5 साल में क़ब्ज़े वाले यरुशलम में 144 फ़िलिस्तीनियों की मौत, 11 हज़ार से ज़्यादा गिरफ़्तारियाँ

क़ब्ज़े वाले पूर्वी यरुशलम में फ़िलिस्तीनियों पर इसराइली कार्रवाइयों को लेकर एक गंभीर रिपोर्ट सामने आई है। यरुशलम गवर्नरेट द्वारा जारी और पैलेस्टाइन इंफॉर्मेशन सेंटर में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक़, 2021 से 2025 के बीच इसराइली सुरक्षा बलों ने 144 फ़िलिस्तीनियों की हत्या की। मारे गए लोगों में से 51 फ़िलिस्तीनियों के शव इसराइल ने अब तक वापस नहीं किए, जिसे गवर्नरेट ने सामूहिक सज़ा की नीति बताया। अधिकारियों का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून का गंभीर उल्लंघन है।

रिपोर्ट के अनुसार, बीते पाँच वर्षों में 11,555 फ़िलिस्तीनियों को गिरफ़्तार किया गया। इनमें बच्चे और महिलाएँ भी शामिल हैं। इसके अलावा, इसराइली सैनिकों और यहूदी सेटलर्स की कार्रवाइयों में 6,528 लोग घायल हुए। और तो और अल-अक़्सा मस्जिद को लेकर भी रिपोर्ट में चिंताजनक आँकड़े सामने आए हैं। इसमें बताया गया है कि पाँच वर्षों में 2,89,497 सेटलर्स ने अल-अक़्सा मस्जिद परिसर में घुसपैठ की। सिर्फ़ 2025 में ही 74,114 बार ऐसी घटनाएँ दर्ज की गईं। रिपोर्ट के अनुसार, यह ऐतिहासिक यथास्थिति को बदलने की कोशिश का हिस्सा है।

घर तोड़ने और ज़मीन खाली कराने के मामलों में भी बढ़ोतरी देखी गई। इसके अलावा इसराइल ने यरुशलम में 1,732 फ़िलिस्तीनी घरों और ढाँचों को गिराया। इसके साथ ही 1,439 ध्वस्तीकरण, ज़ब्ती और बेदख़ली के आदेश जारी किए गए, जिससे कई परिवार बेघर हो गए। और, 1,467 सेटलर हमले फ़िलिस्तीनियों और उनकी संपत्ति पर दर्ज किए गए। अदालतों के फ़ैसलों के तहत 1,491 लोगों को जेल भेजा गया और 2,386 लोगों को निर्वासन आदेश दिए गए, जिनमें से ज़्यादातर को अल-अक़्सा मस्जिद में जाने से रोका गया।

यरुशलम गवर्नरेट का कहना है कि ये सभी आँकड़े यरुशलम में फ़िलिस्तीनी मौजूदगी को कमज़ोर करने और शहर की जनसंख्या संरचना बदलने की एक सुनियोजित नीति को दिखाते हैं।

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