UPI के नए नियम: किन पेमेंट पर लगेगा चार्ज, किसे देना होगा MDR और क्या रहेगा बिल्कुल फ्री?

नई दिल्ली: UPI को लेकर सरकार ने नया फ्रेमवर्क जारी किया है, जिसके बाद आम यूज़र्स के बीच यह सवाल उठने लगा था कि क्या अब UPI से पेमेंट करने पर चार्ज देना होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले UPI पेमेंट पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। यानी आम लोगों के लिए P2P यानी Person-to-Person UPI ट्रांजैक्शन पहले की तरह मुफ़्त रहेगा।

सरकार के मुताबिक, UPI के कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू का करीब 70 फीसदी हिस्सा P2P पेमेंट का है। ऐसे में आम यूज़र्स द्वारा एक-दूसरे को पैसे भेजने पर नए MDR नियम का कोई असर नहीं पड़ेगा।

₹2,000 तक के पेमेंट पर भी MDR नहीं

नए फ्रेमवर्क के मुताबिक, दुकानदार या कारोबारी को किए जाने वाले यानी P2M (Person-to-Merchant) UPI पेमेंट में ₹2,000 तक के ट्रांजैक्शन पर MDR नहीं लगेगा।

इसका मतलब है कि किराना दुकान, पेट्रोल पंप या किसी अन्य कारोबारी को ₹2,000 तक का UPI भुगतान करने पर ग्राहक से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा और मर्चेंट पर भी MDR नहीं लगेगा।

₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर 0.4% MDR

₹2,000 से अधिक के सामान्य मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4 फीसदी MDR निर्धारित किया गया है। हालांकि, इस शुल्क का भुगतान ग्राहक को नहीं करना होगा। सरकार ने बैंकों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि मर्चेंट इस शुल्क का बोझ ग्राहकों पर न डालें।

उदाहरण के तौर पर, ₹10,000 के UPI पेमेंट पर 0.4 फीसदी MDR के हिसाब से ₹40 शुल्क बनता है, लेकिन यह ₹40 ग्राहक से अलग से नहीं लिया जाना चाहिए। यह मर्चेंट की ओर से देय शुल्क होगा।

MDR की अधिकतम सीमा ₹300

सरकार ने MDR के लिए अधिकतम सीमा भी तय की है। 0.4 फीसदी की दर के हिसाब से ₹75,000 तक के पेमेंट पर MDR अधिकतम ₹300 होगा। इसके बाद ट्रांजैक्शन की रकम कितनी भी हो, MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन रहेगी।

पेट्रोल, रेलवे और टेलीकॉम जैसे सेक्टर के लिए अलग नियम

कुछ आवश्यक सेवाओं के लिए MDR की अलग व्यवस्था की गई है। रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन यानी पेट्रोल-डीज़ल और कृषि से जुड़े इनपुट के लिए ₹2,000 से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर ₹5 का फ्लैट MDR निर्धारित किया गया है।

हालांकि, यह राशि भी ग्राहक से नहीं ली जानी है।

स्टॉक मार्केट और म्यूचुअल फंड पेमेंट पर 0.02% MDR

म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज़, स्टॉक ब्रोकर और डीलर से जुड़े पेमेंट के लिए 0.02 फीसदी MDR तय किया गया है। इसकी अधिकतम सीमा भी ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन रखी गई है।

छोटे दुकानदारों को बड़ी राहत

नए फ्रेमवर्क में छोटे कारोबारियों को भी राहत दी गई है। स्ट्रीट वेंडर, मोहल्ले की दुकान और अन्य छोटे कारोबारी, जो P2M कैटेगरी में आते हैं, अगर UPI QR कोड के जरिए एक महीने में ₹1 लाख तक प्राप्त करते हैं, तो उनके ट्रांजैक्शन पर Zero MDR रहेगा।

सरकार के अनुसार, इसका मकसद छोटे कारोबारियों पर डिजिटल पेमेंट की अतिरिक्त लागत का बोझ न पड़ने देना है।

96% मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर नहीं पड़ेगा असर

सरकार के मुताबिक, मौजूदा UPI ट्रांजैक्शन में केवल करीब 4 फीसदी मर्चेंट ट्रांजैक्शन ही MDR के दायरे में आएंगे, जबकि लगभग 96 फीसदी मर्चेंट ट्रांजैक्शन इससे अप्रभावित रहेंगे।

ये मुख्य रूप से ₹2,000 से कम के ट्रांजैक्शन या Zero-MDR व्यवस्था के तहत आने वाले छोटे कारोबारियों के पेमेंट होंगे।

UPI को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने का दावा

सरकार के मुताबिक, नए फ्रेमवर्क का मकसद UPI को लंबे समय तक टिकाऊ बनाना और इसके डिजिटल पेमेंट इंफ़्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना है। MDR से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल पेमेंट सिस्टम से जुड़े विभिन्न हिस्सेदारों के बीच किया जाएगा।

इसके अलावा, कुल MDR कलेक्शन का 5 फीसदी हिस्सा छोटे कारोबारियों के लिए बनाए गए फंड में देने की बात कही गई है, जिसका इस्तेमाल छोटे कारोबारियों के बीच UPI को बढ़ावा देने और अधिक दुकानों को डिजिटल पेमेंट नेटवर्क से जोड़ने में किया जाएगा।

कुल मिलाकर नए फ्रेमवर्क का सीधा संदेश यह है कि आम लोगों के P2P UPI पेमेंट मुफ़्त रहेंगे और ₹2,000 तक के अधिकांश मर्चेंट पेमेंट पर भी MDR नहीं लगेगा। बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लागू होगा, लेकिन सरकार के अनुसार इसका बोझ ग्राहक पर नहीं डाला जाना चाहिए।

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