(प्रशांत टंडन)
मोदी जी गर्मी में गन्ने का जूस और जाड़ों में मूंगफली का ठेला लगाने लगाने वाली मौसमी जुमलेबाजी से अब युवाओं को झांसा नहीं दे पायेंगे. आपकी राजनीति का बेस नफ़रत है जिसकी बुनियाद गुजरात 2002 है – उसे अभी तक बदल नहीं पाये. आपकी छवि एक अनपढ़ नेता की बन चुकी जो चुनाव में भैंस चुरा जायेंगे जैसे बेतुके भाषणों से बनी है. 25 साल नफ़रत परोसने के बाद इंस्टाग्राम पर “थैंकयू फ्रेंड्स” की रील्स बनाने से देवता नहीं बन जायेंगे. जो पत्रकार और बेईमान इंफ्लुएंसर्स आपकी हर मूर्खता को मास्टरस्ट्रोक बताते हैं वो नये समाज के हाशिये पर जा चुके हैं.
जंतर मंतर ने नफ़रत और डर की राजनीति के खिलाफ़ फैसला सुना दिया है – वहां किसी ज्ञानेश कुमार का SIR नहीं चला, ओम बिड़ला युवाओं का माइक नहीं बंद कर पाये. जंतर मंतर का नैतिक वजन जस्टिस सूर्यकांत की बेंच से कई हज़ार गुना भारी था. गोदी मीडिया अब सिर्फ वाट्सऐप बूढ़ों को ही प्रभावित कर सकता है – युवा इसे देखते तक नहीं – रिजेक्ट करने की बात तो दूर है. जो नफ़रत का किला आपने बनाया उस पर जेन ज़ी का बुलडोज़र चल चुका है, नफ़रत के कमांडर्स घायल हैं या मारे जा चुके हैं – एक लाश गोदी मीडिया की भी पड़ी है वहां. आप इस खंडहर में अकेले खड़े हैं और “थैंकयू फ्रेंड्स” की रील बना रहे हैं. ये बनावटी रील्स उन तमाम सच्चाईयों पर पर्दा नहीं डाल सकती जिनकी गवाही जंतर मंतर दे रहा है.
NEET पेपर लीक की सरगना संजीव मुखिया को सीबीआई क्लीन चिट दे चुकी है जब युवा जंतर मंतर पर थे. पेपर लीक के बाद निराश छात्रों ने सुसाइड कर लिया, जंतर मंतर इनके लिये रोया, राहुल गांधी ने उनके पेरेंट्स को मंच दिया और उनका दुख साझा किया लेकिन नरेंद्र मोदी ने संवेदना का एक शब्द भी नहीं बोला. मोदी की नफ़रत की पॉलिटिक्स में संवेदना प्रकट करने का दस्तूर ही नहीं है.
20 जुलाई को छात्रों के उपर पेलेट गन, शॉक बेटन, आंसू गैस और कीलों लगे डंडों से हमला करने की इजाज़त किसने दी? किसने इजाज़त दी कि ऐसे घातक हथियारों का इस्तेमाल निहत्थे छात्रों पर किया जाये? पुलिस वालों पर क्या एक्शन हुआ?
इन छात्रों से संवेदना रखने वालों ने जब जंतर मंतर पर ऑनलाइन खाना भेजना शुरु किया तो समाज का ये खूबसूरत पहलू भी आपकी नफ़रत की पॉलिटिक्स के आड़े आ गया और इन सर्विसेज़ को बैन कर दिया.
आपकी सरकार, पार्टी के सीनियर लोगों और गोदी मीडिया ने छात्रों को आतंकवादी, विदेशी एजेंट कहा. मोदी सिर्फ प्रधानमंत्री के तौर पर नहीं एक इंसान के तौर पर फेल हुये हैं.
