मौलाना मंज़ूर अहमद एजाज़ी : 13 साल जेल में गुज़ारने वाले जंग-ए-आज़ादी के सिपाही

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मुज़फ्फरपुर, बिहार – मुल्क की आज़ादी की लड़ाई में अहम किरदार निभाने वाले मौलाना मंज़ूर अहमद एजाज़ी का जन्म 1898 में क़स्बा दिहुली (मुज़फ्फरपुर, बिहार) में हुआ। तालीम के दिनों से ही वे आज़ादी के जलसों और जुलूसों में शामिल रहते थे। महज़ 15 साल की उम्र में पहली बार गिरफ़्तार हुए।

महात्मा गांधी के बुलावे पर उन्होंने चंपारण किसान आंदोलन में हिस्सा लिया और 1917 में रेल ऐक्ट के खिलाफ सत्याग्रह किया। 1919 में इंडियन नेशनल कांग्रेस के युथ लीडर के तौर पर ख़िलाफ़त और नॉन-कोऑपरेशन मूवमेंट में सक्रिय हुए, फंड इकट्ठा किया और नौजवानों को आंदोलन से जोड़ा। 1921, 1930, 1941 और 1942 में उन्हें कई बार गिरफ़्तार किया गया और उन्होंने कुल 13 साल जेल में गुज़ारे।

1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में उन्होंने ज़बरदस्त सत्याग्रह किया, जिसके चलते उन्हें 4 साल की सज़ा हुई। जेल से बाहर आने के बाद भी वे समाज और तालीम की तरक्की के लिए काम करते रहे। वे मुज़फ्फरपुर लोकल बोर्ड के चेयरमैन और बाद में बिहार विधानसभा के विधायक भी बने।

17 मई 1969 को मौलाना मंज़ूर अहमद अज़ाज़ी का इंतकाल हुआ, लेकिन उनकी कुर्बानियां हमेशा याद रखी जाएंगी।

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