यरुशलम: अल-अक्सा मस्जिद को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। इज़रायल की सत्तारूढ़ लिकुड पार्टी के कई मंत्रियों और सांसदों ने न केवल मस्जिद परिसर में यहूदी समूहों की मौजूदगी और प्रार्थना को और बढ़ाने की वकालत की, बल्कि कुछ नेताओं ने मुसलमानों के प्रवेश पर रोक लगाने जैसी मांग भी सामने रखी। इन बयानों ने अल-अक्सा मस्जिद की मौजूदा व्यवस्था (स्टेटस क्वो) को लेकर नई बहस छेड़ दी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़, ये मांगें यरुशलम में आयोजित तथाकथित टेम्पल माउंट एडमिनिस्ट्रेशन के एक सम्मेलन के दौरान रखी गईं।
यह सम्मेलन अल-अक्सा मस्जिद में पिछले दस वर्षों के दौरान हुए कथित “सकारात्मक बदलावों” और उसके कब्जे के 59 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया गया। सम्मेलन की अध्यक्षता रब्बी शिमशोन एल्बोइम ने की, जिसमें ऊर्जा मंत्री एली कोहेन, पर्यावरण संरक्षण मंत्री इदित सिलमान और लिकुड पार्टी के कई नेसेट (इज़रायली संसद) सदस्य शामिल हुए।
इज़रायली अख़बार येदिओत अहरोनोत के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि नेसेट के उपाध्यक्ष निस्सिम वातुरी ने अल-अक्सा मस्जिद को अरबों (मुसलमानों) के लिए बंद करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जब तक यहूदी प्रतिदिन स्वतंत्र रूप से वहां नहीं पहुंच सकते, तब तक किसी और को भी वहां जाने की अनुमति नहीं होनी चाहिए।
सम्मेलन में शामिल नेताओं ने अल-अक्सा मस्जिद में यहूदी समूहों की घुसपैठ और वहां प्रार्थना की गतिविधियों का और विस्तार करने की मांग की। इस दौरान हाल के वर्षों में मस्जिद परिसर के भीतर यहूदियों की स्थिति में हुए बदलावों की भी समीक्षा की गई।
रिपोर्ट के मुताबिक़, ऊर्जा मंत्री एली कोहेन ने दावा किया कि हर साल 60,000 से अधिक यहूदी अल-अक्सा मस्जिद के प्रांगण में इबादत करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह स्वयं एक समूह का नेतृत्व करते हुए मस्जिद परिसर में गए और वहां इबादत की।
पर्यावरण संरक्षण मंत्री इदित सिलमान ने टेम्पल माउंट एडमिनिस्ट्रेशन की गतिविधियों की सराहना की। वहीं, नेसेट सदस्य बोआज़ बिस्मुथ ने कहा, “पूरा इज़रायल आपके पीछे टेम्पल माउंट तक चलेगा।” जबकि नेसेट सदस्य मोशे सआदा ने दावा किया कि इस्लामी त्योहारों के दौरान यहूदियों के प्रवेश पर रोक सुरक्षा एजेंसियों की नहीं, बल्कि कानूनी सलाहकार और उनके सहयोगियों की नीति का परिणाम है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अल-अक्सा मस्जिद, जिसे यहूदी समूह टेम्पल माउंट कहते हैं, में सेटलर्स और अन्य यहूदी समूह इज़रायली सुरक्षा बलों की सुरक्षा में नियमित रूप से प्रवेश करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, केवल पिछले जून महीने के दौरान मस्जिद परिसर में ऐसी 26 घुसपैठ की घटनाएं दर्ज की गईं।
दूसरी ओर, फ़िलिस्तीनी कार्यकर्ता लगातार लोगों से बड़ी संख्या में अल-अक्सा मस्जिद पहुंचने और वहां किसी भी तरह के बदलाव थोपने की कोशिशों का विरोध करने की अपील कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अल-अक्सा मस्जिद की स्थिति को लेकर बढ़ती गतिविधियां और हालिया बयान क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा सकते हैं।
