गरीबी से उठकर बनी डिप्टी कलेक्टर – वसीमा शेख की मिसाल

महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले की रहने वाली वसीमा शेख आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उनका बचपन बहुत मुश्किल हालातों में बीता। पिता मानसिक रूप से अस्वस्थ थे और माँ घर-घर जाकर चूड़ियाँ बेचती थीं ताकि परिवार का खर्च चल सके।

गाँव में केवल प्राथमिक स्कूल था, लेकिन पढ़ाई के लिए वसीमा ने हार नहीं मानी। आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें कई किलोमीटर चलकर जाना पड़ता था। कभी-कभी रिश्तेदारों के घर ठहरकर भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने खुले विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल की।

मेहनत और संघर्ष के बल पर वसीमा ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षा में सफलता पाई और डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयनित हुईं। यह उपलब्धि केवल उनके लिए ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए गर्व की बात है।

वसीमा की कहानी साबित करती है कि हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर हौसला और लगन हो तो कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है। वह आज युवाओं को यह संदेश देती हैं कि सपनों को कभी मत छोड़ो, संघर्ष करो, सफलता ज़रूर मिलेगी।

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