अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे सप्ताह भी घातक हमले जारी हैं. संयुक्त राष्ट्र ने तत्काल तनाव कम करने की अपील करते हुए मध्य पूर्व में नागरिकों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे को हो रहे भारी नुक़सान पर चिन्ता जताई है.
संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने सोमवार को न्यूयॉर्क में कहा, “क्षेत्र के बड़े हिस्से में हिंसा फिर भड़कने और तनाव बढ़ने को लेकर हम बेहद चिन्तित हैं.” उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि “तत्काल तनाव कम किया जाना आवश्यक है.”
उन्होंने कहा कि किसी भी टकराव में नागरिकों और नागरिक ठिकानों की सुरक्षा बेहद अहम है. अस्पतालों और जल आपूर्ति समेत जीवन के लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचे को हमलों से बचाया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा, “सभी पक्षों को अन्तरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून का पालन करना होगा – नागरिकों और सैन्य ठिकानों के बीच फ़र्क़ करना होगा, हमलों में अनावश्यक नुक़सान से बचना होगा और पूरी सावधानी बरतनी होगी.”
यमन से फिर बढ़ा ख़तरा
प्रवक्ता ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र, यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब और लाल सागर के अहम समुद्री मार्गों को दी गई नई धमकियों को लेकर भी “बेहद चिन्तित” है. उन्होंने आगाह किया कि इससे क्षेत्र में तनाव और फैल सकता है.
उन्होंने तत्काल तनाव कम करने की अपील दोहराई और सभी पक्षों से बातचीत एवं कूटनीति के ज़रिए अपने मतभेद सुलझाने का आग्रह किया.
एक पत्रकार के सवाल के जवाब में, स्तेफ़ान दुजैरिक ने कहा कि इन धमकियों का मानवीय सहायता अभियानों और वैश्विक व्यापार पर भी गम्भीर असर पड़ सकता है.
उन्होंने कहा, “हम पहले भी लाल सागर में समुद्री यातायात ठप होते देख चुके हैं. हम नहीं चाहते कि वैसी स्थिति फिर पैदा हो.”
उन्होंने कहा, “इससे निश्चित रूप से संयुक्त राष्ट्र की आपूर्ति प्रभावित होगी, विशेष रूप से मानवीय सहायता सामग्री और शान्तिरक्षा अभियानों के लिए भेजे जाने वाले सामान की आवाजाही. मगर इससे भी अधिक चिन्ताजनक बात यह है कि इसका वैश्विक व्यापार, ऊर्जा व्यापार और समूचे वाणिज्य पर फिर नकारात्मक असर पड़ेगा.”
उन्होंने कहा कि यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब होर्मुज़ जलडमरूमध्य के लगभग बन्द होने का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पहले ही पड़ रहा है.
भय और अनिश्चितता
होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर नियन्त्रण को लेकर फिर भड़के हमलों ने शान्ति की उम्मीदों को धूमिल कर दिया है. ये उम्मीदें जून में वॉशिंगटन और तेहरान के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के बाद जगी थीं.
इस समझौते का उद्देश्य फ़रवरी में शुरू हुई लड़ाई को समाप्त करना था. उस समय अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर बमबारी की थी, जिसके जवाब में ईरान ने कई खाड़ी देशों और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया था.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की क्षेत्रीय निदेशक डॉक्टर हनान बल्ख़ी ने सोमवार को कहा, “पूरे मध्य पूर्व में नागरिक एक बार फिर लगातार हमलों के भय और अनिश्चितता में जी रहे हैं. इन हमलों के कारण स्वास्थ्य सेवाओं को घायलों का उपचार करने और लोगों की अन्य स्वास्थ्य ज़रूरतें पूरी करने में भारी दबाव का सामना करना पड़ रहा है.”
ईरान में स्थिति
उन्होंने बताया कि ईरान के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इस महीने 50 लोगों की मौत हुई है और 500 से अधिक लोग घायल हुए हैं. हताहतों में महिलाएँ और बच्चे भी शामिल हैं. हमलों से महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे को भी नुक़सान पहुँचा है.
उन्होंने दक्षिणी होर्मोज़गान प्रान्त में जल शोधन संयंत्र (desalination plant) पर कथित हमले का उल्लेख किया. इससे हज़ारों लोगों के लिए सुरक्षित पेयजल की आपूर्ति बाधित हो गई है.
इस बीच, पिछले सप्ताह बाक़ाई रेफ़रेंस अस्पताल के पास हुए विस्फोटों के बाद, कैंसर का विशेष उपचार करा रहे बच्चों को एहतियातन सुरक्षित स्थान पर ले जाना पड़ा.
परमाणु स्थल पर कथित हमला
अन्य घटनाक्रमों में, अन्तरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने रविवार को बताया कि वह ईरान में निर्माणाधीन दारख़ोविन परमाणु ऊर्जा संयंत्र के स्थल पर रात में हुए कथित हमले की ख़बरों की जाँच कर रही है.
एजेंसी ने कहा कि यह संयंत्र अभी निर्माण के शुरुआती चरण में है और निरीक्षकों की पिछली यात्रा के समय वहाँ कोई परमाणु सामग्री मौजूद नहीं थी.
हालाँकि इस हमले से विकिरण का कोई ख़तरा होने की आशंका नहीं है, फिर भी IAEA प्रमुख रफ़ाएल मारियानो ग्रॉसी ने सभी परमाणु स्थलों के आसपास सैन्य संयम बरतने का आग्रह किया.
खाड़ी देशों पर असर
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने क्षेत्र के अन्य देशों में हुई घटनाओं का भी उल्लेख किया. क़तर में मलबे के टुकड़े गिरने से पाँच नागरिक घायल हो गए.
पड़ोसी कुवैत में एक तेल प्रतिष्ठान पर हमले के बाद कई लोगों के घायल होने और भारी नुक़सान की ख़बर है. बिजली संयंत्रों और जल शोधन संयंत्रों पर भी हमले हुए. इनमें एक व्यक्ति घायल हुआ और बिजली उत्पादन की कई इकाइयाँ बन्द करनी पड़ीं.
डॉक्टर हनान बल्ख़ी ने कहा, “इन घटनाओं से नागरिकों और पर्यावरण के स्वास्थ्य पर ख़तरा बढ़ रहा है. साथ ही, आपातकालीन राहतकर्मियों और स्वास्थ्य सेवाओं पर लगातार दबाव पड़ रहा है.”
इसके मद्देनज़र, WHO ने पूरे मध्य पूर्व में तत्काल तनाव कम करने और अन्तरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून के अनुरूप नागरिकों व स्वास्थ्य सेवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है.
Source : UN News
