Author: Prakash K Ray
युद्धों और गृहयुद्धों से जूझ रहे अस्थिर पश्चिम एशिया में अशांति का एक और दौर दस्तक दे रहा है.
ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिका लगातार हमलों की धमकी दे रहा है. ईरान में हिंसक अराजकता फैलाकर सत्ता गिराने की अमेरिका और इज़रायल की कोशिश असफल होने के बाद अब कुछ दूसरे ख़तरनाक पैंतरों का सहारा लिया जा रहा है.
जंगी बेड़े की तैनाती
जैसा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है, समुद्री जंगी बेड़ा ईरान के क़रीब पहुँच रहा है. इस बेड़े में युद्धक वाहक यूएसएस अब्राहम लिंकन के साथ-साथ मिसाइल-रोधी जहाज़ हैं.
नए आर्थिक प्रतिबंध
अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाते हुए नौ तेलवाहक बेडों और उनकी कंपनियों/मालिकों पर प्रतिबंध लगाया है. इसका मतलब यह है कि पहले से प्रतिबंधित जहाज़ों के साथ-साथ इन जहाज़ों को भी लूटा या तबाह किया जा सकता है. इनके मालिकों की संपत्तियों को हड़पा जा सकता है.
इराक़ पर सीरिया से हमला
अमेरिका ने इराक़ की सरकार से साफ़ कह दिया है कि वह सरकार पर ईरान-समर्थित दलों का प्रभाव कम करे तथा ईरान-समर्थित सांसदों को मंत्रिमंडल में न रखे.
यह भीतर से ईरानी प्रभाव को कमज़ोर करने की कोशिश है.
बाहर से कोशिश के क्रम में सीरिया से इस्लामिक स्टेट और अल-क़ायदा से जुड़े आतंकियों को इराक़ में हमले के लिए इस्तेमाल की कोशिश भी हो रही है. बीते दिनों अमेरिका ने सीरिया के कुर्दों को धोखा दे दिया, जिसके बाद सीरियाई इस्लामिक स्टेट ने कुर्दों को बड़े इलाक़े से पीछे धकेल दिया. वहाँ कुर्दों पर भयानक दमन और अत्याचार जारी है.
कुर्दों के क़ब्ज़े से इस्लामिक स्टेट के हज़ारों लड़ाकों को छुड़ाया गया है. सीरिया में सत्तासीन इस्लामिक स्टेट और छुड़ाये गए लड़ाकों में कई देशों के आतंकी शामिल हैं. ये आतंकी इराक़ी सीमा पर जुट रहे हैं. इनके निशाने पर मुख्य रूप से ईरान-समर्थित पॉपुलर मूवमेंट है. साथ ही, इनका इरादा अन्य समूहों, ख़ासकर इराक़ी कुर्दों, को निशाना बनाना है, जिनके सर से अमेरिका ने अपना हाथ हटा लिया है.
इस्लामिक स्टेट को अमेरिका का संरक्षण
जब सीरिया की ओर से इराक़ पर हमला होगा, तो स्वाभाविक रूप ईरान अपने समर्थक समूहों की मदद करने की कोशिश करेगा. तब उन कोशिशों पर जंगी बेड़े से हमला होगा.
इज़रायल, तुर्की और अरब देशों का फ़ायदा
इलाक़े में आशंकाओं के बादल घिरते देख इज़रायल और अन्य देशों की उड़ानें स्थगित की जा रही हैं. ईरान पर अमेरिका का हमलावर होना मुख्य रूप से इज़रायल के फ़ायदे में है, जैसे पहले के विभिन्न युद्ध रहे हैं. सीरिया से लगी इराक़ी सीमा में कुछ दूर तक अगर इस्लामिक स्टेट का क़ब्ज़ा हो जाता है, तो भविष्य में सीरिया और इराक़ के रास्ते ईरान पर ज़मीनी हमला करने का एक गलियारा इज़रायल को मिल जायेगा.
इन संभावित स्थितियों में तुर्की और अरब देश अपना पल्ला झाड़ सकते हैं और ईरान से कह सकते हैं कि इनमें उनका लेना-देना नहीं है, इसलिए वह उन देशों में स्थित अमेरिकी सैनिक ठिकानों को निशाना न बनाए या उनके हितों को नुक़सान न पहुँचाए.
अरब देश अपने सैनिक ठिकानों को अमेरिका को इस्तेमाल नहीं करने देंगे और साथ ही, इज़रायल या अमेरिकी हितों पर हमले के लिए ईरान को अपनी वायु सीमा का इस्तेमाल नहीं करने देंगे.
ईरान और ईरान-समर्थित समूहों के कमज़ोर होने से अरब देशों, विशेषकर खाड़ी देशों तथा तुर्की को मध्य-पूर्व और उत्तरी अफ़्रीका में अपने प्रभाव को बढ़ाने का रास्ता हमवार होता जायेगा.
