ग़ज़ा की जंग ने शिक्षा की नींव तबाह कर दी, बच्चों का भविष्य ख़तरे में: यूनिसेफ़

ग़ज़ा: यूनिसेफ़ (UNICEF) ने चेतावनी दी है कि ग़ज़ा में जारी युद्ध ने शिक्षा के क्षेत्र में वर्षों की मेहनत को पूरी तरह मिटा दिया है और यह हालात “बच्चों के भविष्य पर सीधा हमला” हैं।

यूनिसेफ़ के प्रवक्ता जेम्स एल्डर के मुताबिक लगभग ढाई साल से जारी इज़राइली हमलों ने ग़ज़ा की शिक्षा व्यवस्था को गंभीर रूप से नुकसान पहुँचाया है, जिससे एक पूरी पीढ़ी का भविष्य दांव पर लग गया है। उन्होंने बताया कि यूनिसेफ़ ग़ज़ा में अपने उन शिक्षा कार्यक्रमों का विस्तार कर रहा है, जो दुनिया के सबसे बड़े आपातकालीन शिक्षा अभियानों में से एक है।

एल्डर के मुताबिक़, इस समय ग़ज़ा में करीब 60 प्रतिशत स्कूली उम्र के बच्चे किसी भी तरह की प्रत्यक्ष शिक्षा से वंचित हैं, जबकि 90 प्रतिशत स्कूल या तो बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं या पूरी तरह नष्ट कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा युद्ध से पहले ग़ज़ा में फ़िलिस्तीनियों की साक्षरता दर दुनिया में सबसे ऊँची दरों में शामिल थी। शिक्षा वहाँ केवल पढ़ाई का ज़रिया नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही मजबूती, गर्व और प्रगति की पहचान थी। आज वही विरासत गंभीर संकट में है।

इसके अलावा जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों की प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान एल्डर ने बताया कि स्कूलों, विश्वविद्यालयों और लाइब्रेरियों के नष्ट होने से शिक्षा में हुई वर्षों की प्रगति पूरी तरह खत्म हो गई है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यह तबाही सिर्फ़ इमारतों की नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य को अंधेरे में धकेलने वाली है।

संयुक्त राष्ट्र के एक हालिया आकलन के अनुसार, जो जुलाई की सैटेलाइट तस्वीरों पर आधारित है, कम से कम 97 प्रतिशत स्कूल किसी न किसी स्तर पर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इस हालात को देखते हुए यूनिसेफ़ ने अपने “Back to Learning” कार्यक्रम का विस्तार करने की घोषणा की है, जिसके तहत ग़ज़ा में 3 लाख 36 हज़ार बच्चों तक शिक्षा पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है।

एल्डर ने कहा कि स्थायी स्कूल भवनों के पुनर्निर्माण का इंतज़ार करना संभव नहीं है, इसलिए बच्चों को टेंटों, सामुदायिक केंद्रों और स्थानीय जगहों पर पढ़ाई से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

“सीखना ज़िंदगियाँ बचाता है,” एल्डर ने कहा। उन्होंने बताया कि यूनिसेफ़ के लर्निंग सेंटर बच्चों को असुरक्षित हालात में भी एक सुरक्षित माहौल प्रदान करते हैं।इन केंद्रों के ज़रिए बच्चों को न सिर्फ़ शिक्षा, बल्कि नियमित दिनचर्या, ज़रूरी जानकारी, मानसिक सहयोग, स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षा से जुड़ी सेवाएँ भी दी जाती हैं। इन जगहों पर साफ़-सफ़ाई, शौचालय और हाथ धोने की उचित सुविधाएँ भी मौजूद हैं।

ग़ज़ा के उत्तरी हिस्सों में भारी तबाही के चलते यूनिसेफ़ के ज़्यादातर लर्निंग सेंटर मध्य और दक्षिणी ग़ज़ा में स्थापित किए जा रहे हैं। एल्डर ने बताया कि इन केंद्रों की माँग मौजूदा क्षमता से कहीं ज़्यादा है। हाल ही में ग़ज़ा के दौरे के दौरान उन्होंने देखा कि दर्जनों माता-पिता अपने बच्चों के लिए जगह पाने की उम्मीद में लर्निंग सेंटरों के बाहर इंतज़ार कर रहे थे। उन्होंने कहा कि एक बच्चे को एक साल तक यूनिसेफ़ समर्थित शिक्षा केंद्र में शामिल करने का ख़र्च लगभग 280 डॉलर आता है, जिसमें मानसिक सहयोग भी शामिल है। इस साल के शेष समय में 3 लाख 36 हज़ार बच्चों तक पहुँचने के लिए यूनिसेफ़ को तत्काल 8.6 करोड़ डॉलर की आवश्यकता है। इसके अलावा एल्डर ने यह भी कहा, “यह उतनी राशि है जितनी दुनिया केवल एक या दो घंटों में कॉफ़ी पर खर्च कर देती है।”

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि Back to Learning कार्यक्रम केवल आपातकालीन सहायता नहीं है, बल्कि ग़ज़ा के भविष्य को बचाने की कोशिश है। इसका उद्देश्य बच्चों में उम्मीद को ज़िंदा रखना, उनकी गरिमा और दिशा को बहाल करना और भविष्य के पुनर्निर्माण की नींव तैयार करना है। इसी बीच यूनिसेफ़ ने मंगलवार को घोषणा की कि ढाई साल में पहली बार वह ग़ज़ा में स्कूल और शिक्षा से जुड़ा सामान पहुँचाने में सफल हुआ है, जिसे पहले इज़राइली अधिकारियों द्वारा रोका जा रहा था। इन सामग्रियों में हज़ारों पेंसिल, नोटबुक और लकड़ी के खेलने वाले ब्लॉक्स शामिल हैं। एल्डर के अनुसार, हाल ही में यूनिसेफ़ ने हज़ारों रिक्रिएशनल किट्स और सैकड़ों बॉक्स स्कूल सप्लाई ग़ज़ा भेजी हैं, जबकि अगले सप्ताह 2,500 और किट्स भेजने की योजना है।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *