हरियाणा के हिसार से जुड़े होशियार खान का जीवन ईमानदारी, समाजसेवा और सुधार की एक प्रेरक कहानी है। 15 दिसंबर 1958 को हिसार जिले के थुराना गांव में जन्मे होशियार खान ऐसे परिवार से आते हैं जहाँ सादगी, धार्मिकता और इंसानियत को सर्वोपरि रखा गया। अशिक्षित माता-पिता के बावजूद उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की और 1978 में सिंचाई विभाग में सरकारी सेवा शुरू की, जहाँ 2016 तक उन्होंने जिम्मेदारी से काम किया।
सरकारी सेवा के साथ-साथ वे कर्मचारी अधिकारों के लिए भी सक्रिय रहे और विभिन्न यूनियन पदों पर रहकर संघर्ष किया। लेकिन उनका सबसे बड़ा योगदान वक्फ संपत्तियों के सही उपयोग और पारदर्शिता से जुड़ा है। ऑल इंडिया मुस्लिम वेलफेयर कमेटी के सहयोग से उन्होंने वक्फ कानून में 2013 के संशोधन के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जिससे लीज प्रक्रिया को खुली बोली से जोड़ा गया। इससे सालाना करोड़ों रुपये की आय संभव हो सकी।
कमेटी ने हिसार और हरियाणा में कब्रिस्तानों से अवैध कब्जे हटवाने में भी प्रशासन से समन्वय किया। बराह क्वार्टर कब्रिस्तान का रखरखाव, मदरसे का संचालन, बच्चों की शिक्षा और सुंदर बाग़ीचे का विकास उनके समर्पण को दर्शाता है। होशियार खान का जीवन बताता है कि नीयत साफ हो तो समाज में स्थायी बदलाव लाया जा सकता है।
