ढाका में एक ही दिन हुईं भारत-बांग्लादेश की दो अहम बैठकें, तारिक रहमान ने भारतीय उच्चायुक्त के सामने उठाया हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा
भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में पिछले कुछ दिनों से जारी तनाव के बीच ढाका में सोमवार को उच्चस्तरीय कूटनीतिक और सुरक्षा गतिविधियां तेज नजर आईं। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने भारत के नए उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी से मुलाकात की। इस दौरान ढाका ने एक बार फिर पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग उठाई। दूसरी ओर, भारत की खुफिया एजेंसी RAW के प्रमुख पराग जैन भी बांग्लादेश में मौजूद रहे और उन्होंने वहां के वरिष्ठ सुरक्षा एवं खुफिया अधिकारियों के साथ बातचीत की।
हसीना के प्रत्यर्पण पर बांग्लादेश का दबाव
दिनेश त्रिवेदी की प्रधानमंत्री तारिक रहमान के साथ यह पहली आधिकारिक मुलाकात थी। बैठक में बांग्लादेश ने उम्मीद जताई कि भारत शेख हसीना के प्रत्यर्पण से जुड़ी प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा। इसके साथ ही दोनों देशों के संबंधों को बेहतर बनाने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने पर भी चर्चा हुई।
शेख हसीना अगस्त 2024 में बांग्लादेश छोड़ने के बाद भारत में रह रही हैं। हाल ही में उन्होंने नई दिल्ली से मीडिया से बातचीत में साल के अंत तक बांग्लादेश लौटने की इच्छा जताई थी। उनके इस बयान के बाद ढाका और नई दिल्ली के बीच पहले से मौजूद तनाव फिर बढ़ गया।
भारत ने क्या कहा?
प्रत्यर्पण के मुद्दे पर भारत ने फिलहाल कोई अंतिम फैसला सार्वजनिक नहीं किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि बांग्लादेश की ओर से मिली प्रत्यर्पण मांग की उचित प्रक्रियाओं के तहत समीक्षा की जा रही है। भारत और बांग्लादेश के बीच 2013 से प्रत्यर्पण संधि भी लागू है।
भारत की विदेश मंत्रालय की जानकारी के मुताबिक, प्रत्यर्पण अनुरोधों को संबंधित कानूनी और संधि प्रावधानों के आधार पर जांचा जाता है। यानी केवल मांग किए जाने से किसी व्यक्ति का प्रत्यर्पण स्वतः तय नहीं हो जाता।
ढाका में RAW चीफ की मौजूदगी क्यों अहम?
इसी समय RAW प्रमुख पराग जैन के नेतृत्व में भारतीय सुरक्षा अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल ढाका में मौजूद था। रिपोर्टों के मुताबिक, यह दल बांग्लादेश की सैन्य खुफिया एजेंसी DGFI के निमंत्रण पर वहां पहुंचा था और दोनों देशों के सुरक्षा एवं खुफिया सहयोग से जुड़े मुद्दों पर बातचीत हुई। जैन ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान के रक्षा मामलों के सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल (रिटायर्ड) डॉ. एकेएम शम्सुल इस्लाम से भी मुलाकात की।
एक तरफ हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर बांग्लादेश भारत पर दबाव बनाए हुए है, तो दूसरी तरफ सुरक्षा स्तर पर दोनों देशों के अधिकारियों के बीच बातचीत होना इस घटनाक्रम को खास बनाता है। इससे संकेत मिलता है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद दोनों देश सुरक्षा से जुड़े संवाद को पूरी तरह रोकना नहीं चाहते।
रिश्ते सुधारने की भी कोशिश
भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने मुलाकात को सकारात्मक बताते हुए कहा कि भारत और बांग्लादेश केवल सीमा ही नहीं, बल्कि कई साझा हित और आकांक्षाएं भी रखते हैं। उन्होंने दोनों देशों के बेहतर संबंधों को दोनों के लिए फायदे की स्थिति बताया। साथ ही प्रधानमंत्री तारिक रहमान को सितंबर में भारत में होने वाले BRICS आउटरीच कार्यक्रम के लिए दिए गए निमंत्रण का भी उल्लेख किया।
ऐसे में फिलहाल भारत-बांग्लादेश संबंधों में एक तरफ शेख हसीना का प्रत्यर्पण सबसे संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है, तो दूसरी तरफ सुरक्षा और द्विपक्षीय संबंधों को लेकर बातचीत का सिलसिला भी जारी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर भारत के रुख और ढाका की अगली रणनीति पर दोनों देशों की नजर रहेगी।
