पुलवामा : शिक्षा जब नवाचार और दूरदर्शिता से मिलती है, तो सफलता के नए आयाम तय होते हैं। दक्षिण कश्मीर के पुलवामा निवासी हारून रशीद भट ने फिजिक्स (भौतिक विज्ञान) में स्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद सरकारी या पारंपरिक नौकरी के पीछे भागने के बजाय, अपनी वैज्ञानिक सोच का इस्तेमाल जैविक कृषि (Organic Farming) में करने का फैसला किया। आज उनका यह कदम घाटी में एक हरित क्रांति और स्वरोजगार का प्रतीक बन चुका है।
सालाना ₹6 लाख की कमाई और टिकाऊ खेती
हारून द्वारा स्थापित ऑर्गेनिक वर्मीकम्पोस्ट (केंचुआ खाद) यूनिट आज एक बेहद सफल कृषि-उद्यम (Agri-Venture) के रूप में उभर चुकी है। उनका यह उद्यम सालाना लगभग ₹6 लाख की आय अर्जित कर रहा है। पर्यावरण-अनुकूल वर्मीकम्पोस्ट का उत्पादन कर हारून न केवल रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल को कम कर रहे हैं, बल्कि मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता को पुनर्जीवित कर ‘सस्टेनेबल फार्मिंग’ को भी बढ़ावा दे रहे हैं।
स्थानीय युवाओं के लिए बने रोजगार का जरिया
हारून की यह पहल सिर्फ उनकी निजी सफलता तक सीमित नहीं है। उन्होंने अपने इस स्टार्टअप के माध्यम से स्थानीय युवाओं को आजीविका और कौशल विकास (Skill Development) के अवसर प्रदान किए हैं, जिससे क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का माहौल बना है।
हारून रशीद भट का दृष्टिकोण:
“मेरा लक्ष्य कश्मीर में जैविक खेती को बढ़ावा देना और अधिक से अधिक युवाओं को आत्मनिर्भर एवं टिकाऊ भविष्य के लिए उद्यमिता चुनने के लिए प्रेरित करना है।”
नवाचार से आत्मनिर्भरता की ओर
शिक्षित युवाओं के लिए हारून की यह सफलता एक मिसाल है कि कैसे सही दिशा, लगन और नवाचार के साथ कृषि जैसे पारंपरिक क्षेत्र को भी एक लाभदायक और आधुनिक व्यवसाय में बदला जा सकता है। हारून रशीद भट आज कश्मीर के युवाओं के लिए एक सच्चे ‘चेंजमेकर’ के रूप में चमक रहे हैं।
