अरब और इस्लामिक देशों ने अल-अक्सा मस्जिद में इजरायली घुसपैठ और क्षेत्रीय विस्तारवादी बयानों की कड़ी निंदा की

अल-अक्सा मस्जिद परिसर में बार-बार हो रही इजरायली घुसपैठ, उसकी धार्मिक एवं ऐतिहासिक पवित्रता को आहत करने वाली भड़काऊ हरकतों और दक्षिणी लेबनान तथा गाजा पट्टी के हिस्सों पर कब्जा करने संबंधी इजरायली बयानों के खिलाफ अरब और मुस्लिम देशों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। विभिन्न सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने एक सुर में चेतावनी दी है कि ये आक्रामक कदम क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं और एक बड़े धार्मिक संघर्ष को चिंगारी दे सकते हैं।

इस्लामी सहयोग संगठन (OIC) और प्रमुख क्षेत्रीय देशों ने इस बात पर फिर से जोर दिया है कि 1967 से अधिकृत फिलिस्तीनी क्षेत्रों (पूर्वी यरुशलम और उसके पवित्र स्थलों सहित) पर इजरायल का कोई कानूनी आधिपत्य नहीं है। कुवैत और कतर ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि इजरायली अधिकारियों और चरमपंथी सेटलर्स द्वारा सैन्य सुरक्षा के साये में की जा रही घुसपैठ अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय कानून का खुला उल्लंघन है। दोनों देशों ने स्पष्ट किया कि ये हरकतें दुनिया भर के करोड़ों मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर आभड़काने का काम करती हैं।

सऊदी अरब और मिस्र ने भी इस निंदा में अपनी आवाज बुलंद करते हुए अधिकृत वेस्ट बैंक में बढ़ते तनाव, फिलिस्तीनियों की आवाजाही पर लगे कड़े प्रतिबंधों और तथाकथित ‘येलो लाइन’ तक क्षेत्रीय विस्तार के बयानों की कड़ी आलोचना की। रियाद ने किसी भी इजरायली विस्तारवादी कोशिश को सिरे से खारिज कर दिया, वहीं काहिरा ने पवित्र स्थलों को निशाना बनाने के खतरनाक परिणामों के प्रति आगाह किया। इसके अलावा, जॉर्डन ने इजरायली मंत्रियों और चरमपंथी समूहों द्वारा परिसर में किए गए अवैध प्रवेश की निंदा करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

OIC के महासचिवालय ने वैश्विक समुदाय से इन लगातार उल्लंघनों को रोकने, अल-अक्सा की ऐतिहासिक और कानूनी स्थिति को सुरक्षित रखने के लिए फौरन कदम उठाने का आह्वान किया है। जैसे-जैसे आधिकारिक निंदा का सिलसिला बढ़ रहा है, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस बात की गहरी चिंता जताई जा रही है कि यदि ये भड़काऊ बयानबाजी और विस्तारवादी नीतियां नहीं रुकीं, तो पूरा मध्य पूर्व एक गंभीर सुरक्षा और स्थिरता संकट में फंस जाएगा।

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