इसराइल द्वारा क़ाबिज़ फ़लस्तीनी क्षेत्र ग़ाज़ा में वर्ष 2023 के बाद ऐसा पहली बार होगा जब जनवरी महीने में वहाँ के लोगों को इतनी खाद्य सहायता मुहैया कराई जा सकेगी जिससे उनकी न्यूनतम बुनियादी खाद्य पोषण ज़रूरतें पूरी हो सकें.
यूएन प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने सोमवार को न्यूयॉर्क में नियमित प्रैस वार्ता में पत्रकारों को बताया कि मानवीय सहायता एजेंसियों के पास, अक्टूबर 2023 के बाद पहली बार जनवरी में, समुचित मात्रा में पोषक खाद्य भंडार है जिससे लोगों की 100 प्रतिशत पोषक ज़रूरतें पूरी हो सकेंगी.
वर्ष 2025 के अन्त तक, ग़ाज़ा में परिवारों को, उनकी पोषण ज़रूरतें पूरी करने और उनके स्वस्थ रहने के लिए ज़रूरी, 50 से 75 प्रतिशत तक खाद्य सामग्री मिल सकी थी.
संयुक्त राष्ट्र, ग़ाज़ा में खाद्य असुरक्षा से निपटने के लिए, हर दिन, दो किलो वज़न वाली लगभग एक लाख 70 हज़ार ब्रैड का उत्पादन किए जाने में मदद कर रहा है.
इनमें से लगभग एक तिहाई संख्या, आश्रय स्थलों और सामुदायिक स्थलों में मुफ़्त मुहैया कराई जाती हैं और बाक़ी ब्रैड, सस्ते दामों पर बेची जाती हैं.
यूएन प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र और उसके साझीदार संगठनों ने केवल बीते सप्ताह के दौरान ही, करीम शेलॉम, करेम अबू सलाम और ज़िकिम सीमा चौकियों के ज़रिए, 10 हज़ार मीट्रिक टन सहायता सामग्री, ग़ाज़ा के भीतर पहुँचाई है.
इस सामग्री में खाद्य सामग्री व भोजन पकाने वाला सामान, पशुओं का चारा, साबुन और स्वच्छता की चीज़ें, सर्दियों के कपड़े, कम्बल और गद्दे वग़ैरा शामिल हैं.
ग़ौरतलब है कि इसराइली अधिकारियों ने हाल ही में घोषणा की थी कि कुछ ग़ैर-सरकारी सहायता संगठनों के अभियानों को स्थगित किया जाएगा.
50 से अधिक ऐसे ग़ैर-सरकारी संगठनों (NGOs) ने आगाह किया गया है कि यदि ऐसा किया गया तो, आम लोगों के लिए अहम सहायता ख़तरे में पड़ जाएगी.
हवाई हमलों में लोग हताहत
इस बीच यूएन आपदा राहत समन्वय एजेंसी – OCHA ने सप्ताहान्त के दौरान ख़बर दी कि ग़ाज़ा पट्टी के अनेक इलाक़ों में, गत सप्ताह मंगलवार से शुक्रवार के बीच इसराइली हवाई हमले और बन्दूकों से गोलीबारी जारी रही.
OCHA ने ग़ाज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय के हवाले से कहा कि गुरूवार तक पूरे ग़ाज़ा पट्टी इलाक़े में 48 घंटों के दौरान पाँच फ़लस्तीनी मारे गए और 11 अन्य घायल हो गए.
ये सब घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब ग़ाज़ा में कड़ी सर्दियों का मौसम शुरू हो चुका है और विनाशकारी सर्दीले तूफ़ान, बुनियादी ढाँचे को नुक़सान पहुँचा रहे हैं और पानी, स्वच्छता व साफ़-सफ़ाई सेवाओं पर भारी दबाव है.
Source: UN News Hindi
