होर्मुज़ जलक्षेत्र में तेल टैंकर पर हमला, 3 नाविकों की मौत, बिगड़ते हालात पर चिन्ता

समुद्री व्यापार के लिए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्गों में से एक, होर्मुज़ जलडमरूमध्य के निकट एक तेल टैंकर पर हुए हमले में 3 नाविकों की मौत हो गई है. इस क्षेत्र में फिर से बढ़ रहे तनाव ने वैश्विक खाद्य सुरक्षा, ईंधन की क़ीमतों और अन्तरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर होने वाले प्रभाव के प्रति चिन्ताएँ बढ़ा दी हैं.

यह नया हमला ओमान के तट के निकट पलाउ ध्वज वाले तेल टैंकर, MT Settebello पर हुआ. भारत के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि इस घटना में मारे जाने वाले तीनों नाविक, भारतीय नागरिक हैं.

संयुक्त राज्य अमेरिका ने कहा है कि यह कार्रवाई उसकी घेराबन्दी लागू करने सम्बन्धी सैन्य गतिविधियों के तहत की गई है.

युद्ध पर विराम देने के लिए जारी वार्ताओं में गतिरोध के बीच, अमेरिका और ईरान के बीच हमलों व जवाबी हमलों का सिलसिला तेज़ होने की आशंका जताई जा रही है. 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर ईरान के विरुद्ध “बहुत कड़ी कार्रवाई” करने और उसके तेल एवं गैस बाज़ारों पर “पूर्ण नियंत्रण” स्थापित करने की बात कही है.

इस बीच, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने क्षेत्र में लगातार बढ़ते तनाव पर गहरी चिन्ता व्यक्त की है. उनके प्रवक्ता ने गुरुवार को जारी एक वक्तव्य में कहा कि महासचिव मौजूदा हालात को लेकर बेहद चिन्तित हैं.

उन्होंने सभी पक्षों से युद्धविराम का पूर्ण रूप से पालन करने और तनाव कम करने का आग्रह किया है.

हालात बिगड़ने की चेतावनी

यूएन प्रमुख ने चेतावनी दी है कि हालात यदि और बिगड़े तो युद्ध पूरी तरह फिर से भड़क सकता है, जिसके क्षेत्र और विश्व पर अप्रत्याशित परिणाम हो सकते हैं, विशेष रूप से उन देशों पर जो पहले से ही सबसे अधिक संवेदनशील स्थिति का सामना कर रहे हैं.

समुद्री मामलों के लिए संयुक्त राष्ट्र एजेंसी (IMO) के अनुसार, 28 फ़रवरी को शुरू हुए इस संकट के बाद से हमलों में मारे गए नाविकों की संख्या 14 हो गई है. 

इस अवधि के दौरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य और उसके आसपास अन्तरराष्ट्रीय नौवहन को निशाना बनाकर किए गए 46 हमलों की पुष्टि की गई है.

अन्तरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के महासचिव आर्सेनियो डोमिन्ग्वेज़ ने इस हमले की कड़ी निन्दा करते हुए इसे “पूरी तरह अस्वीकार्य” क़रार दिया है.

उन्होंने कहा कि किसी भी पक्ष द्वारा ऐसा कोई भी कृत्य, जो समुद्री नाविकों के जीवन और अन्तरराष्ट्रीय नौवहन की सुरक्षा को ख़तरे में डालता है, निन्दनीय है और इसकी कड़ी भर्त्सना की जानी चाहिए.

बढ़ता ख़तरा

IMO ने चेतावनी दी है कि जनहानि के अलावा हज़ारों समुद्री नाविक भी बढ़ते ख़तरों का सामना कर रहे हैं. एक अनुमान के अनुसार, व्यापक खाड़ी क्षेत्र में लगभग 20 हज़ार समुद्री कर्मचारी व्यावसायिक और अपतटीय (offshore) जहाज़ों पर तैनात हैं. 

इनमें से अनेक लगातार सुरक्षा जोखिमों और गम्भीर मानसिक दबाव के बीच काम कर रहे हैं, जबकि कुछ जहाज़ी दल अब भी युद्ध में शामिल पक्षों की हिरासत में हैं.

IMO ने आगाह किया है कि क्षेत्र में जारी अस्थिरता से, समुद्री कर्मियों की सुरक्षा और वैश्विक समुद्री व्यापार, दोनों के लिए गम्भीर चुनौती बनी हुई है.

खाद्य सुरक्षा पर जोखिम

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने चेतावनी दी है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव केवल तेल बाज़ारों तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए भी गम्भीर जोखिम उत्पन्न कर रहा है.

दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, उर्वरक और सल्फ़र इसी समुद्री मार्ग से होकर गुज़रता है, जो खाद्य उत्पादन के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं.

FAO के अनुसार, संकट का सबसे बड़ा ख़तरा तत्काल खाद्य सामग्री में कमी नहीं, बल्कि उर्वरकों की आपूर्ति और कृषि उत्पादन पर पड़ने वाला दीर्घकालिक असर है. इसके संकेत अब दिखाई देने लगे हैं.

अफ़्रीका, एशिया और लातिन अमेरिका के किसान बढ़ती लागत का सामना कर रहे हैं, जिससे आने वाले महीनों में फ़सल उत्पादन घटने और खाद्य क़ीमतों में वृद्धि की आशंका है. FAO ने देशों से कृषि व्यापार खुला रखने, उर्वरक निर्यात पर प्रतिबन्धों से बचने और वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों को सुरक्षित करने का आग्रह किया है.

आसमान छूती ईंधन की क़ीमतें

संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के अनुसार, मई के अन्त में जारी एक बुलेटिन में कहा गया है कि संकट ने मध्य पूर्व और आसपास के क्षेत्रों में परिवहन मार्गों, बंदरगाहों, हवाई क्षेत्र, सीमा चौकियों और ईंधन आपूर्ति श्रृंखलाओं को गम्भीर रूप से बाधित किया है.

इसका असर अफ़ग़ानिस्तान, लेबनान, फ़लस्तीन, सीरिया, यमन और ईरान जैसे देशों में विशेष रूप से देखा जा रहा है, जबकि पूर्वी अफ़्रीका में मानवीय सहायता अभियानों पर भी इसका प्रभाव पड़ रहा है.

कई देशों में ईंधन की क़ीमतें तेज़ी से बढ़ी हैं, लेबनान में डीज़ल 62 प्रतिशत से अधिक और यमन में 44 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि पाकिस्तान में पैट्रोल की क़ीमतें 60 प्रतिशत से अधिक बढ़ी हैं.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने एक बार फिर सभी पक्षों से युद्धविराम लागू करने और तनाव कम करने का आग्रह करते हुए, संवाद और वार्ता पर बल दिया है.

Source : UN News

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