सहारनपुर: समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर देश में राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले BJP-NDA शासित सभी 21 राज्यों में UCC लागू करने का संकल्प जताया है। इसके बाद विपक्षी दलों की ओर से प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।
सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने UCC को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश से “25 करोड़ मुसलमानों को बाहर नहीं निकाला जा सकता।” उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदू-मुस्लिम के नाम पर नफरत और विभाजन की राजनीति अब ज्यादा समय तक नहीं चलेगी।
इमरान मसूद ने भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि एक समान कानून देश के अलग-अलग समुदायों और विशेष रूप से आदिवासी समाज की परंपराओं पर किस तरह लागू किया जाएगा। उनका कहना है कि भारत में अलग-अलग समुदायों की अपनी धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराएं हैं और किसी एक सोच को पूरे देश पर नहीं थोपा जा सकता।
वहीं, केंद्र सरकार और BJP UCC को समान नागरिक अधिकार और समान कानूनी व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार के रूप में पेश कर रहे हैं। UCC के तहत विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत कानूनों में एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव है।
फिलहाल उत्तराखंड में UCC पूरी तरह लागू है, जबकि गोवा में लंबे समय से एक समान नागरिक संहिता से जुड़े प्रावधान मौजूद हैं। अब BJP की नजर अन्य NDA शासित राज्यों पर है।
UCC को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच यह टकराव आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है—खासकर 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले।
