ऑटो-रिक्शा चालक की बेटी अदीबा अनम बनीं महाराष्ट्र की पहली मुस्लिम महिला IAS अधिकारी

कहते हैं कि बड़े सपने देखने वालों के लिए हालात कभी दीवार नहीं बनते, बल्कि मंजिल तक पहुंचने का रास्ता बन जाते हैं। महाराष्ट्र के यवतमाल जिले की रहने वाली अदीबा अनम अशफाक अहमद शेख की कहानी इसी बात का जीवंत उदाहरण है। एक साधारण ऑटो-रिक्शा चालक की बेटी ने कठिन परिस्थितियों, सामाजिक दबावों और कई असफलताओं को पीछे छोड़ते हुए UPSC 2024 में सफलता हासिल की और महाराष्ट्र की पहली मुस्लिम महिला IAS अधिकारी बनकर इतिहास रच दिया।

अदीबा का जन्म एक सामान्य परिवार में हुआ। उनके पिता अशफाक अहमद शेख ऑटो-रिक्शा चलाकर परिवार का गुजारा करते हैं। आर्थिक चुनौतियों से जूझते परिवार में अदीबा की मां और दो छोटे भाई भी हैं। यवतमाल जिला अक्सर किसानों की आत्महत्या और आर्थिक संकटों के कारण चर्चा में रहता है, लेकिन इसी जिले की बेटी ने अपनी मेहनत से पूरे राज्य को गर्व करने का मौका दिया।

बचपन से ही अदीबा पढ़ाई में बेहद होनहार थीं। गणित उनका पसंदीदा विषय था और उन्होंने 10वीं व 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में शानदार सफलता हासिल की। आगे की पढ़ाई के लिए वह पुणे पहुंचीं और आजम कैंपस से गणित विषय में बी.एससी. की डिग्री प्राप्त की। इसी दौरान उनके मन में सिविल सेवा में जाने का सपना आकार लेने लगा।

अदीबा मानती थीं कि यदि समाज में सकारात्मक बदलाव लाना है और लोगों की समस्याओं को करीब से समझकर उनका समाधान करना है, तो सिविल सेवा से बेहतर माध्यम कोई नहीं हो सकता। इसी सोच के साथ उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू की।

हालांकि यह सफर आसान नहीं था। एक छोटे शहर से बड़े शहर पुणे आकर अकेले रहना, पढ़ाई के साथ जीवन की तमाम जिम्मेदारियों को संभालना और आर्थिक सीमाओं के बीच अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रखना बड़ी चुनौती थी। लेकिन इन चुनौतियों के बीच उनका परिवार हमेशा उनकी सबसे बड़ी ताकत बना रहा।

अदीबा के पिता ने कभी बेटे और बेटी में फर्क नहीं किया। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी बेटी की शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। अदीबा बताती हैं कि आर्थिक तंगी के बावजूद उनके माता-पिता ने कभी उन्हें पढ़ाई छोड़ने या नौकरी करने के लिए नहीं कहा। जब आसपास के कई युवा पढ़ाई छोड़कर काम करने लगे, तब भी उनके माता-पिता ने उन्हें केवल अपने लक्ष्य पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया।

सफलता तक पहुंचने का रास्ता असफलताओं से होकर गुजरा। अदीबा ने UPSC परीक्षा चौथे प्रयास में पास की। हर असफलता के बाद उन्होंने हार मानने के बजाय नई ऊर्जा के साथ तैयारी शुरू की। उन्होंने हज हाउस IAS ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट और दिल्ली की जामिया रेजिडेंशियल कोचिंग अकादमी (RCA) से भी मार्गदर्शन प्राप्त किया।

कड़ी मेहनत, अनुशासन और निरंतरता उनकी सफलता की सबसे बड़ी कुंजी बने। अदीबा रोजाना 8 से 10 घंटे पढ़ाई करती थीं। अखबार पढ़ना, अपने नोट्स तैयार करना और नियमित अध्ययन उनकी दिनचर्या का हिस्सा था।

उनकी मेहनत तब रंग लाई जब UPSC 2024 के परिणाम घोषित हुए और उन्होंने अखिल भारतीय स्तर पर 142वीं रैंक हासिल की। इस उपलब्धि के साथ वह महाराष्ट्र की पहली मुस्लिम महिला IAS अधिकारी बन गईं।

बेटी की सफलता पर गर्व से भावुक हुए उनके पिता अशफाक अहमद शेख ने कहा, “लोग बेटों पर नाज करते हैं, मेरा नाम बेटी से रोशन है।” यह सिर्फ एक पिता की खुशी नहीं थी, बल्कि उस विश्वास की जीत थी जिसने हर मुश्किल के सामने शिक्षा और सपनों को चुना।

आज अदीबा अनम की कहानी उन हजारों लड़कियों के लिए प्रेरणा है जो छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों से बड़े सपने देखती हैं। उनका संदेश साफ है—परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, शिक्षा का साथ कभी मत छोड़िए, अपने लक्ष्य पर ध्यान रखिए, मेहनत कीजिए और खुद पर भरोसा बनाए रखिए। सफलता देर से मिलेगी, लेकिन जरूर मिलेगी।

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