अन्तरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने बताया है कि मध्य पूर्व संकट की वजह से होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में फँसे 11 हज़ार से अधिक नाविकों को इस जलक्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकालने की कार्रवाई की जा रही है. इस बीच, आपात स्थिति से जूझ रहे एक समुद्री नाविक ने बताया है कि उन्हें किस तरह से निरन्तर हमले के जोखिम का सामना करना पड़ता है.
समुद्री नाविकों को इस जलक्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकालने की योजना, मध्य पूर्व में भड़के टकराव पर विराम लगाने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच जारी वार्ता से जुड़ी है.
इस सिलसिले में पिछले सप्ताह ही दोनों देशों ने एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए थे जिसके आधार पर बातचीत को आगे बढ़ाया जा रहा है.
दोनों देशों के बीच वार्ता यदि सफल हुई, तो होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले जहाज़ों की आवाजाही, 28 फ़रवरी को भड़के युद्ध से पहले के स्तर पर वापिस पहुँचने की उम्मीद है. उस समय हर दिन यहाँ से लगभग 130 जहाज़ गुज़रते थे.
मगर, लड़ाई के दौरान उनकी रफ़्तार लगभग पूरी तरह से ठप हो गई. हालात में अपेक्षाकृत सुधार है लेकिन अब भी पिछले तीन दिनों के दौरान 20-30 जहाज़ ही गुज़र रहे हैं.
यूएन एजेंसी ने कहा कि सुरक्षित बाहर निकालने की योजना को अब लागू करना शुरू दिया गया है और यह संख्या बढ़ने की आशा है.
नए जलमार्गों का सहारा
IOM ने यूएन न्यूज़ को बताया कि योजना को लागू करने के लिए जहाज़ों पर नाविक दल से सम्पर्क साधना शुरू कर दिया गया है, और इस अभियान में 500 से 600 वाणिज्यिक जहाज़ों के शामिल होने की सम्भावना है, ताकि इस जलक्षेत्र से वे बाहर निकल सकें.
इस क्रम में, यूएन एजेंसी ने सुरक्षा के लिए आवश्यक गारंटी हासिल कर ली है और मौजूदा परिस्थितियों को भी सत्यापित किया गया है.
जहाज़ों की आवाजाही में भीषण गिरावट आने का असर पूरी दुनिया में महसूस किया गया था. तेल, गैस, उर्वरक समेत अन्य अहम सामग्री की आपूर्ति में विशाल व्यवधान आया था, जिसके प्रभाव लम्बे समय तक जारी रह सकते हैं, विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए.
IMO द्वारा कम्पनियों और जहाज़ के कप्तानों को भेजे गए सन्देश में, दो अस्थाई नए समुद्री मार्ग चिन्हित किए गए हैं, जिन्हें होर्मुज़ जलमार्ग से बाहर निकलने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा.
ये नए मार्ग, उस रास्ते से अलग हैं, जिन्हें अतीत में जहाज़, आमतौर पर इस्तेमाल करते रहे हैं. उत्तरी मार्ग, ईरानी तट रेखा के नज़दीक है जबकि दक्षिणी मार्ग, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात के जलक्षेत्र के ज़रिए गुज़रता है.
यूएन समुद्री संगठन ने बताया है कि ईरान और ओमान, इन दोनों देशों पर अपने जलक्षेत्र में जहाज़ों के सुरक्षित नौवहन को सुनिश्चित करने का दायित्व है.
होर्मुज़ जलडमरूमध्य के समुद्री मार्गों में बारूदी सुरंगों के जोखिम और नौवहन की कठिन परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रयास अहम हैं, और इसलिए सुरक्षा, बचाव और अन्य कारणों से जहाज़ों को किसी भी रुकने के लिए कहा जा सकता है.
विकट परिस्थितियाँ
फ़िलिपींस की एक समुद्री नाविक क्लेरिसे बंग्गा को इस महीने के शुरू में होर्मुज़ से सुरक्षित बाहर लाया गया था. उन्होंने युद्ध से प्रभावित एक क्षेत्र में पसरी अनिश्चितता में फँसे होने के बीच अपनी व्यथा को बयाँ किया और बताया कि नाविक दल को किस तरह से मानसिक व भावनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.
तृतीय अधिकारी क्लेरिसे बंग्गा ने बताया कि होर्मुज़ में टकरावपूर्ण परिस्थितियों में फँसे जहाज़ पर सवार होना, हर दिन मानसिक दबाव से जूझना एक बहुत ही कठिन अनुभव है. कार्यस्थल की वजह से होने वाले दबाव के अलावा भी इस समय जारी घटनाक्रम भी तनाव की एक वजह है.

हर दिन मिसाइल, ड्रोन हमले होते हैं, ऐलर्ट, मोबाइल चेतावनी जारी होते हैं और आपको असल में पता ही नहीं होता है कि हो क्या रहा है.
“आपको यह मालूम ही नहीं है कि युद्ध का अन्त कब होगा. आपको यह भी मालूम नहीं है कि आपका जहाज़ सुरक्षित ढंग से जलडमरूमध्य को कब पार कर पाएगा. इसलिए यह सब बहुत कठिन है.”
क्लेरिसे बंग्गा ने कहा कि जोखिम भरे जलक्षेत्रों से गुज़रने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण व सुरक्षा प्रोटोकॉल मुहैया कराए जाते हैं और यह तैयारियों का अहम हिस्सा हैं. “अगर आपात स्थिति के दौरान आपको अपने दायित्व व ज़िम्मेदारी की जानकारी है, तो मेरा मानना है कि सब कुछ ठीक ढंग से हो जाएगा.”
उन्होंने कहा कि होर्मुज़ में फँसे जहाज़ों व नाविकों को आश्वासन देना ही उनकी सबसे बड़ी मदद है. उनकी सहायता करने का अर्थ है कि उनकी आर्थिक चिन्ताओं पर परिचालन सम्बन्धी दबावों को कम किया जाए.
Source : UN News
