फैक्ट चेक: 6 साल पुराने वीडियो को ईरान में इस्लाम छोड़ने और मस्जिदें बंद होने से जोड़कर किया गया भ्रामक दावा

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है। इसके साथ दावा किया जा रहा है कि ईरान में बड़ी संख्या में लोग इस्लाम धर्म छोड़ रहे हैं। पोस्ट में यह भी कहा जा रहा है कि ईरान में 10 टन से अधिक वज़न की हजारों पवित्र कुरान नदी में फेंक दी गईं और 50,000 से अधिक मस्जिदें बंद कर दी गईं।

इसी दावे के साथ नाम के एक यूजर ने लिखा: “अलविदा इस्लाम ईरान में दस टन से अधिक वज़न के हज़ारों कुरान नदी में फेंके गए 50,000 से अधिक मस्जिदें बंद कर दी गई

वहीं, इस पोस्ट को क्वोट करते हुए पंडित Er L K Niranjan यदुवंशी (बड़े भैया) नामक यूजर ने लिखा: “जब ईरान के लोगो ने ईरान के अमन चैन और शांति के लिए आतंक का रास्ता छोड़ दिए और रहे है तो काफिर देश हिंदुस्तान की काफिर सरकार को होश क्यों नहीं आ रहा है कि भारत में आतंक पर वो भी रोक लगाए?

फैक्ट चेक

Times Headline ने वायरल दावे की पड़ताल की। जांच में पता चला कि सोशल मीडिया पर किया जा रहा दावा भ्रामक है। वायरल वीडियो न तो हाल का है और न ही इसका ईरान में कथित इस्लाम विरोधी अभियान, लोगों द्वारा धर्म छोड़ने या हजारों मस्जिदें बंद होने से कोई संबंध है।

सच्चाई जानने के लिए वायरल वीडियो के प्रमुख फ्रेम की रिवर्स इमेज सर्च की गई। इस दौरान 26 अक्टूबर 2020 को प्रकाशित fasiribnews.ir के इंस्टाग्राम पोस्ट का पता चला। इससे स्पष्ट हुआ कि वायरल वीडियो लगभग छह वर्ष पुराना है।

रिपोर्ट के अनुसार, यह वीडियो ईरान के फिरोजाबाद स्थित तंगाब डैम का है। वहां डैम के किनारे कुरान की कुछ पुरानी और क्षतिग्रस्त प्रतियां मिलने के बाद उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थीं। घटना की जानकारी मिलने पर फिरोजाबाद के इस्लामिक प्रोपेगेशन डिपार्टमेंट के प्रमुख रूहोल्लाह बेलौरी ने मौके का निरीक्षण किया।

प्रारंभिक जांच में उन्होंने बताया कि पुरानी और उपयोग के योग्य न बची कुरान की प्रतियों को एक पारंपरिक धार्मिक प्रक्रिया के तहत पानी में प्रवाहित किया गया था। बाद में पानी के बहाव के कारण वे प्रतियां किनारे पर आ गईं। इस्लामी परंपरा में पुरानी या क्षतिग्रस्त कुरान की प्रतियों को सम्मानपूर्वक दफनाने या बहते पानी में प्रवाहित करने की परंपरा भी प्रचलित है।

जांच के दौरान Hamshahri Online और Tabnak Fars की रिपोर्टें भी सामने आईं। Hamshahri Online ने ईरानी समाचार एजेंसी IRNA के हवाले से बताया कि यह घटना कुरान के अपमान से जुड़ी नहीं थी। विभाग प्रमुख ने स्पष्ट कहा कि यदि किसी का उद्देश्य कुरान का अपमान करना होता तो वह इस तरह प्रतियों को पानी में नहीं छोड़ता। उनके अनुसार यह मामला पुरानी धार्मिक पुस्तकों के उचित निस्तारण की जानकारी के अभाव का था।

वहीं Tabnak Fars ने ईरानी ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन (IBC) के हवाले से बताया कि तंगाब डैम के किनारे करीब 50 पुरानी और क्षतिग्रस्त कुरान तथा कुछ पुरानी नमाज़ की किताबें मिली थीं। इसके बाद संबंधित अधिकारियों ने मस्जिदों के प्रबंधकों से अपील की कि भविष्य में ऐसी धार्मिक पुस्तकों को अलग से फेंकने के बजाय एंडोमेंट्स एंड चैरिटी अफेयर्स विभाग को सौंपा जाए।

इसके अलावा, Times Headline ने ईरान के स्वतंत्र पत्रकार हसन ज़ैदी से भी संपर्क किया। उन्होंने पुष्टि की कि वायरल वीडियो वर्ष 2020 की इसी घटना का है और इसका संबंध केवल पुरानी धार्मिक पुस्तकों के अनुचित निस्तारण से है। इसे ईरान में इस्लाम विरोधी अभियान, लोगों के धर्म छोड़ने या मस्जिदें बंद होने के दावे से जोड़ना पूरी तरह गलत है।

निष्कर्ष

Times Headline की फैक्ट चेक जांच में वायरल दावा भ्रामक साबित हुआ। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो वर्ष 2020 का है, जिसमें ईरान के फिरोजाबाद स्थित तंगाब डैम के किनारे लगभग 50 पुरानी और क्षतिग्रस्त कुरान तथा कुछ पुरानी नमाज़ की किताबें मिली थीं। जांच में कहीं भी इस बात की पुष्टि नहीं होती कि हजारों कुरान जानबूझकर नदी में फेंकी गईं, ईरान में 50,000 से अधिक मस्जिदें बंद कर दी गईं या लोग बड़े पैमाने पर इस्लाम धर्म छोड़ रहे हैं। इसलिए वायरल पोस्ट में किया गया दावा भ्रामक और तथ्यों से परे है।

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