिन्न हिरासत केंद्रों में रखा गया। रिहाई के बाद वे कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं, जिनमें एक आंख की दृष्टि खोना, स्केबीज़, दौरे पड़ना, अनिद्रा और भूख में कमी शामिल है।
RSF की रिपोर्ट के मुताबिक, हिरासत से रिहा हुए पाँचों पत्रकार अब तक अपने पेशेवर काम पर वापस नहीं लौट पाए हैं। संगठन का कहना है कि इसकी वजह हिरासत के दौरान पड़े गहरे शारीरिक और मानसिक प्रभाव हैं।
अला अल-सर्राज, जिन्होंने इज़रायली जेलों में 692 दिन बिताए, ने बताया कि इस दौरान उन्होंने अपना घर, वाहन, मीडिया उपकरण और अपने मीडिया संस्थान का पूरा अभिलेख खो दिया।
पत्रकारों का कहना है कि गिरफ़्तारी के समय उन्होंने स्वयं को स्पष्ट रूप से प्रेसकर्मी के रूप में पहचान कराया था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें हिरासत में लेकर इज़रायल के विभिन्न निरोध केंद्रों में भेज दिया गया।
पत्रकारिता और मीडिया कवरेज पर केंद्रित रही पूछताछ
रिपोर्ट में दर्ज गवाहियों के अनुसार, पूछताछ के दौरान पत्रकारों से मुख्य रूप से उनकी रिपोर्टिंग गतिविधियों, फील्ड कवरेज और मीडिया जगत में उनके संपर्कों के बारे में सवाल किए गए।
शादी अबू सिदो ने बताया कि एक इज़रायली सैन्य खुफिया अधिकारी ने उनसे उत्तरी ग़ज़ा की मीडिया कवरेज और 7 अक्टूबर की घटनाओं को कवर करने वाले पत्रकारों के संबंध में सवाल पूछे। वहीं, अला अल-सर्राज ने कहा कि उनसे उनकी पेशेवर गतिविधियों और ग़ज़ा के भीतर मौजूद संबंधों को लेकर विस्तृत पूछताछ की गई।
रिपोर्ट के अनुसार, इमाद अल-इफ्रांजी और दिया अल-कहलौत को भी इज़रायली सुरक्षा एजेंसियों द्वारा कई दौर की पूछताछ का सामना करना पड़ा।
‘अनलॉफुल कॉम्बैटेंट’ कानून के तहत बढ़ाई गई हिरास त
RSF ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इज़रायली अधिकारियों ने इन पत्रकारों को “अनलॉफुल कॉम्बैटेंट” कानून के तहत हिरासत में रखा। संगठन के अनुसार, इस कानून के तहत संक्षिप्त अदालती सुनवाई के माध्यम से उनकी हिरासत को बार-बार बढ़ाया गया, जबकि इन सुनवाइयों में वकीलों की मौजूदगी नहीं थी।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पत्रकारों ने अदालतों के समक्ष स्वयं को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत संरक्षित पत्रकार बताया, इसके बावजूद उनकी हिरासत को अनिश्चित अवधि तक बढ़ाने के आदेश जारी किए जाते रहे।
RSF ने एक बार फिर इज़रायली अधिकारियों से हिरासत में बंद सभी फ़िलिस्तीनी पत्रकारों की तत्काल रिहाई की मांग की है। संगठन के अनुसार, वर्तमान में 19 फ़िलिस्तीनी पत्रकार इज़रायली जेलों में बंद हैं, जिनमें 7 अक्टूबर 2023 के बाद ग़ज़ा से हिरासत में लिए गए दो पत्रकार भी शामिल हैं।
