फ़राज़ अली की फिल्म ‘ओबुर’ ने नेशनल अवॉर्ड जीतकर रचा इतिहास।

फ़राज़ अली वो शख्स जिसकी हिंदी-कश्मीरी शॉर्ट फ़िल्म ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना ली और यही नहीं फ़राज़ अली की फिल्म ‘ओबुर’ ने 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में बेस्ट स्क्रीनप्ले का पुरस्कार जीतकर कश्मीर का नाम रोशन किया है। वो कहते है ना किसी भी फिल्म की ताकत उसकी कहानी होती है, जब कहानी लोगों के दिलों तक पहुंचती है, तो उसकी पहचान किसी एक भाषा या क्षेत्र तक सीमित नहीं रहती। इसी की एक मिसाल पेश की फिल्मकार फ़राज़ अली ने ये कामयाबी सिर्फ एक फिल्म की जीत नहीं है, बल्कि पूरी लगन और मेहनत से कश्मीर की उन तमाम कहानियों, संस्कृति और क्षेत्रीय आवाज़ों की कहानी बताती है जिसे आज राष्ट्रीय मंच पर पहचान मिली और इस पहचान ने साबित कर दिया कामयाबी बड़े शहरो की मोहताज नहीं होती है।

हम फ़राज़ अली की फिल्म की शूटिंग की बात करे तो इनकी फिल्म ‘ओबुर’ की शूटिंग कश्मीर की खूबसूरत लोकेशन्स दूधपथरी और श्रीनगर में की गई। इन जगहों की प्राकृतिक खूबसूरती और कश्मीर के स्थानीय परिवेश ने फिल्म को एक खास पहचान दी है।इनकी ये फिल्म हिंदी और कश्मीरी भाषा में बनी इस शॉर्ट फिल्म के जरिए कश्मीर की स्थानीय कहानियों को बड़े मंच तक पहुंचाने की कोशिश की गई है। फिल्म को मिला यह राष्ट्रीय सम्मान बताता है कि क्षेत्रीय भाषाओं और स्थानीय कहानियों में भी ऐसी ताकत होती है, जो देशभर के दर्शकों और फिल्म जगत का ध्यान अपनी ओर खींच सकती है।

फ़राज़ अली की यह उपलब्धि उन तमाम युवा फिल्मकारों के लिए भी एक प्रेरणा है, जो आगे चलकर फिल्म की दुनिया या कहे तो बॉलीवुड में अपना करियर बनाना चाहते है अपनी मिट्टी, अपनी भाषा और अपने समाज की कहानियों को सिनेमा के जरिए दुनिया तक पहुंचाना चाहते हैं।कश्मीरी की शॉर्ट फिल्म ‘ओबुर’ ने बेस्ट स्क्रीनप्ले का अवॉर्ड अपने नाम किया है।इस कामयाबी के बाद से पुरे परिवार में जश्न का माहौल है लोग इन्हे बधाई दे रहे है। ओबुर’ को मिला यह सम्मान सिर्फ एक फिल्म की उपलब्धि नहीं, बल्कि कश्मीरी भाषा, स्थानीय प्रतिभा और अपनी कहानियों को बड़े पर्दे पर लाने के जुनून की राष्ट्रीय पहचान की निशानी है।

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