पाकिस्तान में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की बढ़ी मुश्किलें, वकील दंपति को 10 साल की सज़ा

पाकिस्तान की अदालत ने प्रमुख मानवाधिकार वकील ईमान मजारी और उनके पति हादी अली चट्ठा को 10-10 साल जेल की सजा सुनाई है। अदालत ने यह फैसला 29 अक्टूबर 2026 को रावलपिंडी की अदियाला जेल में सुनाया।

यह मामला अक्टूबर 2024 में इंग्लैंड की क्रिकेट टीम के पाकिस्तान दौरे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में कथित बाधा डालने से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, ईमान मजारी और उनके पति ने इस्लामाबाद में क्रिकेट टीम के लिए निर्धारित सुरक्षा मार्ग पर लगाए गए बैरियर हटाए थे। उन पर सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित करने के आरोप भी लगाए गए थे।

दोनों ने आरोपों से किया इनकार
ईमान मजारी और हादी अली चट्ठा ने अदालत में अपने ऊपर लगाए गए आरोपों से इनकार किया था। उनका कहना था कि वे अदालत जा रहे थे, तभी उन्हें रास्ते में पुलिस द्वारा लगाए गए बैरियर मिले। ईमान मजारी ने पुलिस पर उनके साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप भी लगाया था।

अदालत ने आतंकवाद निरोधक कानून के तहत दोनों को 10 साल की सजा और एक-एक लाख पाकिस्तानी रुपये का जुर्माना लगाया। इसके अलावा सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने के मामले में एक साल और सरकारी कर्मचारियों पर हमला करने के आरोप में दो साल की अतिरिक्त सजा भी सुनाई गई। हालांकि, सभी सजाएं एक साथ चलेंगी, इसलिए कुल जेल की अवधि 10 साल होगी।

पहले भी सुनाई गई थी 17 साल की सज़ा
इससे पहले जनवरी 2026 में सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े एक अन्य मामले में ईमान मजारी और उनके पति को 17-17 साल की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, 17 सितंबर 2026 को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने उस सजा पर रोक लगा दी थी। इसके कुछ ही घंटों बाद पुलिस ने उन्हें सुरक्षा से जुड़े दूसरे मामले में दोबारा गिरफ्तार कर लिया था।

मानवाधिकार संगठनों ने उठाए सवाल
इस फैसले के बाद पाकिस्तान की न्याय व्यवस्था और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि यह पाकिस्तान की न्याय व्यवस्था और निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

ईमान मजारी पाकिस्तान में लापता लोगों, पत्रकारों, अल्पसंख्यकों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं से जुड़े मामलों में कानूनी पैरवी करती रही हैं। उनके परिवार ने फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की बात कही है।

 

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *