5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाए जाने के छह साल बाद, जम्मू-कश्मीर ने जबरदस्त बदलाव देखा

श्रीनगर: 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाए जाने के छह साल बाद, जम्मू-कश्मीर ने जबरदस्त बदलाव देखा है। यहां बुनियादी ढांचे, संपर्क सुविधाओं, पर्यटन और निवेश से जुड़े प्रोजेक्ट्स में बड़ी प्रगति हुई है, जिससे क्षेत्र का विकास तेज़ी से आगे बढ़ा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की अगुवाई में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद में गिरावट आई है और विकास ने अच्छी प्रगति की है।

अधिकारियों का कहना है कि यह दौर जम्मू-कश्मीर को देश की समग्र विकास यात्रा से जोड़ने की दिशा में एक अहम मोड़ साबित हुआ है।

2019 के बाद की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है संपर्क व्यवस्था में सुधार। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 6 जून 2025 को शुरू की गई कटरा-श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस ने जम्मू क्षेत्र और कश्मीर घाटी के बीच यात्रा का समय काफी घटा दिया है, जिससे व्यापारियों और पर्यटकों दोनों को बड़ा फायदा हुआ है।

साथ ही, श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से अब अधिक सीधे उड़ानें शुरू हुई हैं, जो कश्मीर को देश के बड़े शहरों से जोड़ रही हैं। इससे स्थानीय लोगों और पर्यटकों दोनों के लिए यात्रा आसान हुई है। यह पर्यटन और व्यापार क्षेत्रों के लिए एक बड़ा बढ़ावा साबित हुआ है।

कई अहम रणनीतिक प्रोजेक्ट, जैसे ज़-मोड़ और ज़ोजिला सुरंग, अपने अंतिम चरण में हैं और ये पूरे साल लद्दाख को जोड़ने वाली सड़क सुविधा का वादा करते हैं। उत्तर कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में लंबे समय से लंबित साधना सुरंग परियोजना को भी मंजूरी मिल चुकी है, जिससे करनाह जैसे सीमावर्ती इलाकों को घाटी के बाकी हिस्सों से जोड़ना आसान होगा।

मई 2023 में श्रीनगर में आयोजित जी20 वर्किंग ग्रुप की बैठक की सफल मेज़बानी ने जम्मू-कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई। विदेशी प्रतिनिधियों ने घाटी में वैश्विक पर्यटन और निवेश की संभावना की सराहना की और सुरक्षा व बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के प्रशासन के प्रयासों की तारीफ की।

पर्यटन इन सुधारों का सबसे बड़ा लाभ पाने वाला क्षेत्र बनकर उभरा है। पिछले कुछ वर्षों में अमरनाथ यात्रा में रिकॉर्ड तोड़ श्रद्धालुओं ने भाग लिया है, वहीं श्रीनगर का ट्यूलिप गार्डन लाखों पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है, जिससे यह एशिया के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में शामिल हो गया है। गुलमर्ग में आयोजित होने वाले विंटर स्पोर्ट्स इवेंट्स भी काफी लोकप्रिय हो गए हैं, जिनमें देश-विदेश से पर्यटक आ रहे हैं।

केंद्र शासित प्रदेश में नए होटल, होमस्टे और एडवेंचर टूरिज़्म प्रोजेक्ट शुरू हुए हैं, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के नए मौके बने हैं। होटल व्यवसायियों का कहना है कि बेहतर बुनियादी ढांचे और जम्मू-कश्मीर को एक ‘सालभर घूमने लायक जगह’ के रूप में प्रचारित करने से उन्हें वर्षों की अस्थिरता से उबरने में मदद मिली है।

जे&के ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट ने आईटी, नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा और कृषि आधारित उद्योगों में बड़े निवेश का रास्ता खोला है। अधिकारियों का कहना है कि ये प्रोजेक्ट न केवल रोजगार के अवसर पैदा करेंगे, बल्कि केंद्र शासित प्रदेश के प्रमुख क्षेत्रों को आधुनिक भी बनाएंगे।

बेरोजगारी की समस्या को दूर करने के लिए प्रशासन ने कई स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम और स्टार्टअप सहायता योजनाएं शुरू की हैं। ज़िले-ज़िले में खोले गए ट्रेनिंग सेंटर्स युवाओं को आईटी, हॉस्पिटैलिटी और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में काम करने के लिए जरूरी हुनर सिखा रहे हैं।

2019 के बाद सरकार ने आधुनिक खेती के तरीकों और केसर व सेब जैसे कश्मीरी उत्पादों के लिए जीआई टैगिंग को प्राथमिकता दी है, जिससे इनकी बाजार में कीमत और पहचान बढ़ी है। कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं और बेहतर परिवहन व्यवस्था ने किसानों को फसल के बाद होने वाले नुकसान को कम करने में मदद की है।

स्वास्थ्य सेवाओं में भी सुधार हुआ है। जिला अस्पतालों में अब बेहतर जांच सुविधाएं उपलब्ध हैं। विजयपुर (जम्मू) और अवंतीपोरा (कश्मीर) में नए एम्स कैंपस विकसित हो रहे हैं, जो चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर बनाने में बड़ी भूमिका निभाएंगे।

उच्च शिक्षा क्षेत्र में नए डिग्री कॉलेज और कौशल आधारित कोर्स शुरू किए गए हैं। सरकार की पहल का मकसद जम्मू-कश्मीर को शिक्षा का एक केंद्र बनाना है, ताकि यहां के छात्रों को ज्यादा अवसर मिल सकें।

जम्मू-कश्मीर की औद्योगिक नीति ने दवा उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण और कपड़ा उद्योग में कई निवेशकों को आकर्षित किया है। कई नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं, जिससे नए व्यवसायों को जगह मिलेगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल सेवाओं का दायरा भी बढ़ा है, जिससे लोग अब सरकारी सुविधाएं ऑनलाइन आसानी से ले पा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि ई-गवर्नेंस मॉडल ने कामकाज में देरी और भ्रष्टाचार को कम किया है और पारदर्शिता बढ़ाई है।

सरकार ने सांस्कृतिक त्योहारों, हस्तशिल्प प्रदर्शनियों और संगीत कार्यक्रमों को भी बढ़ावा दिया है, जिससे स्थानीय कारीगरों और कलाकारों को कश्मीरी विरासत दिखाने का मंच मिला है।

गुलमर्ग के एक होटल मालिक अब्दुल रशीद ने कहा, “हम वो बदलाव देख रहे हैं जो 2019 से पहले सोचे भी नहीं जा सकते थे। सड़कें बेहतर हो गई हैं और बड़ी संख्या में पर्यटक आ रहे हैं, जिससे हमारे व्यापार को फायदा हुआ है।”

पुलवामा की एक युवा उद्यमी शाज़िया भाट ने कहा, “स्टार्टअप के लिए शुरू की गई योजनाओं की मदद से मैंने अपना हस्तशिल्प ई-कॉमर्स बिज़नेस शुरू किया है। पहले यह मुमकिन नहीं था।”

प्रशासन का कहना है कि बेहतर सुरक्षा व्यवस्था ने विकास के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया है। आतंकवादी गतिविधियों में कमी और सख्त क़ानून व्यवस्था के चलते निवेशकों और पर्यटकों का भरोसा बढ़ा है।

हालांकि तरक्की दिख रही है, लेकिन स्थानीय लोगों की मांग है कि दूर-दराज़ इलाकों में प्रोजेक्ट्स को तेज़ी से पूरा किया जाए। करनाह निवासी बशीर अहमद ने कहा, “हमें सीमावर्ती इलाकों में बेहतर स्कूल और स्वास्थ्य सेवाएं चाहिए। विकास हर कोने तक पहुँचना चाहिए।”

अधिकारियों का कहना है कि ये तमाम प्रयास जम्मू-कश्मीर को शांति, खुशहाली और तरक्की का मॉडल बनाने की सोच को दिखाते हैं। एक अधिकारी ने कहा, “पिछले छह साल जम्मू-कश्मीर को विकास और अवसरों का केंद्र बनाने की दिशा में बदलाव के साल रहे हैं।”

अनुच्छेद 370 हटाए जाने के छह साल पूरे होने पर जम्मू-कश्मीर अब एक नए रास्ते पर बढ़ता दिख रहा है—जहां बुनियादी ढांचे का विकास, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और सामाजिक-आर्थिक सुधार एक साथ आगे बढ़ रहे हैं, जिससे लोगों में एक बेहतर भविष्य की उम्मीद जगी है।

जब से अगस्त 2020 में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने जम्मू-कश्मीर की कमान संभाली है, तब से यह केंद्र शासित प्रदेश शांति और स्थिरता की ओर तेजी से बढ़ा है। उनकी सरकार ने जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने, सुरक्षा व्यवस्था सुधारने और विकास कार्यों को बढ़ावा देने जैसी कई पहलें की हैं, जिनसे अशांति को कम करने में मदद मिली है।

मनोज सिन्हा के कार्यकाल के दौरान हुए सबसे अहम बदलावों में से एक है कश्मीर की सड़कों पर संगठित पत्थरबाज़ी की घटनाओं का लगभग पूरी तरह से खत्म हो जाना। यह बदलाव सख्त क़ानून व्यवस्था, समुदाय तक पहुंच बनाने वाले कार्यक्रमों और युवाओं को बेहतर शिक्षा, खेल और रोज़गार के अवसर देने की कोशिशों के ज़रिए मुमकिन हुआ है, जिससे वे भटकाव की राह से दूर हुए हैं।

सिन्हा द्वारा दिखाए गए “शांति के रास्ते” के तहत प्रशासन ने ऐसा माहौल तैयार करने की कोशिश की है, जहां हिंसा और डर की जगह बातचीत, विकास और सम्मान को बढ़ावा मिले। इस बदलाव से न सिर्फ़ लोगों का शासन में भरोसा लौटा है, बल्कि यह लंबे समय तक शांति बनाए रखने की मजबूत नींव भी बन गया है।

पिछले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर ने अलगाववादी राजनीति और सड़कों पर होने वाली हिंसा के लगभग अंत को देखा है, जो कि क्षेत्र के भविष्य की दिशा में एक ऐतिहासिक बदलाव है। कभी बेहद असरदार माने जाने वाले उन अलगाववादी नेताओं की पूरी प्रणाली, जो हड़ताल की अपीलों और जनउत्तेजना के जरिए माहौल बिगाड़ते थे, अब पूरी तरह टूट चुकी है। यह बदलाव प्रशासन की कड़े फैसलों, आतंकी फंडिंग नेटवर्क को खत्म करने और राष्ट्रविरोधी सोच फैलाने वाले संगठनों पर कठोर कार्रवाई के कारण आया है।

एक समय पाकिस्तान प्रायोजित विरोध-प्रदर्शनों की पहचान बन चुकी संगठित पत्थरबाज़ी अब लगभग पूरी तरह से खत्म हो चुकी है। इन विरोधों का मकसद आम ज़िंदगी को बाधित करना, प्रशासन को कमज़ोर दिखाना और अस्थिरता फैलाना होता था। लेकिन क़ानून के सख्त पालन, सामाजिक-आर्थिक पहलों और युवाओं को बेहतर मौके देने के ज़रिए प्रशासन ने ऐसे माहौल को खत्म कर दिया है, जिससे अब सड़कों पर सामान्य स्थिति लौट आई है।

दशकों तक जम्मू-कश्मीर का विकास इसलिए रुका रहा क्योंकि अलगाववाद और पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद ने वहां डर और असुरक्षा का माहौल बना रखा था। लगातार हड़तालें, हिंसक प्रदर्शन और आतंकी धमकियों के कारण निवेशक, पर्यटक और विकास से जुड़ी एजेंसियां राज्य से दूर रहीं, जिससे बुनियादी ढांचे से जुड़े कई प्रोजेक्ट या तो रुक गए या अधूरे ही रह गए। नतीजा ये हुआ कि जम्मू-कश्मीर शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार जैसे अहम क्षेत्रों में देश के बाकी हिस्सों से पीछे रह गया।

लेकिन अब जब ये अस्थिर करने वाले तत्व खत्म हो चुके हैं, तो प्रशासन ने अपना पूरा ध्यान विकास और सुशासन पर लगाया है। शांति की वजह से वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें, सड़क और सुरंग नेटवर्क का विस्तार और श्रीनगर में जी20 जैसी वैश्विक बैठकों का आयोजन संभव हो पाया है—ऐसे काम जो अशांति के दौर में सोचे भी नहीं जा सकते थे।

यह टकराव से निर्माण की ओर बढ़ता हुआ बदलाव जम्मू-कश्मीर के लिए एक नए युग की शुरुआत है। अलगाववाद का अंत और पाकिस्तान समर्थित हिंसा पर रोक लगने से न सिर्फ़ व्यवस्था बहाल हुई है, बल्कि अब इस क्षेत्र में स्थायी विकास के लिए ज़मीन तैयार हो गई है, जिससे यहां के लोगों को तरक्की और खुशहाली की नई उम्मीदें मिली हैं।

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