अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की रेजिडेंशियल कोचिंग अकादमी के छात्र मोहम्मद शाहिद रज़ा ने (यूपीएससी) सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज एग्जामिनेशन 2025 में शानदार सफलता हासिल कर असिस्टेंट कमांडेंट पद के लिए सेलेक्शन हासिल किया है। उनकी इस कामयाबी ने परिवार के साथ-साथ एएमयू और रेजिडेंशियल कोचिंग अकादमी का भी मान बढ़ाया है।
मोहम्मद शाहिद रज़ा की सफलता उन युवाओं के लिए एक मिसाल है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं और उन्हें पूरा करने के लिए लगातार मेहनत करते हैं। एएमयू की रेजिडेंशियल कोचिंग अकादमी में रहकर उन्होंने अपनी तैयारी को मजबूत किया और यूपीएससी सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज एग्जामिनेशन जैसी कठिन परीक्षा में कामयाबी हासिल की।
रेजिडेंशियल कोचिंग अकादमी से मिली तैयारी को सही दिशा
मोहम्मद शाहिद रज़ा ने एएमयू की रेजिडेंशियल कोचिंग अकादमी में रहकर अपनी कॉम्पिटिटिव एग्जामिनेशन की तैयारी की। अकादमी विद्यार्थियों को देश की प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर माहौल, गाइडेंस और जरूरी संसाधन उपलब्ध कराती है।
शाहिद ने इसी माहौल में अपने लक्ष्य पर पूरा फोकस रखा। लगातार पढ़ाई, अनुशासन और अपनी तैयारी पर भरोसे के साथ उन्होंने यूपीएससी सीएपीएफ एग्जामिनेशन में सफलता हासिल की।
आसान नहीं है सीएपीएफ एग्जामिनेशन का सफर
यूपीएससी सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज एग्जामिनेशन देश के प्रमुख कॉम्पिटिटिव एग्जामिनेशन में शामिल है। इसके जरिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में असिस्टेंट कमांडेंट के पद पर नियुक्ति होती है।
इस एग्जामिनेशन में सफलता के लिए सिर्फ किताबी नॉलेज ही काफी नहीं होती। उम्मीदवार की फिजिकल फिटनेस, मेंटल स्ट्रेंथ, डिसिप्लिन और लीडरशिप स्किल्स भी अहम भूमिका निभाती हैं। ऐसे में शाहिद रज़ा का सेलेक्शन उनकी लंबे समय की मेहनत और लक्ष्य के प्रति उनकी कमिटमेंट को दिखाता है।
संघर्ष और मेहनत बनी सफलता की वजह
शाहिद रज़ा की कहानी सिर्फ एक एग्जाम पास करने की कहानी नहीं है। यह उन हजारों युवाओं के लिए मोटिवेशन है, जो यूपीएससी, सीएपीएफ, एसएससी और दूसरी कॉम्पिटिटिव परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।
ऐसी परीक्षाओं की तैयारी में सबसे बड़ी चुनौती लंबे समय तक अपनी तैयारी को लगातार जारी रखना होती है। कई बार असफलता और दबाव के बीच भी अपने लक्ष्य से जुड़े रहना आसान नहीं होता। शाहिद रज़ा की कामयाबी बताती है कि धैर्य, लगातार मेहनत और सही स्ट्रैटेजी के साथ मुश्किल लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है।
एएमयू और रेजिडेंशियल कोचिंग अकादमी के लिए गर्व का पल
मोहम्मद शाहिद रज़ा के असिस्टेंट कमांडेंट पद के लिए सेलेक्शन पर एएमयू और रेजिडेंशियल कोचिंग अकादमी में खुशी का माहौल रहा। रेजिडेंशियल कोचिंग अकादमी के डायरेक्टर प्रोफेसर मोहम्मद हसन और अकादमी एडमिनिस्ट्रेशन ने उन्हें बधाई दी और उनकी मेहनत, डेडिकेशन और शानदार परफॉर्मेंस की सराहना की।
शाहिद की यह कामयाबी अकादमी में तैयारी कर रहे दूसरे स्टूडेंट्स के लिए भी बड़ी प्रेरणा है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि किसी भी कॉम्पिटिटिव एग्जामिनेशन में कामयाबी के लिए टैलेंट के साथ सही गाइडेंस, डिसिप्लिन, लगातार प्रैक्टिस और पेशेंस भी जरूरी है।
अब शुरू होगा जिम्मेदारी का नया सफर
असिस्टेंट कमांडेंट के रूप में मोहम्मद शाहिद रज़ा के करियर का एक नया चैप्टर शुरू होने जा रहा है। यह पद उन्हें लीडरशिप, जिम्मेदारी और देश की सेवा से जुड़ी महत्वपूर्ण भूमिका देगा।
शाहिद रज़ा की कहानी का सबसे बड़ा संदेश यही है कि अगर लक्ष्य साफ हो, मेहनत लगातार हो और खुद पर भरोसा कायम रहे, तो मुश्किल से मुश्किल मंजिल भी हासिल की जा सकती है।
