फिलिस्तीन के समर्थन में भारत का बड़ा कदम, विकास परियोजनाओं के लिए देगा 25 लाख डॉलर

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में भारत ने फिलिस्तीन के प्रति अपने समर्थन को एक बार फिर मजबूती से दोहराया है। भारत ने घोषणा की है कि वह जल्द ही फिलिस्तीनी शरणार्थियों की सहायता और विकास कार्यों के लिए 25 लाख अमेरिकी डॉलर की राशि जारी करेगा। यह भारत द्वारा हर साल दिए जाने वाले 50 लाख अमेरिकी डॉलर के योगदान की पहली किश्त होगी।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने बताया कि यह राशि संयुक्त राष्ट्र राहत एवं निर्माण एजेंसी (यूएनआरडब्ल्यूए) को सौंपी जाएगी। यह एजेंसी फिलिस्तीनी शरणार्थियों की मदद और उनके पुनर्वास के लिए कार्य करती है।

बैठक के दौरान भारत ने गाजा में जारी गंभीर मानवीय संकट पर गहरी चिंता व्यक्त की। भारत ने क्षेत्र में तत्काल और स्थायी युद्धविराम की मांग करते हुए कहा कि शांति और स्थिरता स्थापित करने का सबसे प्रभावी रास्ता ‘द्वि-राष्ट्र समाधान’ है।

राजदूत पर्वतनेनी ने स्पष्ट किया कि भारत एक ऐसे संप्रभु, स्वतंत्र और व्यवहारिक फिलिस्तीन राष्ट्र का समर्थन करता है, जो सुरक्षित और मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर इजरायल के साथ शांति से रह सके। भारत लंबे समय से इसी नीति का समर्थन करता रहा है।

फिलिस्तीन के साथ अपनी दीर्घकालिक विकास साझेदारी का उल्लेख करते हुए भारत ने कहा कि कुछ ही दिनों में यूएनआरडब्ल्यूए को 25 लाख अमेरिकी डॉलर की यह पहली किश्त सौंप दी जाएगी। यह राशि फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए भारत के वार्षिक 50 लाख अमेरिकी डॉलर के योगदान का हिस्सा है।

बैठक में भारत ने लेबनान के मुद्दे पर भी अपना पक्ष रखा। भारत ने लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का सम्मान करने की अपील करते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1701 और नवंबर 2024 में जारी शत्रुता समाप्ति की घोषणा को लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

राजदूत पर्वतनेनी ने लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (यूएनआईएफआईएल) के तहत तैनात भारतीय सैनिकों की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने की मांग भी की।

भारत के इस कदम से साफ है कि वह न केवल फिलिस्तीनी शरणार्थियों की मदद के लिए प्रतिबद्ध है, बल्कि पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और संवाद को बढ़ावा देने के अपने प्रयास भी लगातार जारी रखे हुए है।

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