चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में एक नया राजनीतिक मोर्चा औपचारिक रूप से सामने आ गया है। मुख्यमंत्री और तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) प्रमुख सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाले गठबंधन को अब ‘सेक्युलर सोशल जस्टिस विक्ट्री अलायंस’ नाम दिया गया है। चेन्नई के पनैयूर स्थित TVK मुख्यालय में बुधवार को हुई गठबंधन समन्वय बैठक में इस नाम की घोषणा की गई।
इस गठबंधन में कांग्रेस, विदुथलाई चिरुथिगल काची (VCK), मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (MDMK) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) शामिल हैं। गठबंधन को सिर्फ चुनावी तालमेल तक सीमित रखने के बजाय वैचारिक मोर्चे के रूप में पेश करने की कोशिश की जा रही है। इसके नाम में ‘धर्मनिरपेक्षता’, ‘सामाजिक न्याय’ और ‘विजय’ को प्रमुखता दी गई है।
तमिलनाडु की राजनीति में यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य में पहले से DMK और AIADMK के नेतृत्व वाले प्रमुख राजनीतिक गठबंधन मौजूद हैं। ऐसे में विजय के नेतृत्व वाला नया मोर्चा राज्य की राजनीति में एक अलग धुरी बनाने की कोशिश करता दिखाई दे रहा है। गठबंधन की पहली बड़ी राजनीतिक परीक्षा आगामी उपचुनावों में होने की उम्मीद है। इसके बाद स्थानीय और विधानसभा चुनावों की रणनीति को लेकर भी सहयोगी दलों के बीच चर्चा आगे बढ़ेगी।
गठबंधन बनने के बावजूद कांग्रेस और TVK के बीच राजनीतिक नेतृत्व को लेकर मतभेद की चर्चा भी सामने आती रही है। कांग्रेस के कुछ नेताओं ने 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए राहुल गांधी को पार्टी का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने की बात कही है। दूसरी ओर, TVK के भीतर विजय को राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका देने की आवाजें भी उठती रही हैं। यही वजह है कि नया गठबंधन बनने के साथ ही यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि आने वाले समय में राज्य की राजनीति से आगे राष्ट्रीय स्तर पर इस गठबंधन की क्या भूमिका होगी।
हालांकि, फिलहाल गठबंधन का तत्काल फोकस तमिलनाडु और पुडुचेरी में राजनीतिक संगठन को मजबूत करने तथा आगामी चुनावी मुकाबलों पर बताया जा रहा है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बी. मणिकम टैगोर ने कहा है कि विजय गठबंधन का नेतृत्व करेंगे।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा ध्यान CPI और CPM की गैरमौजूदगी ने खींचा है दोनों वाम दल TVK सरकार को मुद्दा-आधारित समर्थन दे रहे हैं, लेकिन गठबंधन की इस औपचारिक बैठक में शामिल नहीं हुए। इससे यह संकेत मिला है कि सरकार को समर्थन देना और औपचारिक रूप से गठबंधन का हिस्सा बनना—दो अलग-अलग राजनीतिक फैसले हैं। वाम दलों का यह रुख आने वाले दिनों में गठबंधन के भीतर रणनीतिक और वैचारिक संतुलन को लेकर महत्वपूर्ण हो सकता है।
नए गठबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने राजनीतिक समीकरण को जमीन पर साबित करने की होगी। आगामी उपचुनाव इसके लिए पहला बड़ा परीक्षण बन सकते हैं। अगर TVK के नेतृत्व वाला यह गठबंधन इन चुनावों में मजबूत प्रदर्शन करता है, तो विजय की राजनीतिक पकड़ और मजबूत हो सकती है। साथ ही कांग्रेस, VCK, MDMK और IUML के साथ उसका गठजोड़ राज्य की चुनावी राजनीति में नई ताकत के रूप में स्थापित हो सकता है।
लेकिन अगर गठबंधन के भीतर नेतृत्व, सीट बंटवारे या राष्ट्रीय राजनीति को लेकर मतभेद बढ़ते हैं, तो इसकी एकजुटता की परीक्षा भी उतनी ही जल्दी शुरू हो सकती है। असली सवाल: क्या विजय तमिलनाडु की राजनीति को दो ध्रुवों से तीन ध्रुवों की ओर ले जाएंगे फिलहाल इतना स्पष्ट है कि विजय की TVK ने तमिलनाडु की राजनीति में अपनी स्वतंत्र पहचान को एक बड़े गठबंधन के रूप में बदलने की दिशा में कदम बढ़ाया है। ‘सेक्युलर सोशल जस्टिस विक्ट्री अलायंस’ अब केवल एक नाम नहीं, बल्कि विजय की राजनीतिक महत्वाकांक्षा और तमिलनाडु में नए सत्ता समीकरण की पहली बड़ी परीक्षा भी है।
