सऊदी की तेल पाइपलाइन बंद, होर्मुज पर भी संकट—क्या भारत में बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। सऊदी अरब ने ड्रोन हमलों के बाद अपनी महत्वपूर्ण East-West Oil Pipeline को एहतियातन बंद कर दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब दुनिया की नजर पहले से ही होर्मुज जलडमरूमध्य पर टिकी हुई है।

होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में शामिल है। खाड़ी देशों से निकलने वाले बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पाद इसी समुद्री रास्ते से दुनिया के बाजारों तक पहुंचते हैं। ऐसे में अगर यहां जहाजों की आवाजाही लंबे समय तक प्रभावित होती है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा दबाव पड़ सकता है।

सऊदी अरब की East-West Pipeline का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह तेल को लाल सागर के रास्ते निर्यात करने का वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराती है। लेकिन इस पाइपलाइन के बंद होने से तेल आपूर्ति के वैकल्पिक रास्तों पर भी चिंता बढ़ गई है।

इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिल रहा है। Brent Crude Oil की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच चुकी है, जिससे दुनिया के उन देशों की चिंता बढ़ गई है जो अपनी तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर हैं।

भारत भी अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। इसलिए अगर पश्चिम एशिया का संकट लंबा खिंचता है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची रहती हैं, तो भारत पर भी आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।

फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तत्काल बड़ी बढ़ोतरी जरूरी नहीं है, लेकिन अगर तेल संकट लंबा चला तो महंगे कच्चे तेल का असर आने वाले दिनों में भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ सकता है।

होर्मुज का संकट अब सिर्फ पश्चिम एशिया की समस्या नहीं—इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब तक पहुंच सकता है।

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