ब्राज़ील में दक्षिणपंथी राजनीति को झटका, लूला की ऐतिहासिक वापसी

ब्राज़ील के राष्ट्रपति चुनाव में वामपंथी नेता लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा ने शानदार जीत दर्ज करते हुए एक बार फिर सत्ता में वापसी की है। इस जीत के साथ 80 वर्षीय लूला चौथी बार राष्ट्रपति पद संभालने जा रहे हैं। उन्होंने कट्टर दक्षिणपंथी उम्मीदवार और पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे फ्लावियो बोल्सोनारो को शिकस्त दी है। रविवार, 25 अक्टूबर को हुए दूसरे दौर के मतदान में लूला को 51.76 प्रतिशत, जबकि फ्लावियो बोल्सोनारो को 48.24 प्रतिशत वोट मिले। चुनावी सर्वेक्षणों में फ्लावियो को बढ़त मिलने के बावजूद लूला की जीत ने राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है।

दक्षिणपंथी राजनीति को बड़ा झटका

लूला की जीत को ब्राज़ील में दक्षिणपंथी राजनीति के लिए एक बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है। फ्लावियो बोल्सोनारो अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए देश में रूढ़िवादी राजनीति को मजबूत करने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने सरकारी खर्च में कटौती, टैक्स कम करने और संगठित अपराध के खिलाफ सख्त कार्रवाई का वादा किया था। हालांकि, चुनाव में हार के बाद फ्लावियो ने नतीजों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उन्होंने परिणामों को ‘असंभव’ और ‘समझ से परे’ बताते हुए चुनावी नतीजों को रद्द करने की मांग की। उनका यह रुख उनके पिता जायर बोल्सोनारो की उस प्रतिक्रिया की याद दिलाता है, जिन्होंने 2022 में चुनाव हारने के बाद अपनी पराजय को स्वीकार नहीं किया था। जायर बोल्सोनारो को 2022 के चुनाव के बाद तख्तापलट की साजिश रचने के मामले में दोषी ठहराया गया था और वह 27 साल की सजा काट रहे हैं। स्वास्थ्य कारणों से फिलहाल उन्हें घर पर रखा गया है।

अमेरिका के लिए क्यों अहम है लूला की जीत?

ब्राज़ील में लूला की वापसी का असर केवल घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा। लैटिन अमेरिका में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए भी यह नतीजा अहम माना जा रहा है। लूला ने ट्रंप की आक्रामक विदेश नीति की आलोचना की है और स्पष्ट किया है कि ब्राज़ील अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम रहेगा। दूसरी ओर, फ्लावियो बोल्सोनारो ने अमेरिका के साथ संबंधों को और मजबूत करने का वादा किया था। पिछले साल से अमेरिका ने ब्राज़ील पर व्यापार शुल्क और अन्य प्रतिबंध लगाए हैं। ऐसे में लूला की जीत दोनों देशों के संबंधों में नई चुनौतियां पैदा कर सकती है। ब्राज़ील दक्षिण अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में उसका महत्वपूर्ण स्थान है। लूला चीन के साथ बेहतर संबंधों के समर्थक माने जाते हैं। ब्राज़ील के पास तेल के बड़े भंडार और महत्वपूर्ण खनिज संसाधन भी हैं। इसलिए उसकी विदेश नीति और आर्थिक साझेदारियां वैश्विक शक्ति संतुलन के लिहाज से अहम हैं।

कल्याणकारी योजनाओं पर लूला का भरोसा

लूला ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान सामाजिक कल्याण, गरीबी उन्मूलन और आम नागरिकों को आर्थिक राहत देने पर जोर दिया। पहले दौर के मतदान के बाद उन्होंने कर्ज माफी, सप्ताहांत में मुफ्त सार्वजनिक परिवहन और गरीब विद्यार्थियों के लिए वित्तीय सहायता जैसी घोषणाएं कीं। लूला इससे पहले 2003 से 2010 तक दो कार्यकालों में ब्राज़ील के राष्ट्रपति रह चुके हैं। उनके शुरुआती कार्यकालों में शुरू की गई कल्याणकारी योजनाओं ने गरीबी कम करने में मदद की थी। बाद में भ्रष्टाचार के मामलों में उन्हें जेल जाना पड़ा, लेकिन उनकी सजा और संबंधित न्यायिक फैसलों के पलटने के बाद वह सक्रिय राजनीति में लौटे। वर्ष 2022 में उन्होंने जायर बोल्सोनारो को हराकर तीसरी बार राष्ट्रपति पद हासिल किया था।

अमेजन और पर्यावरण संरक्षण पर नजर

लूला की जीत का पर्यावरण संरक्षण के समर्थकों ने भी स्वागत किया है। ब्राज़ील में अमेजन वर्षावन वैश्विक पर्यावरण संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। पर्यावरण कार्यकर्ताओं को आशंका थी कि फ्लावियो बोल्सोनारो के सत्ता में आने से कृषि व्यवसाय और खनन क्षेत्र को अधिक छूट मिल सकती है, जिससे जंगलों की कटाई और पर्यावरणीय नुकसान बढ़ने का खतरा पैदा होता। जायर बोल्सोनारो के राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान अमेजन में वनों की कटाई और जंगलों में आग लगने की घटनाओं को लेकर व्यापक चिंता जताई गई थी। अब लूला के सामने पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती होगी।

नई पारी आसान नहीं होगी

लूला का नया कार्यकाल 5 जनवरी 2027 से शुरू होने वाला है। हालांकि, उनकी ऐतिहासिक जीत के बावजूद आगे की राह आसान नहीं होगी। ब्राज़ील की संसद में विपक्ष की मजबूत मौजूदगी, राजनीतिक ध्रुवीकरण और आर्थिक चुनौतियां उनकी सरकार के लिए मुश्किलें पैदा कर सकती हैं। करीब पांच दशक के राजनीतिक अनुभव के साथ लूला ने एक बार फिर साबित किया है कि ब्राज़ील की राजनीति में उनकी पकड़ अब भी मजबूत है। लेकिन उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती चुनावी जीत को प्रभावी शासन, आर्थिक स्थिरता और सामाजिक न्याय में बदलने की होगी।

लूला की जीत ब्राज़ील की राजनीति में वामपंथी नेतृत्व की वापसी और बोल्सोनारो परिवार की दक्षिणपंथी राजनीति के लिए बड़ा झटका है। इसके साथ ही यह परिणाम लैटिन अमेरिका में अमेरिका के प्रभाव, चीन के साथ ब्राज़ील के संबंधों और पर्यावरण संरक्षण की भविष्य की दिशा को भी प्रभावित कर सकता है।

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