पुतिन की सुरक्षा का ऐसा चक्रव्यूह कि टिश्यू और तौलिया भी नहीं बचता, विदेश दौरे पर साथ चलता है पूरा ‘सुरक्षा तंत्र’

नई दिल्ली: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार को भारत पहुंच रहे हैं। उनके दौरे को लेकर राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। लेकिन पुतिन की सुरक्षा का दायरा सिर्फ बुलेटप्रूफ गाड़ियों, हथियारबंद कमांडो और सुरक्षा घेरे तक सीमित नहीं है। उनके विदेशी दौरों के दौरान रूस की सुरक्षा व्यवस्था इतनी व्यापक होती है कि उनके खाने-पानी से लेकर होटल के कमरे और उनके इस्तेमाल किए गए सामान तक पर नजर रखी जाती है। पुतिन की सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण पहलू जैविक सुरक्षा भी है। इसका मतलब है कि उनके शरीर से जुड़े बाल, त्वचा के कण या दूसरे जैविक नमूने किसी दूसरे व्यक्ति या देश के हाथ न लगें। ऐसी सामग्री से किसी व्यक्ति की पहचान और स्वास्थ्य से जुड़ी संवेदनशील जानकारी सामने आ सकती है।

पुतिन जब किसी विदेशी देश की यात्रा करते हैं तो उनके आने से पहले ही रूस से विमानों के जरिए सुरक्षा से जुड़ा सामान और अधिकारी पहुंच जाते हैं। भारत यात्रा के लिए भी रूसी विशेष विमान पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं। इनमें रूस का भारी सैन्य परिवहन विमान आईएल-76 भी शामिल है। इस तरह के विमानों के जरिए सुरक्षा जवानों, सैन्य अधिकारियों और जरूरी उपकरणों को पहले से पहुंचाया जाता है। पुतिन की सुरक्षा व्यवस्था में विशेष सुरक्षा अधिकारी, सैन्य अधिकारी, संचार विशेषज्ञ, रसद दल, प्रोटोकॉल अधिकारी और विशेष वाहन शामिल होते हैं। कई बार उनके पसंदीदा भोजन की व्यवस्था भी रूस से ही की जाती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2010 से पुतिन के विदेशी दौरों के दौरान एक चलित खाद्य प्रयोगशाला भी भेजे जाने की व्यवस्था की गई। इसमें उनके विशेष रसोइये और वैज्ञानिक शामिल होते हैं। इस टीम का काम पुतिन को परोसे जाने वाले भोजन और पानी की जांच करना होता है। पानी से लेकर सलाद तक की जांच के बाद ही उसे राष्ट्रपति के सामने परोसे जाने की अनुमति दी जाती है। पुतिन के लिए होटल में भी विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू होता है। उनके कमरे को पहले से तैयार और स्वच्छ किया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, विदेश यात्राओं में रूस से पानी, बिस्तर, चिकित्सकीय किट और डॉक्टरों की टीम तक भेजी जाती रही है।

पुतिन की जैविक सुरक्षा को वर्ष 2014 के बाद और कड़ा किए जाने की बात रिपोर्ट में कही गई है। बताया गया है कि पुतिन द्वारा इस्तेमाल किए गए गिलास, टिश्यू पेपर और यहां तक कि तौलिया जैसी चीजों को उनकी सुरक्षा टीम एकत्र करके रूस वापस ले जाती है। होटल के कमरे की जल निकासी व्यवस्था को भी सील करने जैसी सावधानियों का उल्लेख किया गया है, ताकि कोई जैविक नमूना पीछे न छूटे।

रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन युद्ध के बाद पुतिन की सुरक्षा व्यवस्था में और इजाफा किया गया है। उनके भोजन और बोतलबंद पानी की बार-बार जांच की जाती है। जिन वस्तुओं को वह छूते हैं या जिन कुर्सियों और सोफों पर बैठते हैं, उनकी सफाई और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है। इसके अलावा उनकी सुरक्षा के लिए ड्रोन रोधी प्रणाली, बुलेटप्रूफ और विस्फोटरोधी वाहन तथा प्रशिक्षित निशानेबाजों की तैनाती जैसी व्यवस्थाएं भी की जाती हैं। रिपोर्ट में क्रेमलिन के हवाले से बताया गया है कि पुतिन की सुरक्षा के लिए सेना की एक विशेष इकाई बनाई गई है, जिसमें 800 से अधिक जवान हैं।

पुतिन की जैविक सुरक्षा के पीछे जासूसी की पुरानी घटनाओं का संदर्भ भी दिया जाता है। रिपोर्ट में 1949 में सोवियत नेता जोसेफ स्टालिन और चीनी नेता माओ जेदोंग से जुड़ा एक दावा सामने रखा गया है। बताया जाता है कि उस दौर में सोवियत खुफिया तंत्र विदेशी नेताओं के जैविक नमूनों का विश्लेषण करता था। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुतिन खुद सोवियत संघ की खुफिया एजेंसी केजीबी में अधिकारी रह चुके हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा व्यवस्था में जासूसी और जैविक सुरक्षा से जुड़े जोखिमों को लेकर अतिरिक्त सतर्कता को महत्वपूर्ण माना जाता है।

पुतिन की भारत यात्रा के दौरान दिल्ली में सुरक्षा के अभेद्य इंतजाम किए जा रहे हैं। लेकिन उनके सुरक्षा घेरे की असली खासियत यह है कि इसकी शुरुआत राष्ट्रपति के भारत पहुंचने से काफी पहले हो जाती है और इसमें सिर्फ हथियार और सुरक्षा जवान ही नहीं, बल्कि भोजन, पानी, होटल, संचार और यहां तक कि उनके जैविक निशानों तक की सुरक्षा शामिल होती है।

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