नई दिल्ली, 3 सितंबर: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के 17 सितंबर से शुरू होने वाले तीन महीने के देशव्यापी ‘सेव इंडिया, सेव शरीया’ अभियान पर ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद अली अनवर अंसारी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि ‘शरीयत बचाओ’ जैसे जज़्बाती और मजहबी नारों के साथ अभियान चलाने से देश में धार्मिक ध्रुवीकरण का खतरा बढ़ सकता है और इसका फायदा दक्षिणपंथी ताकतों को ही मिलेगा।
2 सितंबर को जारी अपने बयान में अली अनवर ने कहा कि फिलहाल मुस्लिम शरीया पर कोई नया खतरा दिखाई नहीं दे रहा है। इसके विपरीत, उन्होंने SIR, परिसीमन और बड़े पैमाने पर वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने जैसी प्रक्रियाओं को लेकर चिंता जताई और कहा कि इनका असर खास तौर पर मुसलमानों पर पड़ने की आशंका सामने आ रही है। उनके मुताबिक, मौजूदा स्थिति में जम्हूरियत और संविधान पर खतरा अधिक स्पष्ट दिखाई देता है।
अली अनवर ने कहा कि यदि मुस्लिम धार्मिक नेतृत्व जज़्बाती मुद्दों के बजाय आम सरोकारों और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े सवालों को लेकर अभियान चलाता, तो उसे हर धर्म के लोगों की सहानुभूति और समर्थन मिल सकता था। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में मजहबी अभियान शुरू करना दक्षिणपंथी ताकतों के लिए राजनीतिक रूप से फायदेमंद साबित हो सकता है।
शाहबानो और बाबरी मस्जिद का दिया उदाहरण: पूर्व सांसद ने अपने बयान में शाहबानो प्रकरण और बाबरी मस्जिद का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अतीत में मुस्लिम धार्मिक नेताओं के दबाव के बाद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटा, जबकि दूसरी तरफ दक्षिणपंथी ताकतों के दबाव में बाबरी मस्जिद का ताला खोला गया। अली अनवर के मुताबिक, इसके बाद देश ने जिस घटनाक्रम का सामना किया, उसका खामियाजा आज तक भुगतना पड़ रहा है।
उन्होंने बिहार में पूर्व मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड महासचिव मौलाना वली रहमानी द्वारा आयोजित ‘देश बचाओ, दिन बचाओ’ रैली का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि रैली के बाद उनके एक शागिर्द को एमएलसी बनाए जाने की घोषणा कर दी गई थी।
मुस्लिम संगठनों और राजनीतिक संपर्कों पर भी सवाल: अली अनवर ने 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले कुछ मुस्लिम नेताओं और सेवानिवृत्त नौकरशाहों की संघ प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकातों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने संघ प्रमुख की सार्वजनिक रूप से प्रशंसा की, जबकि एक मौलाना द्वारा उन्हें ‘राष्ट्रऋषि’ तक का संबोधन दिए जाने का दावा भी किया। उन्होंने आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र मुस्लिम धार्मिक संगठनों से ऐसे मजहबी अभियानों से दूर रहने की अपील की।
अली अनवर ने देश के विभिन्न मुस्लिम धार्मिक संस्थानों की संरचना और उनके राजनीतिक संबंधों पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि कई बड़े धार्मिक संस्थान व्यवहार में एनजीओ की तरह काम करते हैं और कुछ के पास FCRA लाइसेंस भी हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता में जो सरकार होती है, ऐसे संस्थान उसी के ‘तलबगार’ होते हैं।
अली अनवर का मूल संदेश यही है कि मुस्लिम नेतृत्व को भावनात्मक धार्मिक मुद्दों के बजाय संविधान, लोकतंत्र, मताधिकार और व्यापक सामाजिक सरोकारों को केंद्र में रखकर अपनी राजनीतिक दिशा तय करनी चाहिए।
